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राजस्थान की गुलाबी नगरी जयपुर में स्थित जंतर-मंतर (Jantar Mantar) भारत के उन चमत्कारों में से एक है, जो विज्ञान, वास्तुकला और परंपरा—तीनों का अद्भुत मेल प्रस्तुत करता है। यह केवल पत्थरों से बना स्मारक नहीं, बल्कि वह स्थान है जहाँ मानव बुद्धि ने आकाश को समझने और समय को मापने के लिए असाधारण तरीके विकसित किए।दुनिया की सबसे बड़ी पत्थर की सूर्य-घड़ी का घर, प्राचीन खगोलीय उपकरणों का संग्रह, और यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल — जंतर-मंतर हर यात्री के लिए एक अनूठा अनुभव है।

जंतर-मंतर क्या है?

जंतर-मंतर एक खगोलीय वेधशाला (Observatory) है, जिसे महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने 18वीं सदी में बनवाया था। यहाँ बनाए गए 19 विशाल यंत्र लोगों को बिना किसी दूरबीन या आधुनिक उपकरण के—

  • सूरज की चाल
  • ग्रहों की स्थिति
  • समय
  • दिशाएँ
  • दिन-रात के परिवर्तन

जैसी चीजें समझने में मदद करते हैं। ये सभी यंत्र पत्थर, संगमरमर, ईंट, चूने और पीतल से बनाए गए हैं। इनकी आकृतियाँ इतनी सटीक और वैज्ञानिक हैं कि आज भी पर्यटक इन्हें देखकर हैरान हो जाते हैं।

जंतर-मंतर का इतिहास – सवाई जय सिंह द्वितीय की वैज्ञानिक दृष्टि

महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय न केवल एक शासक थे, बल्कि एक महान विद्वान, खगोलविद और वैज्ञानिक सोच वाले व्यक्ति भी थे। उन्हें यह चिंता रहती थी कि उस समय भारतीय पंचांगों और खगोलीय गणनाओं में अक्सर अंतर आ जाता था।

इसी कारण उन्होंने दुनिया की कई वेधशालाओं का अध्ययन किया और पाँच स्थानों पर वेधशाला बनवाई:

  • जयपुर
  • दिल्ली
  • मथुरा
  • उज्जैन
  • वाराणसी

इनमें से जयपुर का जंतर-मंतर सबसे बड़ा और सबसे विकसित है।

महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य:

  • निर्माण: 1728 – 1734
  • राजपूत वास्तुशैली और इस्लामी ज्यामिति का अद्भुत मिश्रण
  • ब्रिटिश काल में कई बार पुनःनिर्माण
  • 1948 में राष्ट्रीय स्मारक घोषित
  • 2006 में व्यापक सुधार
  • 2010 में यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर सूची में शामिल

जंतर-मंतर की वास्तुकला – विज्ञान और कला का अनोखा मिलन

करीब 18,700 वर्ग मीटर में फैले जंतर-मंतर में कुल 19 खगोलीय यंत्र बने हैं।
इन यंत्रों की विशेषता है:

  • बड़े-बड़े आकार
  • सटीक गणना
  • बिना आधुनिक तकनीक के भी सही परिणाम
  • सुंदर, संतुलित और गहरे वैज्ञानिक आधार वाली संरचना

हर यंत्र का आकार उसकी गणना पद्धति पर आधारित है। कहीं कोण इतने सटीक हैं कि धूप की मात्र दो सेकंड की चाल भी समय को बदल देती है।

जंतर-मंतर के प्रमुख यंत्र और उनका वैज्ञानिक महत्व

यहाँ 19 यंत्र हैं, लेकिन उनके बीच कुछ बहुत प्रसिद्ध और खास हैं—

1. वृहद् सम्राट यंत्र – दुनिया की सबसे बड़ी सूर्य-घड़ी

यह जंतर-मंतर का हृदय है। लगभग 27 मीटर ऊँचा यह यंत्र दुनिया का सबसे बड़ा सनडायल माना जाता है।

  • धूप की छाया से 2 सेकंड तक की सटीकता से समय बताता है
  • इसकी ऊँचाई और कोण सूर्य की चाल के अनुसार तय किए गए हैं
  • स्थानीय समय, दिन की लंबाई और ऋतुओं के परिवर्तन को समझने में बेहद उपयोगी

पर्यटक अक्सर इसकी विशालता देखकर दंग रह जाते हैं।

2. लघु सम्राट यंत्र

यह सम्राट यंत्र ही का छोटा और सरल रूप है।

  • छाया से स्थानीय समय पता चलता है
  • लगभग 20 सेकंड की सटीकता
  • उत्तर दिशा की ओर झुकी इसकी ढलान वैज्ञानिक रूप से तय की गई है|

3. राम यंत्र

यह यंत्र बहुत अनोखा है:

