राजस्थान की वीरभूमि में स्थित खण्डार किला (Khandar Fort), सवाई माधोपुर से लगभग 45 किलोमीटर दूर, अरावली की ऊँचाइयों पर खड़ा एक ऐसा दुर्ग है, जो इतिहास, वीरता और वास्तुशिल्प का अनूठा संगम है।
यह किला न सिर्फ सिसोदिया वंश के गौरव का प्रतीक रहा है, बल्कि इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह मानी जाती है कि इस किले के शासक कभी किसी युद्ध में पराजित नहीं हुए।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और निर्माण
खण्डार किले का निर्माण कब हुआ इसकी सटीक तिथि उपलब्ध नहीं है, लेकिन प्राचीन ग्रंथों और लोककथाओं के अनुसार, यह किला कई शताब्दियों पुराना है।
- प्रारंभ में यह क्षेत्र सिसोदिया राजवंश के अधीन रहा, जो मेवाड़ की महान वीरता और स्वतंत्रता के लिए प्रसिद्ध था।
- इसके बाद यह किला मुगलों के अधीन आ गया, जिन्होंने इस किले की रणनीतिक स्थिति को देखते हुए इसे अपने नियंत्रण में लिया।
खण्डार किले की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि यह युद्धों में अजेय बना रहा। किवंदती के अनुसार, इसके राजा को कभी किसी युद्ध में हार का सामना नहीं करना पड़ा — यही बात इसे अन्य किलों से अलग बनाती है।
स्थापत्य कला और किले की बनावट
खण्डार किला एक ऊँचे पर्वत शिखर पर स्थित है, जिससे इसकी स्थिति स्वाभाविक रूप से मजबूत है।
यहाँ से चारों ओर के दुर्गम इलाकों का स्पष्ट दृश्य मिलता है, जो दुश्मन की हलचल पर निगरानी रखने के लिए उपयुक्त है।
- किले के मुख्य द्वार भारी और मजबूत पत्थरों से बने हैं, जो आक्रमणों को रोकने के लिए बनाए गए थे।
- अंदर के भागों में महल, जलाशय (तालाब), गुप्त सुरंगें, और पुराने मंदिरों के अवशेष देखे जा सकते हैं।
- कई स्थानों पर पत्थरों पर उकेरे गए शिलालेख, देवी-देवताओं की मूर्तियां और वास्तुशिल्पीय सजावट आज भी इतिहास की कहानियाँ सुनाते हैं।
रणनीतिक महत्त्व
खण्डार किला एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित है। सवाई माधोपुर और रणथंभौर जैसे प्रमुख दुर्गों से इसकी निकटता, इसे सैन्य दृष्टि से उपयोगी बनाती थी।
- इसकी स्थिति इतनी सुदृढ़ थी कि इसे “दुश्मनों की पहुंच से बाहर किला” भी कहा जाता था।
- इतिहासकार मानते हैं कि इस किले की अजेयता का मुख्य कारण इसका दुर्गम भूगोल, मजबूत दीवारें और उत्कृष्ट योजना थी।
दर्शनीय स्थल और आसपास के आकर्षण
यदि आप खण्डार किले की यात्रा करते हैं, तो यह सिर्फ इतिहास से मिलने का अवसर नहीं, बल्कि प्रकृति की गोद में सुकून पाने का अनुभव भी है।
- किले के अंदर और बाहर प्राचीन मंदिर, खासकर शिव मंदिर और हनुमान मंदिर देखे जा सकते हैं।
- किले के पास स्थित घने जंगल और घाटियां, एक अद्भुत ट्रेकिंग अनुभव देते हैं।
- निकट ही स्थित रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान को भी देखा जा सकता है, जो वन्यजीवन प्रेमियों के लिए एक और बड़ा आकर्षण है।
कैसे पहुंचें खण्डार किला?
- निकटतम शहर: सवाई माधोपुर (45 किमी दूर)
- रेलवे स्टेशन: सवाई माधोपुर रेलवे स्टेशन, जो राजस्थान के प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा है।
- सड़क मार्ग: जयपुर, कोटा और दिल्ली से नियमित बस सेवाएं उपलब्ध हैं।
- निकटतम हवाई अड्डा: जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (लगभग 160 किमी दूर)
यात्रा सुझाव
- यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे उत्तम है, जब मौसम सुहावना होता है।
- किले की चढ़ाई थोड़ी कठिन हो सकती है, इसलिए आरामदायक जूते, पानी की बोतल, और हल्का भोजन साथ लेकर चलें।
- गाइड के साथ जाएं तो आपको किले से जुड़ी लोककथाओं और इतिहास को बेहतर ढंग से जानने का अवसर मिलेगा।
निष्कर्ष
खण्डार किला राजस्थान के उन गिने-चुने किलों में से एक है जो वीरता, भव्यता और रहस्यमय इतिहास से भरपूर हैं।
यह किला न केवल सिसोदिया वंश की वीरगाथाओं का साक्षी है, बल्कि राजस्थानी स्थापत्य और रणनीतिक सोच का भी एक जीवंत उदाहरण है।
यदि आप इतिहास में रुचि रखते हैं और राजस्थान की मिट्टी से जुड़ी असली गाथाओं को महसूस करना चाहते हैं, तो खण्डार किला आपकी यात्रा सूची में अवश्य होना चाहिए।