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राजस्थान की सबसे हरी-भरी पहाड़ी नगरी माउंट आबू सिर्फ प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि अपने ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों के लिए भी प्रसिद्ध है। इन्हीं स्थलों में एक अत्यंत महत्वपूर्ण नाम है – अचलगढ़ किला (Achalgarh Fort)

कहाँ स्थित है अचलगढ़ किला?

अचलगढ़ किला, माउंट आबू से लगभग 26 किलोमीटर उत्तर दिशा में स्थित है। यह किला अरावली पर्वतमाला की ऊँचाइयों पर बसा हुआ है और इसके चारों ओर घना वन क्षेत्र इसकी भव्यता को और भी रहस्यमय बनाता है। यहां से आसपास के क्षेत्र का विहंगम दृश्य भी देखने को मिलता है।

निर्माण और पुनर्निर्माण की कहानी

  • इस किले का प्रारंभिक निर्माण परमार वंश (Paramara dynasty) द्वारा करवाया गया था, जो कि मध्यकालीन भारत के प्रमुख राजवंशों में से एक था।
  • बाद में, मेवाड़ के महान राजा महाराणा कुम्भा ने सन् 1452 ईस्वी में इस किले का पुनर्निर्माण करवाया और इसका नाम ‘अचलगढ़’ रखा।
  • महाराणा कुम्भा को उनके समय में स्थापत्य कला के महान संरक्षक के रूप में जाना जाता है। उन्होंने ही चित्तौड़गढ़ और कुंभलगढ़ जैसे किलों का भी निर्माण करवाया था।

अचलेश्वर महादेव मंदिर – किले के ठीक बाहर

अचलगढ़ किले के बाहर स्थित अचलेश्वर महादेव मंदिर इस स्थल का एक और धार्मिक आकर्षण है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और स्थानीय लोककथाओं में इसे विशेष महत्व प्राप्त है।

  • मंदिर के गर्भगृह में एक प्राकृतिक शिवलिंग है जिसे स्वयंभू माना जाता है।
  • मंदिर परिसर में नंदी (बैल) की विशाल कांस्य प्रतिमा भी है जो अपनी उत्कृष्ट धातुकला के लिए जानी जाती है।
  • इस क्षेत्र में यह भी विश्वास है कि शिव जी के चरणों की छाप यहाँ की चट्टानों पर अंकित है, जिसे श्रद्धालु देखने विशेष रूप से आते हैं।

स्थापत्य कला और दुर्ग की विशेषताएं

  • अचलगढ़ किला पहाड़ी पर इस प्रकार से स्थित है कि दुश्मन की नज़रों से बचा रहे और साथ ही सैन्य दृष्टिकोण से सुरक्षित भी बना रहे।
  • किले के मुख्य द्वार को ‘हणुमान पोल’ कहा जाता है और अंदर की ओर जाने पर ‘चंपा पोल’ से होकर आगे बढ़ते हैं।
  • दुर्ग की मजबूत दीवारें, गुप्त सुरंगें, और उँचे बुर्ज इसकी युद्धकालीन महत्ता को दर्शाते हैं।
  • किले के अंदर कई प्राचीन खंडहर, मंदिर, और जलाशय हैं, जो इसके गौरवशाली अतीत की झलक देते हैं।

आसपास की प्राकृतिक छटा

अचलगढ़ किला जहाँ एक ओर इतिहास और धर्म का प्रतीक है, वहीं दूसरी ओर यह प्रकृति प्रेमियों के लिए भी एक स्वर्ग है। किले की ऊँचाई से आप माउंट आबू की वादियों, हरियाली और पहाड़ियों का विहंगम दृश्य देख सकते हैं। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यहां का वातावरण विशेष रूप से मनमोहक हो जाता है।

यात्रा सुझाव

  • यदि आप माउंट आबू घूमने का मन बना रहे हैं तो अचलगढ़ किला आपकी यात्रा सूची में अवश्य होना चाहिए।
  • यहाँ आने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के बीच का होता है जब मौसम सुहावना रहता है।
  • किले तक पहुँचने के लिए आप माउंट आबू से टैक्सी या दोपहिया वाहन ले सकते हैं। हालांकि, अंतिम कुछ दूरी पैदल चलने योग्य भी है।
  • धार्मिक स्थल होने के कारण कृपया सादे और सम्मानजनक वस्त्र पहनें।

निष्कर्ष

अचलगढ़ किला राजस्थान के उन दुर्लभ किलों में से एक है जहाँ धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यह किला न केवल मेवाड़ की स्थापत्य परंपरा का प्रतीक है, बल्कि माउंट आबू की शांत और आध्यात्मिक ऊर्जा को भी समेटे हुए है।

अगर आप राजस्थान की गहराइयों में छिपी कहानी, कृति और करुणा को जानना चाहते हैं, तो अचलगढ़ की ओर एक यात्रा अवश्य करें। यह किला न केवल आपको इतिहास से परिचित कराएगा, बल्कि मन को भी शांति का अनुभव कराएगा।