भीलवाड़ा से लगभग 90 किलोमीटर दूर स्थित जहाजपुर, राजस्थान का एक छोटा लेकिन ऐतिहासिक महत्व रखने वाला कस्बा है। यह नगर वीरता, आध्यात्मिकता और वास्तुकला का अद्भुत संगम है। हालांकि जहाजपुर आम पर्यटक मानचित्र पर बहुत प्रसिद्ध नहीं है, लेकिन इतिहास प्रेमियों और खोजकर्ताओं के लिए यह स्थान किसी खजाने से कम नहीं है।
ऐतिहासिक जहाजपुर का किला
जहाजपुर कस्बे की पहचान है इसका विशाल किला, जो एक पहाड़ी के शिखर पर स्थित है। इस किले में दो मजबूत दीवारें हैं, जिनके चारों ओर गहरी खाईयाँ और अनेक बुर्ज हैं। हालांकि किले की स्थापना के बारे में स्पष्ट इतिहास नहीं है, लेकिन मान्यता है कि यह महान राजा राणा कुम्भा द्वारा मेवाड़ की सुरक्षा के लिए बनाए गए अनेक किलों में से एक है।
कुछ ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, इस किले की स्थापना संभवतः सम्राट अशोक के पौत्र के काल में हुई थी, जिससे पता चलता है कि जहाजपुर की महत्ता सदियों पुरानी है। इतिहास में इस किले की मरम्मत बप्पा रावल और राणा कुम्भा जैसे महान शासकों ने करवाई, जिससे इसका ऐतिहासिक महत्व बढ़ा।
जहाजपुर किले की रोचक कहानी
जहाजपुर के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना तब घटी, जब उदयपुर के संस्थापक राणा उदय सिंह के निधन के बाद उनके प्रिय रानी के पुत्र जगमल सिंह को उत्तराधिकारी नहीं बनाया गया। इससे नाराज होकर जगमल सिंह मुगल सम्राट अकबर के दरबार में चले गए, जहाँ उन्हें जहाजपुर का किला प्रदान किया गया। जगमल सिंह के वंशज लगभग 1730 तक यहाँ रहे। बाद में मराठाओं ने इस क्षेत्र पर नियंत्रण स्थापित किया, जिससे सिसोदिया सरदारों को कच्छ की तरफ पलायन करना पड़ा।
वास्तुकला और मंदिर
आज जहाजपुर का किला भले ही खंडहर हो चुका है, लेकिन इसका गौरवशाली अतीत अब भी यहाँ के खंडहरों से महसूस किया जा सकता है। किले में मुख्य महल, अनेक छोटे मंदिर, सरवेश्वर नाथजी मंदिर और नवल श्याम मंदिर स्थित हैं, जो अब भी स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र हैं।
जहाजपुर कस्बे में जैन धर्म का प्रसिद्ध मुनीसुव्रतनाथ मंदिर भी है। यह मंदिर 20वें तीर्थंकर भगवान मुनीसुव्रतनाथ की मूर्ति मिलने के बाद बनाया गया था, जो कि एक जहाज के आकार में बना है। यह मंदिर बनास नदी के किनारे स्थित है और जैन तीर्थयात्रियों के लिए महत्वपूर्ण स्थल है।
बारह देवर मंदिर समूह
जहाजपुर में भगवान शिव को समर्पित ‘बारह देवर’ नामक मंदिर समूह है, जो अपनी कलात्मक सुंदरता और धार्मिक महत्व के कारण विख्यात है।
ग़ायबी पीर मस्जिद
कस्बे और किले के बीच स्थित ग़ायबी पीर मस्जिद मुस्लिम संत ग़ायबी के नाम पर है, जो सम्राट अकबर के काल में यहाँ रहे थे। यह स्थान जहाजपुर की सांस्कृतिक और धार्मिक एकता को दर्शाता है।
संरक्षण की आवश्यकता
जहाजपुर का किला वर्तमान में संरक्षण के अभाव में है और इसे एएसआई या राज्य सरकार की ओर से कोई खास देखरेख नहीं मिल रही है। यदि जल्द ही इसके संरक्षण के लिए उचित कदम नहीं उठाए गए, तो यह ऐतिहासिक धरोहर विलुप्त हो सकती है।
जहाजपुर भ्रमण कब करें?
जहाजपुर भ्रमण के लिए सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च तक है, जब मौसम सुखद होता है।
कैसे पहुँचे?
- सड़क मार्ग: भीलवाड़ा से नियमित बसें उपलब्ध हैं।
- निकटतम रेलवे स्टेशन: भीलवाड़ा रेलवे स्टेशन
- निकटतम हवाई अड्डा: उदयपुर स्थित महाराणा प्रताप हवाई अड्डा (लगभग 180 किमी)
निष्कर्ष
जहाजपुर इतिहास प्रेमियों, आध्यात्मिक पर्यटकों और अन्वेषकों के लिए एक आदर्श गंतव्य है। यहाँ आने वाले पर्यटक इतिहास के स्वर्णिम युग का अहसास कर सकते हैं और राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर के एक अज्ञात अध्याय को समझ सकते हैं।