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राजस्थान अपनी अनोखी विरासत, संस्कृति और धार्मिक आस्था के लिए विश्व प्रसिद्ध है। इसी राजस्थान के हृदय में स्थित है भीलवाड़ा ज़िले का छोटा-सा ऐतिहासिक नगर शाहपुरा (SHAHPURA), जो अपने ऐतिहासिक क़िले, भव्य रामद्वारा मंदिर और समृद्ध लोक कला के लिए जाना जाता है।

शाहपुरा की अवस्थिति और परिचय

भीलवाड़ा ज़िले से लगभग 55 किलोमीटर दूर स्थित शाहपुरा एक सुंदर और ऐतिहासिक नगर है। इसकी पहचान चार मुख्य द्वारों से घिरी प्राचीन दीवार के कारण भी है, जो इसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व प्रदान करती है। शाहपुरा का प्राचीन और मध्यकालीन वातावरण आपको इतिहास में वापस ले जाता है।


रामस्नेही संप्रदाय और रामद्वारा मंदिर

शाहपुरा, हिंदुओं के रामस्नेही संप्रदाय के एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थल के रूप में प्रसिद्ध है। इस संप्रदाय की स्थापना वर्ष 1804 में स्वामी रामचरण जी महाराज द्वारा की गई थी। शाहपुरा में स्थित रामद्वारा इस संप्रदाय का मुख्य तीर्थ और पूजा स्थल है।

रामद्वारा की विशेषताएं:

  • इस पवित्र स्थल के मुख्य पुजारी ही संप्रदाय के वर्तमान प्रमुख होते हैं।
  • देश भर से श्रद्धालु सालभर इस मंदिर के दर्शन करने आते हैं।
  • मंदिर परिसर में दिव्य और आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव होता है।

प्रसिद्ध ‘फूलडोल का मेला’

शाहपुरा में हर वर्ष फाल्गुन शुक्ल पक्ष (मार्च-अप्रैल) में पाँच दिवसीय “फूलडोल का मेला” बड़ी धूमधाम से आयोजित किया जाता है। यह मेला धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक उत्सव और स्थानीय लोक-परंपराओं का अद्भुत समागम है। इस मेले में शामिल होने दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं और शाहपुरा की गलियों में उत्सव का रंग भर देते हैं।


ऐतिहासिक महल और अद्भुत वास्तुकला

शाहपुरा के उत्तरी हिस्से में स्थित विशाल महल अपने भव्य गुंबदों, बालकनियों, छतरियों और मीनारों से सुसज्जित है। इस ऐतिहासिक महल के ऊपरी छज्जों से पूरे नगर और झील के दृश्य बेहद आकर्षक लगते हैं। इसकी भव्यता राजपूत वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

महल की प्रमुख विशेषताएं:

  • ऊँचे-ऊँचे गुंबद और छतरियाँ
  • जटिल राजस्थानी शिल्पकारी और नक्काशी
  • आसपास की झील और प्राकृतिक सुंदरता का मनोरम दृश्य

शाहपुरा की पारंपरिक ‘फड़ चित्रकला’

शाहपुरा, राजस्थानी लोक कला की प्रसिद्ध ‘फड़ चित्रकला’ का भी केंद्र है। ‘फड़’ राजस्थान की पारंपरिक चित्रकारी शैली है, जिसमें कपड़े के लंबे टुकड़ों पर लोक देवी-देवताओं और पौराणिक कथाओं के चित्र उकेरे जाते हैं। यह चित्रकला भारत के अलावा विदेशों में भी प्रसिद्ध है और शाहपुरा इसके मुख्य केंद्रों में से एक माना जाता है।

फड़ कला की विशेषताएं:

  • कपड़े पर प्राकृतिक रंगों से चित्रण
  • धार्मिक कथाओं का जीवंत चित्रण
  • विश्वभर में कला प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र

स्वतंत्रता सेनानियों की भूमि

शाहपुरा का इतिहास सिर्फ धार्मिक स्थलों तक ही सीमित नहीं है। यह नगर स्वतंत्रता संग्राम में भी अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। स्वतंत्रता सेनानी केसरी सिंह, जोरावर सिंह और प्रताप सिंह बारहठ इसी ऐतिहासिक नगर की देन थे। इन सेनानियों की याद में ‘त्रिमूर्ति स्मारक’ और ‘बारहठ जी की हवेली’ महत्वपूर्ण स्थल हैं, जहाँ इतिहास के पन्ने जीवंत हो उठते हैं।


पिवणिया तालाब

शाहपुरा नगर में स्थित पिवणिया तालाब एक प्राकृतिक और मनमोहक स्थल है। स्थानीय लोगों के लिए यह तालाब एक पिकनिक स्पॉट के रूप में भी प्रसिद्ध है। शांत वातावरण और प्रकृति का आनंद लेने के लिए यह स्थल आदर्श है।


शाहपुरा यात्रा के दौरान क्या करें?

  • रामद्वारा मंदिर की आध्यात्मिक यात्रा।
  • ऐतिहासिक महलों, हवेलियों और स्मारकों का भ्रमण।
  • फड़ चित्रकला का स्थानीय कलाकारों से परिचय एवं खरीदारी।
  • फूलडोल मेले में स्थानीय संस्कृति एवं परंपराओं का अनुभव।

शाहपुरा कैसे पहुँचे?

  • सड़क मार्ग: भीलवाड़ा से नियमित बसें और टैक्सी उपलब्ध हैं।
  • रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन भीलवाड़ा है, जो प्रमुख शहरों से जुड़ा है।
  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा जयपुर एयरपोर्ट है, जो शाहपुरा से लगभग 200 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

शाहपुरा भ्रमण का आदर्श समय

शाहपुरा घूमने का सर्वोत्तम समय अक्टूबर से मार्च तक है, क्योंकि इस समय मौसम सुखद रहता है और स्थानीय उत्सव एवं मेले भी इस समय आयोजित होते हैं।


निष्कर्ष

शाहपुरा (SHAHPURA) राजस्थान के भीलवाड़ा जिले का एक ऐसा स्थल है, जो धार्मिक आस्था, लोक-कला, ऐतिहासिक विरासत और स्वतंत्रता संग्राम के गौरवपूर्ण इतिहास का अद्भुत संगम है। इसकी सांस्कृतिक समृद्धि और भव्य ऐतिहासिक धरोहरें इसे पर्यटन और आध्यात्मिकता के लिए बेहद खास बनाती हैं। अगली बार जब आप राजस्थान की यात्रा पर निकलें, शाहपुरा को अपने यात्रा सूची में ज़रूर शामिल करें और एक अनोखे अनुभव का आनंद उठाएं।