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राजस्थान के अलवर जिले में स्थित भर्तृहरि मंदिर (Bhartrihari Temple) आध्यात्मिकता और इतिहास का एक अनूठा संगम है। यह मंदिर महान संत और योगी भर्तृहरि नाथ (Baba Bhartrihari Nath) की समाधि के रूप में प्रसिद्ध है और पूरे भारत से श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

मंदिर सरिस्का टाइगर रिजर्व के पास, अलवर से लगभग 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि अपने अद्भुत प्राकृतिक परिदृश्यों, हरी-भरी पहाड़ियों और झरनों के लिए भी प्रसिद्ध है। जो भी यहाँ आता है, वह एक अद्वितीय आध्यात्मिक और मानसिक शांति का अनुभव करता है

भर्तृहरि मंदिर का पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व

राजा से संन्यासी बनने की कहानी

भर्तृहरि नाथ का जीवन एक दर्दभरी प्रेम कहानी से प्रेरित एक अद्भुत आध्यात्मिक यात्रा है।

भर्तृहरि राजा विक्रमादित्य के भाई और उज्जैन के महान राजा थे। वे अपनी पत्नी रानी पिंगला से असीम प्रेम करते थे, लेकिन बाद में उन्हें पता चला कि उनकी रानी उनके प्रति वफादार नहीं थी। इस विश्वासघात से आहत होकर उन्होंने राजपाठ त्याग दिया और संन्यासी बन गए। उन्होंने गुरु गोरखनाथ जी की शरण में जाकर कठोर तपस्या की और अंततः आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त किया

इसलिए, भर्तृहरि मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि त्याग, आत्मज्ञान और भक्ति का प्रतीक भी है।

भर्तृहरि मंदिर की वास्तुकला और महत्व

1. समाधि स्थल और चमत्कारी जल स्रोत

कहा जाता है कि जब इस क्षेत्र में गंभीर जल संकट था, तब बाबा भर्तृहरि ने एक चमत्कार किया और एक चट्टान से पानी निकाला। यह झरना आज भी मंदिर के पास स्थित है और इसे पवित्र जल स्रोत माना जाता है।

2. राजस्थानी स्थापत्य कला

  • मंदिर राजस्थानी और नाथ संप्रदाय की पारंपरिक वास्तुकला में निर्मित है।
  • मंदिर के अंदर भर्तृहरि नाथ की समाधि स्थित है, जो एक विशाल पीले रंग के गुंबद के नीचे स्थापित है।
  • मंदिर में हमेशा एक अखंड जलती हुई ज्योति और एक धधकती हुई धूनी को संरक्षित रखा जाता है, जो उनकी अनंत आध्यात्मिक उपस्थिति का प्रतीक है।


भर्तृहरि मंदिर में विशेष आयोजन और मेले

भाद्रपद मेला (Bhadrapad Fair)

हर साल भाद्रपद (सितंबर) के महीने में यहाँ विशाल मेला आयोजित किया जाता है। यह मेला हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है, जो बाबा भर्तृहरि की समाधि के दर्शन करने और आध्यात्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने के लिए यहाँ आते हैं।

महाशिवरात्रि और गुरु पूर्णिमा

  • महाशिवरात्रि के दौरान यहाँ विशेष पूजा-अर्चना और रुद्राभिषेक किया जाता है।
  • गुरु पूर्णिमा पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने गुरुओं का आशीर्वाद लेने आते हैं।


भर्तृहरि मंदिर में करने योग्य चीजें

1. समाधि स्थल के दर्शन करें

अगर आप मानसिक शांति की तलाश में हैं, तो बाबा भर्तृहरि की समाधि पर बैठकर ध्यान करें। यहाँ का शांत वातावरण आत्मचिंतन और ध्यान के लिए आदर्श है।

2. पवित्र जल स्रोत में स्नान करें

कहा जाता है कि मंदिर के पास स्थित जल स्रोत का पानी रोगों को दूर करने और मन की शांति प्रदान करने में सहायक है।

3. पहाड़ियों में ट्रेकिंग करें और प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लें

मंदिर के आसपास की हरे-भरे जंगलों और अरावली पहाड़ियों में ट्रेकिंग करना एक अविस्मरणीय अनुभव हो सकता है।


भर्तृहरि मंदिर घूमने का सही समय

अगर आप इस पवित्र स्थान की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो सर्दियों के महीने (अक्टूबर से मार्च) में आना सबसे अच्छा रहेगा। इस दौरान मौसम सुहावना होता है और आप मंदिर के प्राकृतिक सौंदर्य का भरपूर आनंद ले सकते हैं।

📅 विशेष अवसर:

  • भाद्रपद मेला (सितंबर) – सबसे महत्वपूर्ण वार्षिक उत्सव
  • गुरु पूर्णिमा (जुलाई-अगस्त) – विशेष पूजा और आध्यात्मिक प्रवचन
  • महाशिवरात्रि (फरवरी-मार्च) – शिव भक्तों के लिए पावन पर्व


कैसे पहुँचे?

🚗 सड़क मार्ग:

  • दिल्ली से दूरी: 180 किमी (लगभग 4 घंटे की ड्राइव)
  • जयपुर से दूरी: 100 किमी (लगभग 2 घंटे की ड्राइव)
  • अलवर से दूरी: 35 किमी (लगभग 1 घंटे की ड्राइव)

🚉 रेल मार्ग:

  • निकटतम रेलवे स्टेशन: अलवर जंक्शन (35 किमी दूर)

✈️ हवाई मार्ग:

  • निकटतम हवाई अड्डा: जयपुर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (100 किमी दूर)


भर्तृहरि मंदिर के पास घूमने लायक अन्य स्थान

📌 सरिस्का टाइगर रिजर्व – बाघों और अन्य वन्यजीवों को देखने के लिए प्रसिद्ध।
📌 नीलकंठ महादेव मंदिर – प्राचीन शिव मंदिर, जो अपनी अद्भुत मूर्तिकला के लिए जाना जाता है।
📌 सिलिसेढ़ झील – शांत झील, जहाँ आप बोटिंग और प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले सकते हैं।
📌 अलवर सिटी पैलेस – अलवर की शाही विरासत का प्रतीक।


निष्कर्ष

भर्तृहरि मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एक गहरी आध्यात्मिक और ऐतिहासिक धरोहर है। यह मंदिर त्याग, प्रेम, भक्ति और आत्मज्ञान की अनूठी कहानी को दर्शाता है।

यदि आप आध्यात्मिक शांति, प्राकृतिक सुंदरता और इतिहास से जुड़ने की इच्छा रखते हैं, तो भर्तृहरि मंदिर अवश्य जाएँ। यहाँ का शांत वातावरण, अद्भुत वास्तुकला और पवित्रता आपके जीवन को एक नई दिशा दे सकती है।