Select Page

राजस्थान के बारां ज़िले से लगभग 65 किलोमीटर दूर, पार्वन नदी के किनारे स्थित शेरगढ़ किला इतिहास, वीरता और स्थापत्य कला का एक अद्भुत संगम है। यह किला प्राचीन काल से ही सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। अरावली की पहाड़ियों में बसे इस दुर्ग का विस्तृत इतिहास, इसके बदलते नाम, शासकों का शासन और इसकी भौगोलिक स्थिति इसे राजस्थान के प्रमुख ऐतिहासिक किलों में एक ऊँचा स्थान प्रदान करती है।

इतिहास – कोशवर्धन से शेरगढ़ तक की यात्रा

शेरगढ़ का मूल नाम कोशवर्धन (Koshavardhan) था, जिसका अर्थ है “धन-संपन्नता को बढ़ाने वाला नगर”। यह नाम ही बता देता है कि यह स्थान कभी व्यापार, संस्कृति और सैन्य शक्ति का केंद्र रहा होगा।

शेरशाह सूरी ने दिया नया नाम – शेरगढ़

किला तब चर्चा में आया जब सूरी वंश के महान शासक शेरशाह सूरी ने इसे जीतकर इसका नाम बदलकर “शेरगढ़” रखा। उसी के समय से यह किला इस नाम से प्रसिद्ध हो गया।

प्राचीनता का प्रमाण – 790 ईस्वी का अभिलेख

किले की दीवारों पर मिला 790 ईस्वी का शिलालेख इस बात का प्रमाण है कि शेरगढ़ किला लगभग 1200 वर्ष पुराना है।
यह शिलालेख दर्शाता है कि यह क्षेत्र

  • सांस्कृतिक रूप से समृद्ध,
  • धार्मिक रूप से सक्रिय,
  • तथा राजनैतिक रूप से संगठित था।

किले की भौगोलिक और सामरिक महत्ता

पार्वन नदी के तट पर स्थित

किले का विशाल ढांचा सीधे पार्वन नदी को निहारता है। हमले या बाहरी आक्रमण के समय यह नदी सुरक्षा कवच का कार्य करती थी।

रणनीतिक ऊँचाई

किला ऊँचाई पर स्थित होने के कारण—

  • शत्रु की हलचल आसानी से दिखाई देती थी
  • किले को जीतना कठिन था
  • सेना और तोपखाने की तैनाती आसान होती थी

इस वजह से शेरगढ़ को अनेक राजवंशों ने अपने नियंत्रण में रखा।

कौन-कौन से राजवंशों ने किया शासन?

शेरगढ़ का इतिहास कई राजाओं और वंशों की कहानियों से भरा है।
समय-समय पर इसे—

  • स्थानीय राजपूत शासकों,
  • गुर्जर-प्रतिहारों,
  • दिल्ली सल्तनत,
  • और अंत में सूरी वंश ने अपने अधीन रखा।

प्रत्येक वंश ने इसे अपने हिसाब से विकसित किया, जिसकी झलक आज भी खंडहरों में दिखाई देती है।

किले की वास्तुकला – शक्ति और सौंदर्य का मेल

शेरगढ़ किला अपनी अनोखी स्थापत्य शैली के लिए जाना जाता है।

आप यहाँ पाएँगे—

  • ऊँची और मजबूत परकोटे
  • विशाल दरवाज़े
  • प्रहरी टावर
  • प्राचीन मंदिरों के अवशेष
  • महलों के टूटे-फूटे लेकिन अद्भुत ढांचे
  • जलाशयों और बावड़ियों के प्रमाण

किले की वास्तुकला इस बात का सबूत है कि यह स्थान न केवल सैन्य दृष्टि से महत्वपूर्ण था, बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी समृद्ध था।

शेरगढ़ – बरां का छिपा हुआ रत्न

बरां जिले में स्थित अन्य ऐतिहासिक स्थलों की तुलना में शेरगढ़ किला अपेक्षाकृत कम प्रसिद्ध है, लेकिन—

✔ इतिहास प्रेमियों के लिए
✔ फोटोग्राफी उत्साही यात्रियों के लिए
✔ वास्तुकला खोजने वालों के लिए
✔ और शांत वातावरण पसंद करने वालों के लिए

यह किला एक परफेक्ट पर्यटन स्थल है।

महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Facts)

  • स्थान: बरां जिले से 65 किमी दूर, पार्वन नदी के किनारे
  • मूल नाम: कोशवर्धन
  • वर्तमान नाम: शेरगढ़ (शेरशाह सूरी द्वारा दिया गया)
  • स्थापना काल: 8वीं सदी (790 ईस्वी के अभिलेख से पुष्टि)
  • महत्ता: सामरिक, सांस्कृतिक और धार्मिक
  • विशेष: बारां के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक

समापन – इतिहास और प्रकृति का संगम

शेरगढ़ किला न केवल युद्ध और वीरता का गवाह है, बल्कि यह राजस्थान की सांस्कृतिक गहराई को भी दर्शाता है। पार्वन नदी की धारा, पहाड़ों की शांति और किले का भव्य इतिहास इसे एक ऐसा अनुभव बनाते हैं जिसे कोई भी यात्री मिस नहीं कर सकता।

यदि आप राजस्थान में अनदेखे लेकिन अद्भुत ऐतिहासिक स्थलों का अनुभव करना चाहते हैं, तो शेरगढ़ किला अवश्य जाएँ—यहाँ हर पत्थर एक कहानी कहता है।