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राजस्थान के सवाई माधोपुर ज़िले से लगभग 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान (Ranthambore National Park), भारत के सबसे प्रसिद्ध और रोमांचक वन्यजीव स्थलों में से एक है। यह स्थल न केवल बाघों (Tigers) की अद्भुत उपस्थिति के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि रणथंभौर दुर्ग, झरनों, पर्वत श्रंखलाओं और घने जंगलों के कारण एक समृद्ध प्राकृतिक और ऐतिहासिक विरासत भी समेटे हुए है।

रणथंभौर का भूगोल और विस्तार

  • रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना मूल रूप से 1955 में सवाई माधोपुर गेम सैंक्चुरी के रूप में हुई थी।
  • 1973 में इसे प्रोजेक्ट टाइगर के अंतर्गत शामिल किया गया और अंततः 1980 में इसे राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया।
  • यह उद्यान अरावली और विंध्याचल पर्वत श्रृंखलाओं के बीच स्थित है और इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 392 वर्ग किलोमीटर है।
  • यहां का भू-दृश्य ऊँचे-नीचे पठारों, घाटियों, झीलों और जलप्रपातों से सुसज्जित है।

वन्यजीवों की स्वर्णभूमि

रणथंभौर को भारत के उन चुनिंदा राष्ट्रीय उद्यानों में गिना जाता है जहां बाघों को उनके प्राकृतिक आवास में खुले में देखने की संभावना सर्वाधिक है।

यहां पाए जाने वाले प्रमुख वन्यजीव:

  • बंगाल टाइगर (Panthera tigris tigris)
  • सांभर (Sambar deer)
  • चीतल (Spotted Deer)
  • नीलगाय (Blue Bull)
  • चिंकारा (Indian Gazelle)
  • स्लॉथ बीयर (भालू)
  • लंगूर, सियार, भेड़िए और मगरमच्छ

इसके अलावा, रणथंभौर में 300 से अधिक प्रजातियों के पक्षी भी पाए जाते हैं जिनमें सरस क्रेन, फ्लेमिंगो, पीततोरा गिद्ध, उल्लू, और विविध जल पक्षी शामिल हैं।

रणथंभौर दुर्ग – वन के बीच इतिहास

रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान के भीतर स्थित रणथंभौर किला, इस उद्यान की आत्मा है।

  • यह दुर्ग 10वीं शताब्दी में चौहान वंश द्वारा निर्मित किया गया था।
  • 1303 ई. में जब अलाउद्दीन खिलजी ने इस दुर्ग पर आक्रमण किया, तब यहाँ की रानियों ने जौहर (self-immolation) कर वीरता का उदाहरण प्रस्तुत किया।
  • यह दुर्ग आज यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल है और यहां से पूरे जंगल का विहंगम दृश्य देखा जा सकता है।

सफारी अनुभव

रणथंभौर में पर्यटकों के लिए दो बार सफारी का आयोजन होता है — सुबह और शाम।

  • सफारी के लिए जीप और कैंटर (छोटे और बड़े वाहन) की व्यवस्था होती है।
  • पार्क को 10 जोनों में बांटा गया है, और हर जोन की अपनी भिन्न विशेषताएं हैं।
  • टाइगर साइटिंग के लिए जोन 2, 3 और 4 को सबसे प्रमुख माना जाता है।

सफारी समय (मौसमी परिवर्तन अनुसार):

  • सुबह: 6:30 AM से 10:00 AM
  • शाम: 2:30 PM से 6:00 PM

रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान हर साल 1 जुलाई से 30 सितंबर तक मॉनसून में बंद रहता है।

रणथंभौर में प्रमुख पर्यटन स्थल

  • पद्म झील, सूरज झील, मलिक झील – जहां आप जलपक्षियों को देख सकते हैं।
  • गणेश मंदिर – रणथंभौर किले के भीतर स्थित यह प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है।
  • जोगी महल – कभी शाही विश्रामगृह रहा यह भवन अब एक पर्यटक आकर्षण है।
  • राजबाग खंडहर – एक प्राचीन महल के अवशेष जो अब वन्यजीवों का आश्रय बन चुके हैं।

कैसे पहुंचे रणथंभौर?

  • निकटतम रेलवे स्टेशन: सवाई माधोपुर (14 किमी) – दिल्ली, जयपुर और मुंबई जैसे प्रमुख शहरों से सीधा जुड़ा हुआ।
  • सड़क मार्ग: जयपुर (180 किमी), कोटा (110 किमी) और दिल्ली (380 किमी) से आसानी से बस/टैक्सी द्वारा पहुंचा जा सकता है।
  • हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा जयपुर एयरपोर्ट, जो लगभग 180 किमी दूर स्थित है।

यात्रा सुझाव

  • सफारी के लिए ऑनलाइन बुकिंग पहले से कर लें क्योंकि टिकट सीमित होते हैं।
  • कैमरा, बायनोक्युलर और हरे-भूरे कपड़े साथ रखें।
  • शांत व्यवहार रखें और वन्यजीवों को परेशान न करें।
  • गर्मियों में पानी की बोतल, सनस्क्रीन और टोपी ज़रूर रखें।

निष्कर्ष

रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान, प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक विरासत का एक दुर्लभ संगम है। यहां की सफेद दाढ़ी वाले बाघ, प्राचीन दुर्ग, शांत झीलें और पक्षियों की चहचहाहट, हर प्रकृति प्रेमी और रोमांच खोजी यात्री को एक अद्वितीय अनुभव प्रदान करते हैं।

अगर आप कभी राजस्थान आएं और वन्यजीवों के रोमांच के साथ-साथ इतिहास और प्रकृति के सान्निध्य का आनंद लेना चाहते हैं, तो रणथंभौर आपकी सूची में जरूर होना चाहिए।