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राजस्थान की वीर भूमि पर स्थित चित्तौड़गढ़ का किला केवल पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि यह राजपूती शौर्य, बलिदान और आत्मगौरव की ऐसी अमर गाथा है, जो हर भारतवासी के हृदय में गर्व की भावना भर देती है। यह किला भारतीय इतिहास में महाकाव्य की तरह प्रतिष्ठित है — इसकी दीवारों पर समय की चोटों के निशान हैं, लेकिन वे ही इसे अनमोल और प्रेरणास्पद बनाते हैं।

इतिहास की नींव में बहादुरी की कहानियाँ

चित्तौड़गढ़ का किला 7वीं शताब्दी में मौर्य वंश के राजा चित्रांगदा मौर्य द्वारा बसाया गया था। इस विशाल दुर्ग ने सैकड़ों वर्षों तक मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास को अपनी दीवारों में संजोया है। यह किला गहलोत, सिसोदिया और राणा जैसे राजपूत वंशों का प्रमुख ठिकाना रहा, जिन्होंने मुगलों और अन्य आक्रमणकारियों के खिलाफ साहसिक प्रतिरोध किया।

दृढ़ता और स्थापत्य का अद्भुत संगम

  • किला 700 एकड़ में फैला हुआ है और एक विशाल पहाड़ी पर स्थित है, जो आसपास की भूमि से लगभग 180 मीटर ऊँचा है।
  • यह किला भारत के सबसे बड़े किलों में गिना जाता है, और इसमें कुल 7 प्रवेश द्वार (पोले) हैं — जिनमें राम पोल, हनुमान पोल और लक्ष्मण पोल प्रमुख हैं।
  • किले के भीतर अनेकों प्रसिद्ध स्थल हैं, जैसे विजय स्तम्भ, कीर्ति स्तम्भ, रणकुंभा महल, पद्मिनी महल, मीराबाई मंदिर और गौमुख कुंड

तीन बार की जौहर की त्रासदी

चित्तौड़ का इतिहास उतना ही संघर्षपूर्ण और वीरतापूर्ण है जितना यह विशाल।

  1. 1303 ई. में अलाउद्दीन खिलजी का आक्रमण – महारानी पद्मिनी और अन्य स्त्रियों ने पहला जौहर किया।
  2. 1535 ई. में गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह का हमला – रानी कर्णावती ने दूसरा जौहर किया।
  3. 1568 ई. में अकबर का आक्रमण – तीसरा और सबसे बड़ा जौहर हुआ, जब हजारों स्त्रियों ने आत्मगौरव की रक्षा के लिए अग्नि समाधि ली।

इन घटनाओं ने चित्तौड़गढ़ को बलिदान और आत्मसम्मान का प्रतीक बना दिया।

चित्तौड़गढ़ किले का लाईट एंड साउंड शो

अब इस ऐतिहासिक किले के शौर्य और बलिदान की गाथा को दर्शाने के लिए आधुनिक तकनीक की मदद से एक भव्य लाईट एंड साउंड शो का आयोजन किया जा रहा है।

क्या है खास:

  • DMX नियंत्रित LED लाइट्स, गोबो लाइट्स और 5.1 सराउंड साउंड सिस्टम का उपयोग।
  • शो में किले की स्थापना, शासकों, युद्धों, और खिलजी के हमले का दृश्यात्मक और श्रव्य वर्णन किया गया है।
  • यह शो इतिहास को जीवंत रूप में दर्शाता है, जो दर्शकों को उस कालखंड में पहुंचा देता है जब तलवारें बोलती थीं और आत्मसम्मान के लिए जान दी जाती थी।

शो की जानकारी:

  • स्थान: चित्तौड़गढ़ किला परिसर
  • समय: प्रतिदिन शाम को दो बार
  • प्रवेश शुल्क: मामूली शुल्क; टिकट ऑनलाइन और काउंटर पर उपलब्ध
  • समयावधि: लगभग 45 मिनट

अन्य दर्शनीय स्थल किले में

🔸 विजय स्तम्भ (Victory Tower):

राणा कुंभा द्वारा 1448 में बनवाया गया यह स्तम्भ मेवाड़ की विजय और संस्कृति का प्रतीक है।

🔸 पद्मिनी महल:

रानी पद्मिनी का महल जो अब भी उस स्वाभिमानी कहानी की साक्षी है जिसे इतिहास कभी भुला नहीं पाया।

🔸 मीराबाई मंदिर:

यह मंदिर उस महान भक्तिन को समर्पित है जिन्होंने चित्तौड़ को भक्ति और संतत्व का रंग दिया।

कैसे पहुंचें:

  • निकटतम रेलवे स्टेशन: चित्तौड़गढ़ रेलवे स्टेशन (5 किमी)
  • निकटतम हवाई अड्डा: उदयपुर (95 किमी)
  • सड़क मार्ग: जयपुर, उदयपुर, कोटा और दिल्ली से आसान पहुंच

आसपास के आकर्षण:

  • सांभर झील, उदयपुर सिटी पैलेस, कुम्भलगढ़ दुर्ग, बाँसवाड़ा, और राजसमंद झील – जो आपकी यात्रा को और अधिक यादगार बनाएंगे।

निष्कर्ष

चित्तौड़गढ़ का किला राजस्थान की आत्मा है – यहाँ के पत्थर भी बोलते हैं। यह केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि एक संस्कार, एक गौरवगाथा और एक प्रेरणा है। अगर आप अपने भीतर भारत के शौर्य और आत्मगौरव को महसूस करना चाहते हैं, तो चित्तौड़गढ़ की यात्रा ज़रूर करें।