Select Page

राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्र में स्थित बीकानेर शहर की पहचान, जूनागढ़ किला, इतिहास प्रेमियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। अपने भव्य वास्तुकला और गौरवशाली इतिहास के लिए प्रसिद्ध यह किला कभी किसी शत्रु द्वारा विजय नहीं किया गया, यही इसकी विशेषता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

राजस्थान की स्वर्णिम रेत के मध्य, बीकानेर शहर का गर्व और भव्यता का प्रतीक है जूनागढ़ किला। इतिहास और वास्तुकला की अद्भुत मिसाल यह किला, राजस्थान के गौरवशाली अतीत की कहानी सुनाता है। इस भव्य किले की स्थापना 1588 ईस्वी में राजा राय सिंह ने की थी, जो मुगल सम्राट अकबर के प्रमुख सेनापतियों में से एक थे।

जूनागढ़ किला अपनी दृढ़ता के लिए प्रसिद्ध है, और इसे कभी भी शत्रुओं द्वारा विजित नहीं किया जा सका। यह किला अपनी मजबूत दीवारों, विशाल बुर्जों और सुरक्षा के लिए बनाई गई गहरी खाइयों के लिए जाना जाता है। वास्तव में, यह दुर्ग कभी ‘चिंतामणि’ के नाम से जाना जाता था। बाद में इसे जूनागढ़ नाम दिया गया, जिसका अर्थ होता है “पुराना किला”। राजा राय सिंह ने इस किले के निर्माण में पांच वर्ष लगाए, जो 17 फरवरी 1589 से प्रारम्भ होकर 17 जनवरी 1594 में पूरा हुआ।

जूनागढ़ किला राजस्थानी, मुगल और गुजराती वास्तुकला का मिश्रण है। लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर से बने इस किले में अनेक भव्य महल स्थित हैं। लगभग 1,078 गज लम्बा और 63,119 वर्ग गज क्षेत्रफल में फैले इस किले के द्वार, झरोखे, कंगूरे और महल अद्भुत सुंदरता का परिचायक हैं।

किले में प्रवेश करते ही, सबसे पहले आपका स्वागत भव्य “सूरज पोल” करता है, जो सूर्य की पहली किरणों के साथ स्वर्णिम आभा बिखेरता है। वहीं “दौलत पोल” उन महिलाओं की वीरता की कहानी कहता है जिन्होंने सती प्रथा को अपनाया था।

वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण

यह किला राजस्थान की शानदार वास्तुकला का एक जीवंत उदाहरण है। लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर से निर्मित जूनागढ़ किले में विभिन्न सुंदर महल, मंदिर, और भवन स्थित हैं। यहाँ कई आंगन, बालकनी, झरोखे, और कियोस्क मौजूद हैं, जो पर्यटकों को प्राचीन राजसी जीवन की झलक प्रदान करते हैं।

किले का मुख्य आकर्षण इसके शानदार दरवाज़े हैं, जिनमें सूरज पोल और करन पोल विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं। सूरज पोल का निर्माण सुनहरे बलुआ पत्थरों से किया गया है, जो सूर्योदय की पहली किरणों में और भी आकर्षक लगता है। किले के अंदर बने फूल महल, करन महल, गंगा महल, चन्द्र महल और अनुप महल वास्तुशिल्प की दृष्टि से बेहद सुंदर हैं।

प्रमुख महल और संग्रहालय

  • करण महल: सबसे प्रमुख है, जो औरंगज़ेब पर विजय की याद दिलाता है।
  • फूल महल: यह महल किले का सबसे प्राचीन महल माना जाता है, जिसमें सुंदर कलाकृतियाँ और नक्काशी हैं।
  • अनुप महल: अपनी भव्यता और कलात्मक सजावट के लिए प्रसिद्ध यह महल किले के मुख्य आकर्षणों में से एक है।
  • गंगा महल: 20वीं सदी में निर्मित इस महल में एक संग्रहालय स्थापित है, जिसमें किले के इतिहास से संबंधित वस्तुएँ प्रदर्शित हैं।
  • चन्द्र महल: यह बहुमंजिला महल अपने खूबसूरत आंतरिक साज-सज्जा के लिए विख्यात है।

सांस्कृतिक महत्व

जूनागढ़ किले में कई प्रसिद्ध मंदिर भी हैं, जो सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। इन मंदिरों में देवी-देवताओं की प्रतिमाएं और विस्तृत नक्काशी देखने लायक हैं।

आस-पास के दर्शनीय स्थल

जूनागढ़ किले के आस-पास भी कई महत्वपूर्ण स्थल हैं:

  • लक्ष्मीनाथ मंदिर: यह प्राचीन मंदिर बीकानेर के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक है।
  • करणी माता मंदिर: ‘चूहों का मंदिर’ नाम से प्रसिद्ध यह मंदिर अपने अनोखे धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है।
  • कालिका माता मंदिर: यह मंदिर अपनी सुंदर वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है।

घूमने का उचित समय

जूनागढ़ किला देखने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च तक है, जब मौसम सुहाना और ठंडा होता है।

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: बीकानेर राजस्थान के अन्य शहरों जैसे जयपुर, जोधपुर से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।
  • रेल मार्ग: बीकानेर रेलवे स्टेशन भारत के प्रमुख शहरों से जुड़ा है।
  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा जोधपुर हवाई अड्डा है, जो बीकानेर से लगभग 250 किलोमीटर दूर है।

निष्कर्ष

जूनागढ़ किला राजस्थान की गौरवपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर है, जो अपने भव्य वास्तुशिल्प, समृद्ध इतिहास और सांस्कृतिक महत्व के कारण पर्यटकों के लिए एक अनोखा अनुभव प्रदान करता है। बीकानेर की यात्रा करने वालों के लिए जूनागढ़ किले का दौरा एक अनिवार्य हिस्सा होना चाहिए।