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राजस्थान के करौली जिले में, गंभीरी नदी के तट पर स्थित है एक पवित्र जैन तीर्थ — श्री महावीरजी मंदिर, जो कि 24वें जैन तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी को समर्पित है। यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, बल्कि इसकी चमत्कारी मान्यताओं, शानदार स्थापत्य कला, और प्राचीन परंपराओं के लिए भी जाना जाता है।

स्थापना का इतिहास

श्री महावीरजी मंदिर की स्थापना की सटीक तिथि तो इतिहास में स्पष्ट नहीं है, लेकिन जनश्रुति के अनुसार, यह मंदिर एक चमत्कारी मूर्ति की प्राप्ति के बाद अस्तित्व में आया। ऐसा कहा जाता है कि गंभीरी नदी के किनारे एक गांव में, एक गौचर भूमि पर जब हल चलाया जा रहा था, तो वहाँ से भगवान महावीर की एक सुंदर मूर्ति प्रकट हुई।

यह मूर्ति अत्यंत दिव्य थी और उसके साथ अनेक चमत्कार घटित होने लगे। इसी को देखते हुए उस स्थान पर एक मंदिर का निर्माण कराया गया और यह स्थान जैन श्रद्धालुओं के लिए एक महत्त्वपूर्ण तीर्थ बन गया।

मंदिर की विशेषताएं

  • मंदिर का मुख्य गर्भगृह भगवान महावीर स्वामी की सफेद संगमरमर की मूर्ति से अलंकृत है, जो कमल के आसन पर पद्मासन में विराजमान हैं।
  • मूर्ति का चेहरा अत्यंत शांत, करुणामय और ध्यानमग्न है — जिसे देखकर मन स्वतः ही स्थिर हो जाता है।
  • मंदिर परिसर में कई शिखर शैली के स्तूप, कलात्मक तोरण, और राजस्थानी स्थापत्य के जीवंत उदाहरण देखने को मिलते हैं।

तीर्थयात्रा और मेले

श्री महावीरजी का वार्षिक मेला चैत्र शुक्ल त्रयोदशी से लेकर वैशाख कृष्ण द्वितीया तक आयोजित होता है।

  • यह मेला जैन धर्मावलंबियों के लिए अत्यंत पावन होता है।
  • देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और रथयात्रा, भजन, पूजन और सांस्कृतिक आयोजनों में भाग लेते हैं।
  • मेले में महावीर स्वामी की भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है, जिसमें उनकी रथ पर सवारी कराकर नगर भ्रमण कराया जाता है।

चमत्कारों की भूमि

श्री महावीरजी मंदिर को “चमत्कारी तीर्थ” भी कहा जाता है। मान्यता है कि यहां पर आने वाले श्रद्धालुओं की सच्ची मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं
कई भक्त बताते हैं कि भगवान महावीर की कृपा से उन्हें असाध्य रोगों से मुक्ति मिली, पारिवारिक संकट टले और आर्थिक समस्याएं समाप्त हुईं।

कैसे पहुंचे श्री महावीरजी

  • स्थान: हिण्डौन सिटी से लगभग 17 किमी दूर स्थित है श्री महावीरजी।
  • रेल मार्ग: नजदीकी रेलवे स्टेशन श्री महावीरजी स्टेशन है, जो कई प्रमुख शहरों जैसे जयपुर, दिल्ली, आगरा, कोटा से जुड़ा हुआ है।
  • सड़क मार्ग: यह जगह NH-11B पर स्थित है, जिससे यहां तक पहुंचना सरल है। बस और टैक्सी सेवाएं आसानी से उपलब्ध हैं।
  • निकटतम हवाई अड्डा: जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, लगभग 150 किमी की दूरी पर स्थित है।

दर्शनीय स्थल और सुविधाएं

  • मंदिर के आस-पास धर्मशालाएं, भोजनशालाएं, और आवासीय सुविधाएं उपलब्ध हैं जो यात्रियों की सुविधा का पूरा ध्यान रखती हैं।
  • परिसर में अन्य जैन मंदिर, पार्श्वनाथ मंदिर, और संग्रहालय भी हैं जहां श्रद्धालु समय व्यतीत कर सकते हैं।

निष्कर्ष

श्री महावीरजी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एक श्रद्धा, आस्था और अध्यात्म का केंद्र है। यहां आने वाले भक्तों को न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि एक अलौकिक अनुभूति भी होती है जो जीवन भर के लिए स्मृतियों में बस जाती है।

यदि आप कभी राजस्थान की यात्रा पर जाएं, तो श्री महावीरजी मंदिर में एक दिन ज़रूर बिताएं — शायद वहां आपको भी अपने जीवन की दिशा का नया प्रकाश मिल जाए।