Select Page

राजस्थान के हृदय में स्थित जोधपुर की नीली गलियों के ऊपर 410 फीट ऊँची पहाड़ी पर स्थित है – मेहरानगढ़ किला। यह वही दुर्ग है जिसने सदियों तक राजपूती शौर्य, मुगल आक्रमण, और कला-संस्कृति के उत्थान का साक्षी बनकर खड़ा रहा।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि – राव जोधा का स्वप्न

1459 ईस्वी में राव जोधा द्वारा स्थापित यह किला, जोधपुर राज्य के संस्थापक के रूप में उनकी विरासत को अमर करता है। ऐसा कहा जाता है कि किले की नींव रखते समय एक तपस्वी की नाराज़गी के कारण शाप लग गया था, जिसे राजा राम मेघवाल की जीवित समाधि द्वारा शांत किया गया। फिर राव जोधा ने करणी माता (जिन्हें देवी दुर्गा का अवतार माना जाता है) से आशीर्वाद प्राप्त किया, जिससे किले को सदा सुरक्षित और समृद्ध माना गया।

अभेद्य रक्षा और शौर्य का प्रतीक

मेहरानगढ़ किला 7 विशाल दरवाजों से घिरा है, जिनमें से लोहा पोल के पास राजघराने की सती रानियों के हस्तचिन्ह आज भी विद्यमान हैं। दूध कंगरा पोल आज भी जयपुर के आक्रमण के समय तोपों के गोलों के निशान को समेटे हुए है। किले की दीवारें आज भी उन युद्धों की गूंज सुनाती हैं।

मुगल दौर और मर्यादा की परीक्षा

राव मालदेव की मृत्यु के बाद 1562 में अकबर ने जोधपुर में उत्पन्न उत्तराधिकार विवाद का लाभ उठाकर इस दुर्ग पर अधिकार कर लिया। लेकिन राजपूत-मुगल वैवाहिक संबंधों और राजनयिक समझौतों ने जल्द ही इसे जोधपुर राजवंश को लौटा दिया।

औरंगज़ेब के काल में फिर से यह संघर्ष का विषय बना, लेकिन 1707 में औरंगज़ेब की मृत्यु के बाद महाराजा अजीत सिंह ने दुर्ग को पुनः जीता और उसमें फतेह पोल (Victory Gate) जैसे निर्माण कराए।

महलों और संग्रहालयों की समृद्धि

किले के भीतर आप पाएंगे एक समृद्ध संग्रहालय जिसमें 15,000 से अधिक वस्तुएं – जैसे कि अकबर की तलवार, मुगल तंबू, प्राचीन वस्त्र, ताज, और राजसी चित्र – संग्रहित हैं।

  • मोती महल – राजा सूर सिंह का दरबार, जहां राजकीय बैठकें होती थीं।
  • फूल महल – महाराजा अभय सिंह की भव्य रंगशाला।
  • शीश महल – दर्पणों से सजी दीवारें और छतें, जो रोशनी में जगमगाने लगती हैं।
  • तख़त विलास – एक निजी निवास जो गहन सजावट और चित्रकला से अलंकृत है।

आस्था के केंद्र और लोक श्रद्धा

  • नगनेची जी का मंदिर – राजघराने की कुलदेवी, 14वीं सदी से उपासना का केंद्र।
  • चामुंडा माता मंदिर – किले के शीर्ष पर स्थित यह मंदिर दुर्गा माँ के रौद्र रूप को समर्पित है।

कला, संस्कृति और महोत्सव

मेहरानगढ़ किला केवल एक ऐतिहासिक स्मारक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक केंद्र भी है। यहां World Sacred Spirit Festival और Rajasthan International Folk Festival जैसे महोत्सवों का आयोजन होता है, जिसमें लोक संगीत, नृत्य और अंतरराष्ट्रीय कलाकारों की प्रस्तुति होती है।

यह किला हॉलीवुड और बॉलीवुड की नजरों से भी अछूता नहीं रहा। द डार्क नाइट राइज़ेज़, द लायन किंग, और ठग्स ऑफ हिंदोस्तान जैसी फिल्मों की शूटिंग यहीं हुई है।

जोधपुर के अन्य रत्न

  • जसवंत थड़ा – सफेद संगमरमर से बना स्मारक, जिसमें राजघराने की समाधियाँ स्थित हैं।
  • सदर बाज़ार – जोधपुर का जीवंत और पारंपरिक बाजार।
  • तूरजी का झलरा – एक पुरातन बावड़ी जो अपनी नक्काशी और जल संरचना के लिए प्रसिद्ध है।

जहां इतिहास बोलता है

मेहरानगढ़ किला केवल एक किला नहीं, बल्कि इतिहास की जीवित किताब है। यहां हर पत्थर, हर झरोखा, हर चित्र, और हर दीवार एक कथा कहती है – राजपूती शौर्य, कूटनीति, कला और संस्कृति की।

यदि आप राजस्थान की आत्मा को महसूस करना चाहते हैं, तो जोधपुर और मेहरानगढ़ किले की यात्रा ज़रूर करें। यह सिर्फ एक भ्रमण नहीं, बल्कि एक युग से संवाद है।