  • दो बड़े गोलाकार खुले ढाँचे
  • बीच में एक खंभा
  • इससे सूर्य और ग्रहों की ऊँचाई (Altitude) और दिशा (Azimuth) पता चलती थी|
  • भारत में केवल जयपुर और दिल्ली में ही उपलब्ध|

4. जयप्रकाश यंत्र

यह आधे कटोरे जैसे दो यंत्रों से मिलकर बना है।

  • अंदर संगमरमर की पट्टियाँ
  • इन पर आसमान की छाया उलटे रूप में पड़ती है
  • इससे ग्रहों और तारों की सही स्थिति का पता चलता था

यह यंत्र जंतर-मंतर की वैज्ञानिक समझ को चरम पर दिखाता है।

5. चक्र यंत्र

एक गोलाकार रिंग के रूप में बना यह यंत्र:

  • सूर्य का स्थान
  • उसकी घड़ी-कोण स्थिति का सटीक निर्धारण करता है।

6. दिगांश यंत्र

यह सूर्योदय और सूर्यास्त के समय का अनुमान लगाने के लिए उपयोग किया जाता था। बीच में स्तंभ और बाहर दो वृत्त — साधारण लेकिन अत्यंत प्रभावी डिज़ाइन।

7. नाड़ीवलय यंत्र

यह पृथ्वी के दोनों गोलार्धों (उत्तर और दक्षिण) का प्रतीक है।

  • दो गोलाकार प्लेटें
  • दोनों पर सूर्य की छाया अलग-अलग दिशा में पड़ती है

यह यंत्र धरती की झुकाव समझाने में उपयोगी था।

8. कांति-वृत्त यंत्र

यह सूर्य किस राशि में है, यह मापने के लिए विशेष रूप से बनाया गया था। इससे मौसम और कृषि से जुड़े निर्णय लिए जाते थे।

जंतर-मंतर के टिकट और समय की जानकारी

पर्यटकों के लिए यह स्थान बहुत सुविधाजनक है।

जानकारीविवरण
खुलने का समयसुबह 9:00 से शाम 7:00 बजे तक
आखिरी टिकट6:30 बजे
भारतीय टिकट₹50
विदेशी टिकट₹200
गाइडउपलब्ध
ऑडियो गाइडउपलब्ध

जंतर-मंतर कैसे पहुँचे?

जयपुर में यह स्थान सिटी पैलेस और हवा महल के पास स्थित है।
यहाँ तक पहुँचने के आसान विकल्प:

  • स्थानीय बस
  • टैक्सी
  • ऑटो
  • ई-रिक्शा

निकटतम प्रमुख स्थान: तिलक मार्ग / सिटी पैलेस क्षेत्र

जंतर-मंतर क्यों जाएँ?

यदि आपको—

  • इतिहास
  • विज्ञान
  • वास्तुकला
  • ज्योतिष
  • फोटोग्राफी

में रुचि है, तो यह स्थान आपके लिए बिल्कुल परफेक्ट है।यहाँ आप जान सकेंगे कि 300 साल पहले भारतीय वैज्ञानिक किस स्तर की खगोलीय गणनाएँ करते थे— वो भी बिना किसी मशीन या आधुनिक उपकरण के।

निष्कर्ष

जंतर-मंतर जयपुर सिर्फ एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि भारत की वैज्ञानिक प्रतिभा, राजपूत बुद्धिमता और वास्तुकला के स्वर्णिम इतिहास का प्रतीक है। यहाँ की हर संरचना मानो यह कहती है कि— “मानव ने सीमित साधनों में भी असीमित ज्ञान रचा है।”

यदि आप जयपुर आते हैं, तो जंतर-मंतर को मिस मत कीजिए। यह आपको समय, सूरज, आकाश और विज्ञान—सबके एक नए रूप से परिचित कराएगा।

FAQs

  1. जंतर-मंतर जयपुर किसने बनवाया था?
    👉 सवाई जय सिंह द्वितीय ने 1728–1734 में बनवाया था।
  2. जंतर-मंतर में कितने खगोलीय यंत्र हैं?
    👉 कुल 19 यंत्र हैं, जिनमें वृहद सम्राट यंत्र सबसे प्रसिद्ध है।
  3. जंतर-मंतर क्यों प्रसिद्ध है?
    👉 यहाँ दुनिया की सबसे बड़ी पत्थर की सूर्य-घड़ी स्थित है।
  4. जंतर-मंतर जयपुर का टिकट कितना है?
    👉 भारतीयों के लिए ₹50 और विदेशियों के लिए ₹200।
  5. जंतर-मंतर कहाँ स्थित है?
    👉 जयपुर के सिटी पैलेस और हवा महल के पास।
  6. जंतर-मंतर का समय क्या है?
    👉 सुबह 9:00 बजे से शाम 7:00 बजे तक (अंतिम टिकट 6:30 तक)।