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राजस्थान की नीली नगरी जोधपुर में स्थित एक श्वेत सौंदर्य, एक भव्य स्मारक जो समय की रेत पर अमिट छाप छोड़ता है — जसवंत थड़ा। यह स्मारक केवल एक समाधि नहीं, बल्कि मारवाड़ के शौर्य, शासन और स्थापत्य कला की चमकती हुई पहचान है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: श्रद्धांजलि एक महान राजा को

जसवंत थड़ा का निर्माण 1899 ई. में जोधपुर के 33वें शासक महाराजा जसवंत सिंह द्वितीय की स्मृति में उनके पुत्र महाराजा सरदार सिंह द्वारा करवाया गया था। जसवंत सिंह द्वितीय (1873-1895) अपने कुशल शासन, डाकुओं पर नियंत्रण, रेलवे विस्तार और मरुस्थलीय क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के प्रयासों के लिए जाने जाते हैं।

यह समाधि स्थल मेहरानगढ़ किले की तलहटी में स्थित है और इसे राजस्थान का “मारवाड़ का ताजमहल” भी कहा जाता है।

संगमरमर की चमक: स्थापत्य का अद्भुत नमूना

यह स्मारक शुद्ध मकराना संगमरमर से निर्मित है, वही पत्थर जिससे आगरा का ताजमहल बना था। इस संगमरमर की खास बात यह है कि यह इतना पारदर्शी है कि सूरज की किरणें पड़ते ही यह आभामंडल सा प्रतीत होता है।

मुख्य गुंबद और चार कोनों पर स्थित छोटे गुम्बद, हिंदू और मुग़ल वास्तुकला का सुंदर संगम प्रस्तुत करते हैं। स्मारक में मौजूद जालीदार खिड़कियाँ (Jali Work) हवा और रोशनी के अद्भुत संयोजन से भीतर एक दिव्य वातावरण उत्पन्न करती हैं।

समाधि से संग्रहालय तक

मुख्य कक्ष में प्रवेश करते ही सामने महाराजा जसवंत सिंह द्वितीय की संगमरमर की छतरी दिखाई देती है। यहां राठौड़ वंश के अन्य शासकों की छतरियाँ, उनके चित्र, पेंटिंग्स और जानकारीपूर्ण प्रदर्शनी Mehrangarh Museum Trust (MMT) द्वारा दर्शाई जाती है।

संग्रहालय के माध्यम से दर्शक मरुधरा के इतिहास, संस्कृति और राजपूती परंपराओं को गहराई से जान सकते हैं।

जसवंत थड़ा – संगीत और संस्कृति का केन्द्र

इस स्थल की शांतिपूर्ण हरियाली, कमल-खिले जलाशय और आकर्षक मंडप इसे केवल एक समाधि नहीं, बल्कि सांस्कृतिक आयोजनों के लिए एक सजीव मंच बनाते हैं।
Rajasthan International Folk Festival (RIFF) और World Sacred Spirit Festival जैसे कार्यक्रमों की सुबह की संगीत प्रस्तुतियाँ यहाँ के वातावरण को सुरम्य बना देती हैं।

स्थापत्य में आत्मा की झलक

  • 12 भव्य स्तंभ, गुंबदों को संभालते हैं और छत से लटकता विशाल झूमर, शाही वैभव की अनुभूति कराता है।
  • अंदर और बाहर, हर दीवार और कोना दिव्य चित्रों, देवताओं की आकृतियों और नक्काशी से सजा हुआ है।
  • लाल बलुआ पत्थर की सीढ़ियाँ, सफेद संगमरमर के साथ एक सुंदर रंग-संयोजन बनाती हैं और यहां से जोधपुर का विहंगम दृश्य दिखाई देता है।

यात्रा सुझाव

  • जसवंत थड़ा, मेहरानगढ़ किले से कुछ ही दूरी पर है। आप एक ही दिन में दोनों स्थलों की यात्रा कर सकते हैं।
  • स्मारक हर दिन आम जनता के लिए खुला रहता है।
  • संग्रहालय के लिए अलग से प्रवेश शुल्क होता है।
  • यदि आप शांत वातावरण और इतिहास से प्रेम करते हैं, तो सुबह का समय यात्रा के लिए सर्वोत्तम है।

जोधपुर के अन्य रत्नों की ओर…

  • पास ही स्थित मेहरानगढ़ किला, राजपूतों की वीरगाथा का साक्षात गवाह है।
  • तोरजी का झलरा और सरदार बाजार में घूमते हुए आप जोधपुर की जीवनशैली को नजदीक से महसूस कर सकते हैं।
  • Jaswant Thada के पास स्थित Arna Jharna Desert Museum भी ग्रामीण राजस्थान की कला और संस्कृति को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है।

निष्कर्ष

जसवंत थड़ा, एक ऐसी यात्रा है जहाँ इतिहास, वास्तुकला और शांति एक साथ मिलते हैं। यहां हर पत्थर, हर नक्काशी, और हर झलक एक पुरानी शाही दुनिया की कहानी कहती है।

तो आइए, एक दिन निकालिए और डुबकी लगाइए राजस्थान के शौर्य और सुंदरता की गहराइयों में — जसवंत थड़ा की गोद में।