राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में स्थित सीता माता वन्यजीव अभ्यारण्य प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव पर्यटकों के लिए एक ऐसा स्थल है जहाँ प्राकृतिक वनस्पति, जलधाराएं और दुर्लभ वन्यजीवों का अद्भुत समागम देखने को मिलता है। यह अभयारण्य अरावली और विंध्याचल पर्वतमालाओं के मिलन बिंदु पर स्थित है और इसे राज्य का एकमात्र प्राकृतिक टीक (सागौन) वन क्षेत्र माना जाता है।
भौगोलिक विस्तार और स्थापना
सीता माता अभयारण्य की स्थापना वर्ष 1979 में की गई थी, और यह लगभग 422 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। यहाँ की भौगोलिक स्थिति, पर्वतीय क्षेत्र, गहरी घाटियाँ और नदियों का जाल इसे एक अत्यंत समृद्ध जैव विविधता वाला क्षेत्र बनाते हैं।
वनस्पति की विविधता
इस अभ्यारण्य की सबसे खास बात यह है कि यह राजस्थान का एकमात्र वन क्षेत्र है जहाँ इमारती उपयोग के योग्य सागौन (Teak) के वृक्ष प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यहाँ की कुल वनस्पति में लगभग 50% हिस्सेदारी सागौन की है, जबकि अन्य प्रमुख वृक्षों में शामिल हैं:
- सालर
- टेंण्दू
- आंवला
- बाँस
- बेल इत्यादि
इस घने वन क्षेत्र में अनेक औषधीय एवं फलदार वृक्ष भी पाए जाते हैं जो वन्यजीवों के लिए आहार का प्रमुख स्रोत हैं।
जल स्रोत और नदियाँ
सीता माता अभयारण्य में तीन नदियाँ बहती हैं, जिनमें दो प्रमुख हैं:
- जाखम नदी
- कर्मोज नदी
ये नदियाँ न केवल वन क्षेत्र को हरा-भरा बनाए रखती हैं, बल्कि यहाँ के जलचर और स्थलीय जीव-जंतुओं के जीवन का आधार भी हैं।
प्रमुख वन्यजीव
इस अभ्यारण्य में वन्यजीवों की एक समृद्ध श्रृंखला देखने को मिलती है। इनमें कुछ विशेष और दुर्लभ प्रजातियाँ भी शामिल हैं:
- तेंदुआ (Leopard)
- हाइना (Hyena)
- गीदड़ (Jackal)
- लोमड़ी (Fox)
- जंगल कैट (Jungle Cat)
- साही (Porcupine)
- चितल (Spotted Deer)
- जंगली भालू (Wild Bear)
- नीलगाय (Nilgai)
- चौसिंगा (Four-horned Antelope)
उड़न गिलहरी: अभ्यारण्य की विशेष पहचान
सीता माता अभ्यारण्य की सबसे खास और आकर्षक जीव है — उड़न गिलहरी (Flying Squirrel)। यह एक निशाचर प्राणी है जिसे रात के समय पेड़ों के बीच फुदकते और उड़ते देखा जा सकता है। इसकी उपस्थिति इस क्षेत्र की जैव विविधता को और भी विशिष्ट बनाती है।
धार्मिक और पौराणिक महत्व
इस अभयारण्य का नाम सीता माता के नाम पर रखा गया है। ऐसी मान्यता है कि माता सीता ने अपने वनवास का कुछ समय इसी क्षेत्र में बिताया था, और यह स्थान धार्मिक श्रद्धालुओं के लिए भी अत्यंत पूजनीय है। हर साल सीता नवमी के अवसर पर यहाँ मेला भी आयोजित होता है।
यहाँ कैसे पहुँचें
- निकटतम रेलवे स्टेशन: प्रतापगढ़ (लगभग 20 किमी)
- सड़क मार्ग: उदयपुर और चित्तौड़गढ़ से सीधा सड़क मार्ग उपलब्ध है।
- निकटतम हवाई अड्डा: महाराणा प्रताप एयरपोर्ट, उदयपुर (लगभग 160 किमी)
निष्कर्ष
सीता माता वन्यजीव अभ्यारण्य न केवल एक प्राकृतिक अजूबा है, बल्कि यह वनस्पति, जीव-जंतुओं और सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम है। यहाँ की प्राकृतिक शांति, पक्षियों की चहचहाहट, बहती नदियों की कल-कल और उड़न गिलहरी की झलक — सब मिलकर इसे एक अविस्मरणीय यात्रा स्थल बना देते हैं।
यदि आप प्राकृतिक सौंदर्य, जैव विविधता और धार्मिक इतिहास से भरे एक अनोखे स्थान की तलाश में हैं, तो सीता माता अभ्यारण्य ज़रूर आपके अगले यात्रा गंतव्य में शामिल होना चाहिए।