हवा महल का निर्माण वर्ष 1799 में हुआ था और इसे महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने बनवाया था। इसका वास्तुकार लाल चंद उस्ताद थे। यह महल अपनी 953 झरोखों, गुलाबी बलुआ पत्थर और अनोखी जालीदार खिड़कियों के कारण खास है; इन झरोखों का मूल उद्देश्य शाही महिलाओं को नगर-जीवन और मेले-उत्सवों को बिना देखे गए देख पाने देना था। हमेशा ठंडी हवा बहने के कारण इसे “Air-Conditioned Palace” भी कहा जाता है |
महल पाँच मंज़िलों में बंटा हुआ है और परंपरागत रूप से हर मंज़िल को अलग नाम दिया गया है — ये नाम और उनकी खासियतें नीचे दी जा रही हैं। इसे बाहर से देखना ही सबसे सुंदर माना जाता है|
पहली मंज़िल — शरद मंदिर (Sharad Mandir)
पहली मंज़िल को शरद मंदिर कहा जाता है। इसे शरद (शरद ऋतु/शरदीय उत्सव) के नाम से जोड़ा जाता था, क्योंकि यहाँ से बाहर के उत्सव और रौनक का आनंद लिया जाता था। पहली मंज़िल के सामने आंगन और सुरम्य गलियाँ बनी थीं और यहाँ मूल रूप से सजावटी तथा उपयोगी कमरें थीं।
दूसरी मंज़िल — रतन मंदिर (Ratan Mandir)
दूसरी मंज़िल को रतन मंदिर कहा जाता है। यहाँ रंगीन कांच की सूक्ष्म कारीगरी और शिल्पकारी दिखाई देती है—कहा जाता है कि सूरज की रोशनी जब कांचों पर पड़ती थी तो अंदर इंद्रधनुषी रंग बिखर जाते थे। इसलिए इसे रतन (रत्न-सी जगमग) कहा गया।
तीसरी मंज़िल — विचित्र (विचित्र) मंदिर (Vichitra Mandir)
तीसरी मंज़िल का नाम विचित्र मंदिर रखा गया है—यहाँ के कमरे और अलंकरण अनोखे तथा कलात्मक हैं। यह वह स्तर था जहाँ स्थापत्य और सजावट की कला अधिक झलकती है। कुछ सूचनाओं में इसे महल के आध्यात्मिक या पूजा संबंधी उपयोग से भी जोड़ा जाता है।
चौथी मंज़िल — प्रकाश मंदिर (Prakash Mandir)
चौथी मंज़िल को प्रकाश मंदिर कहा जाता है। इस मंज़िल से ऊपर की तरफ़ खुलने वाले खुले भाग और छत के निकास से प्रकाश और दृश्य का अच्छा मेल बनता था—यानी यहाँ से सबसे साफ व व्यापक दृश्यों का अनुभव मिलता था। छत की तरफ़ जाने वाले मार्ग यहीं से निकले हुए हैं।
पाँचवाँ (ऊपरी) मंज़िल — हवा मंदिर (Hawa Mandir)
टॉप यानी पाँचवाँ रूप से प्रसिद्ध हवा मंदिर है—यही वह मंज़िल थी जिसकी वजह से पूरे महल का नाम “हवा महल” पड़ा। ऊपर की इस मंज़िल में बने झरोखे और जाली इतनी अधिक थीं कि यहाँ हमेशा ठंडी हवा बहती रहती थी—यहाँ से आसपास का पूरा दृश्य भी खुले रूप में दिखाई देता था।
अद्भुत वास्तुकला – राजपूत + मुगल शैली का मेल
हवा महल एक सांस्कृतिक संगम है जहाँ
✔️ राजपूत शैली — गुंबद, छतरियाँ, नक्काशीदार खंभे
✔️ मुगल शैली — कमानें, जालियाँ, नाज़ुक पत्थरकारी
दोनों मिलकर एक शानदार वास्तुकला रचती हैं।
वास्तुकला की मुख्य विशेषताएँ:
- गुलाबी और लाल बलुआ पत्थर से निर्मित
- पाँच मंज़िलें (जैसे मधुमक्खी का छत्ता)
- 953 झरोखे
- 87° के झुकाव वाली इमारत
- बिना नींव के बनी दुनिया की सबसे ऊँची इमारत
- कृष्ण मुकुट जैसी आकृति, Lord Krishna को समर्पित
इसका अनोखा झुका हुआ ढांचा इसे सदियों से मजबूती से खड़ा रखे हुए है।
हवा महल की हवा क्यों इतनी ठंडी रहती है?
953 जालीदार खिड़कियों से आने वाली हवा
➡️ आपस में एक-दूसरे से टकराती है
➡️ उसका तापमान कम हो जाता है
➡️ महल अंदर से ठंडा बना रहता है
इसलिए यह राजा और शाही परिवार के लिए ग्रीष्मकालीन रिज़ॉर्ट जैसा था।
हवा महल का भीतर और ऊपर का दृश्य
अक्सर लोग इसे सिर्फ बाहर से देखते हैं, लेकिन महल के अंदर जाकर ऊपर चढ़ना एक खुद में अलग अनुभव है।
ऊपर से आपको दिखता है:
- पूरा जौहरी बाज़ार
- पुराना जयपुर
- मंदिरों के शिखर
- गुलाबी शहर का खूबसूरत दृश्य
यह अनुभव आपके जयपुर यात्रा को यादगार बना देता है।
हवा महल में संग्रहालय (Museum at Hawa Mahal)
महल के अंदर राजस्थान सरकार द्वारा संचालित पुरातत्व संग्रहालय भी है, जहाँ आप देख सकते हैं—
- प्राचीन हथियार
- राजपूताना चित्रकला
- पुरानी शाही वस्तुएँ
- वास्तु शिल्प एवं कलाकृतियाँ
हवा महल कैसे पहुँचे?
हवा महल, जयपुर के सबसे व्यस्त जौहरी बाज़ार में स्थित है। यहाँ तक पहुँचना आसान है:
- टैक्सी / कैब
- ऑटो
- लोकल बसें सब उपलब्ध रहते हैं।
हवा महल के समय (Timings)
सुबह 9 बजे – शाम 5 बजे तक (प्रतिदिन)
टिकट की कीमत (Entry Ticket Charges)
भारतीय पर्यटक – ₹50
विदेशी पर्यटक – ₹200
छात्र – रियायती शुल्क उपलब्ध
हवा महल के पास क्या-क्या देखें?
- जौहरी बाज़ार
- सिटी पैलेस
- जंतर-मंतर
- बापू बाज़ार
यात्रा टिप्स (Travel Tips)
✔️ सुबह 8–10 बजे का समय फोटो के लिए सबसे बेहतरीन
✔️ भीड़ से बचने के लिए कार्यदिवस सबसे अच्छा
✔️ ऊपर तक अवश्य जाएँ, दृश्य अद्भुत है
✔️ पास के बाज़ार से राजस्थानी ज्वेलरी और हैंडीक्राफ्ट खरीद सकते हैं