“बांको है गढ़ बीठली, बाँको भड़ बीसल्ल।
खाण खेंचतो खेत मझ, दलमलतो अरिदल्ल।”
नमस्कार, प्यारे पर्यटकों!
तारागढ़ का किला, जिसे ‘गढ़ बीठली’ और ‘अजयमेरू’ के नाम से भी जाना जाता है, राजस्थान के सबसे प्राचीन और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण दुर्गों में से एक है। यह किला अरावली पर्वतमाला के उत्तुंग शिखर पर निर्मित है और अरावली पर्वतमाला की ऊँचाइयों पर समुद्र तल से 2855 फीट की ऊँचाई पर स्थित है और लगभग 80 एकड़ में फैला हुआ है।
किले का निर्माण और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
कर्नल टॉड के अनुसार, अजमेर नगर के संस्थापक राजा अजयराज चौहान (1105-1133 ई.) ने इस किले का निर्माण करवाया था। किले के नामकरण को लेकर कई मत हैं। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि राणा सांगा के भाई कुँवर पृथ्वीराज ने किले के कुछ भागों का निर्माण करवाया और अपनी पत्नी तारा के नाम पर इसका नाम तारागढ़ रखा। वहीं, एक अन्य मत के अनुसार, मुगल बादशाह शाहजहाँ के समय में विट्ठलदास गौड़ ने किले का जीर्णोद्धार करवाया, जिसके बाद इसे ‘गढ़ बीठली’ के नाम से भी जाना गया।
स्थापत्य कला और किले की संरचना
तारागढ़ की स्थापत्य कला इसके भव्य किलेबंदी और सुदृढ़ बुर्जों के लिए प्रसिद्ध है। इसके भीतर 14 विशाल बुर्जें हैं, जिनमें प्रमुख हैं: घूंघट, गूगड़ी, फूटी, नक्कारची, शृंगार-चँवरी, आर-पार का अत्ता, जानू नायक, पीपली, इब्राहीम शहीद, दोराई, बांदरा, इमली, खिड़की और फतेह बुर्ज। ये बुर्जें किले को मजबूती और सामरिक सुरक्षा प्रदान करती थीं।
किले के भीतर कई जलाशय भी थे, जैसे नाना साहब का झालरा, गोल झालरा, इब्राहीम का झालरा और बड़ा झालरा, जो किले के निवासियों के लिए जल आपूर्ति सुनिश्चित करते थे। इसके अलावा, किले के भीतर मुस्लिम संत मीरां साहेब की दरगाह भी स्थित है, जो धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
सामरिक महत्त्व और इतिहास में आक्रमण
तारागढ़ का किला अपने समय में बेहद सामरिक महत्त्व का था। इसका राजपूताना के मध्य में स्थित होना इसे हमेशा से आक्रमणकारियों के लिए एक महत्वपूर्ण लक्ष्य बनाता रहा। महमूद गजनवी से लेकर अंग्रेजों तक, इस किले ने कई आक्रमणों का सामना किया। हरविलास शारदा के अनुसार, राजस्थान के अन्य किलों की तुलना में सबसे अधिक आक्रमण तारागढ़ पर हुए।
राव मालदेव ने इस किले का पुनर्निर्माण करवाया और यहाँ पानी की आपूर्ति के लिए एक रहट का निर्माण भी करवाया। मालदेव की पत्नी, रूठी रानी उमादे, ने इसे अपना निवास बनाया था। बाद में, 1832 ई. में गवर्नर जनरल लॉर्ड विलियम बैंटिक ने इस किले की प्राचीर को तुड़वाकर इसका सामरिक महत्त्व समाप्त कर दिया, क्योंकि इसे उपद्रव का संभावित केंद्र माना जा रहा था।
राजस्थान का जिब्राल्टर
किले की भव्यता और उसकी सामरिक स्थिति को देखकर बिशप हैबर ने इसे यूरोप के जिब्राल्टर किले से तुलना की और कहा कि यदि इसे यूरोपीय तकनीक से पुनः निर्मित किया जाए, तो यह दूसरा जिब्राल्टर बन सकता है। इसी कारण इसे “राजस्थान का जिब्राल्टर” भी कहा जाता है।

स्थानीय मान्यताएँ और किले की पहचान
तारागढ़ किला एक लोककथा का भी हिस्सा है। इसे लोक संगीत में “गढबीरली” के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यह बीरली नामक पहाड़ी पर स्थित है। यहाँ एक मीठे नीम का पेड़ भी है, जिसे लेकर कहा जाता है कि जिन दंपतियों को संतान नहीं होती, यदि वे इस पेड़ के फल का सेवन करें, तो उनकी संतान प्राप्ति की इच्छा पूरी होती है। इस मान्यता के कारण यह किला एक धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से भी महत्त्वपूर्ण है।
पहुँचने के साधन
अजमेर शहर की अच्छी कनेक्टिविटी के कारण, किले तक पहुँचने में कोई कठिनाई नहीं होती है:
रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन अजमेर जंक्शन है, जो भारत के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है।
सड़क मार्ग: अजमेर प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ा हुआ है, और यहाँ तक पहुँचने के लिए बस और टैक्सी सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा किशनगढ़ हवाई अड्डा है, जो किले से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
यात्रा टिप्स
- दर्शन समय: तारागढ़ किला सुबह से शाम तक खुला रहता है, लेकिन सुबह का समय दर्शन के लिए बेहतर माना जाता है, जब भीड़ कम होती है और मौसम भी सुहावना रहता है।
- सबसे अच्छा समय: सर्दियों के मौसम (नवंबर से फरवरी) में तारागढ़ का दौरा सबसे अच्छा रहता है, क्योंकि गर्मियों में चढ़ाई थोड़ी मुश्किल हो सकती है।
- सुविधाएँ: चढ़ाई के लिए आरामदायक जूते पहनें, और साथ में पानी और कुछ स्नैक्स ज़रूर रखें क्योंकि किले के अंदर खाने-पीने की बहुत कम सुविधा उपलब्ध है।
निष्कर्ष
तारागढ़ किला अपने समय का एक अद्वितीय सैन्य संरचना और स्थापत्य कला का उत्कृष्ट नमूना है। इतिहास में इसके सामरिक महत्त्व और कई आक्रमणों का गवाह रहा यह किला न केवल युद्ध और किलेबंदी की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसकी सांस्कृतिक और धार्मिक महत्ता भी है। चाहे आप इतिहास प्रेमी हों या प्राकृतिक सौंदर्य के प्रेमी, तारागढ़ का किला निश्चित रूप से आपके अनुभव में चार चाँद लगा देगा।