राजस्थान की धरती पर कई चमत्कारिक और प्राचीन धाम स्थित हैं, और इन्हीं में से एक है, सांवळिया सेठ का परम पावन मंदिर, जो चित्तौड़गढ़–उदयपुर हाईवे पर बसे मंदफिया ग्राम में स्थित है। लाखों भक्त यहाँ हर वर्ष दर्शन करने आते हैं, क्योंकि सांवळिया जी को “धन के दाता”, “सांवळिया सेठ” और “इच्छापूर्ति के देवता” माना जाता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि – स्वप्न से शुरू हुई दिव्य कथा
मंदिर के इतिहास से जुड़ी कथा अत्यंत अद्भुत और भावनात्मक है। सन 1840 में एक स्थानीय चरवाहे भोला नाथ गुर्जर को लगातार तीन रातों तक एक दिव्य सपना आया। सपने में भगवान स्वयं उन्हें एक विशेष स्थान की खुदाई करने का आदेश देते हैं।
जब गाँव वालों ने मिलकर उस स्थान की खुदाई की, तब वहाँ से काले-सांवले स्वरूप की तीन प्रतिमाएँ निकलीं—और यहीं से शुरू हुआ सांवळिया सेठ का प्राकट्य चमत्कार।
इन तीनों मूर्तियों के आधार पर आगे तीन मंदिर बने:
1️⃣ प्राकट्य स्थल – भदसौदा-बगुंद सीमा (सबसे पहला और पवित्र स्थल)
जिस स्थान पर खुदाई में मूर्ति मिली थी, वहीं पहली प्रतिमा स्थापित की गई। यह स्थान आज “प्राकट्य स्थल” कहलाता है और सांवळिया जी के इतिहास में इसका सर्वोच्च महत्व है।
2️⃣ भदसौदा गाँव का प्राचीन मंदिर (सबसे पुराना स्थापित मंदिर)
खुदाई में मिली दूसरी प्रतिमा भदसौदा गाँव में स्थापित की गई। मान्यता है कि यह मंदिर भक्तों की मनोकामनाएँ पूरी करता है।
3️⃣ मंदफिया का भव्य धाम – सांवळिया जी धाम (मुख्य मंदिर)
तीसरी प्रतिमा मंदफिया में स्थापित की गई, और आज यह राजस्थान के सबसे भव्य और विशाल मंदिरों में गिना जाता है। इसे “सांवळिया सेठ का दरबार” कहा जाता है, जहाँ भक्त अपनी दुकान, व्यापार, नए काम और बड़े निवेश से पहले चिट्ठी चढ़ाकर आशीर्वाद लेते हैं।
सांवळिया सेठ क्यों हैं इतने प्रसिद्ध?
✔ धन और समृद्धि के देवता
जिस तरह उत्तर भारत में “श्री साँवले कृष्ण” का महत्व है, उसी प्रकार राजस्थान और मध्य भारत में लोग धन-संपत्ति के लिए सांवळिया सेठ का आशीर्वाद लेते हैं।
✔ भक्तों पर चमत्कारी कृपा
कहा जाता है कि जो भी सच्ची नीयत से मन्नत माँगता है—सांवळिया सेठ कभी खाली हाथ नहीं लौटाते।
✔ तीन मंदिरों का अनोखा त्रिकूट
एक ही प्राकट्य से तीन मंदिरों का निर्माण — यह अपने आप में अद्भुत है।
✔ दैनिक विशाल श्रद्धालु संख्या
प्रत्येक दिन हज़ारों लोग यहाँ दर्शन करने आते हैं।
मंदिर वास्तुकला और वातावरण
मंदफिया का मंदिर सफेद संगमरमर, कलात्मक नक्काशी, और पारंपरिक भारतीय वास्तुकला का शानदार संगम है।
मंदिर के प्रांगण में—
- विशाल प्रवेश द्वार
- खूबसूरत स्तंभ
- सुव्यवस्थित प्रांगण
- विशाल हवनशाला
- नवनिर्मित भक्त निवास
सब कुछ अनोखी दिव्यता प्रदान करते हैं।
सांवळिया जी मंदिर – दर्शन समय
| पूजा / आरती | समय |
|---|---|
| मंगला आरती | सुबह 05:30 बजे |
| राजभोग दर्शन | 10:00 – 11:15 बजे |
| दोपहर आरती | 02:30 बजे |
| शाम की आरती | 08:00 – 09:15 बजे |
| भजन संध्या | 09:15 – 11:00 बजे |
📞 संपर्क
सांवळिया जी मंदिर, मंदफिया – 01470-242622 / 242922
कैसे पहुँचें?
मंदिर चित्तौड़गढ़–उदयपुर हाईवे पर स्थित है।
निकटतम प्रमुख स्थान:
- चित्तौड़गढ़ – 40 किमी
- उदयपुर – 80 किमी
बस, कार और टैक्सी से अत्यंत सुगम यात्रा।
निष्कर्ष – आस्था का अद्भुत केंद्र
सांवळिया सेठ का यह धाम केवल एक मंदिर नहीं है —यह एक विश्वास, एक अनुभव, एक दिव्यता की ऊर्जा है। जहाँ लाखों लोग जाते हैं: मन की शांति पाने, धन-संपत्ति की वृद्धि के लिए, और जीवन की हर समस्या के समाधान के लिए।
यदि आप राजस्थान आते हैं, तो सांवळिया जी मंदिर आपके यात्रा-सूची में सबसे ऊपर होना चाहिए।