Select Page

राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में स्थित आनंद सागर झील, जिसे स्थानीय रूप से ‘बाई तालाब‘ के नाम से भी जाना जाता है, एक आकर्षक और आध्यात्मिक स्थान है जो इतिहास, श्रद्धा और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। यह झील सिर्फ एक कृत्रिम जलाशय नहीं है, बल्कि बांसवाड़ा की रानी लांची बाई द्वारा महारावल जगमल सिंह की स्मृति में बनवाया गया एक भव्य स्मारक है, जो आज भी क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का सजीव उदाहरण है।

झील का इतिहास और निर्माण

आनंद सागर झील का निर्माण 17वीं शताब्दी में रानी लांची बाई ने करवाया था। इसे ‘बाई तालाब‘ नाम इसलिए मिला क्योंकि यह एक रानी द्वारा बनवाया गया था। इस झील का निर्माण न केवल जल संचयन के उद्देश्य से हुआ, बल्कि यह बांसवाड़ा की शाही महिलाओं के लिए एक विश्राम स्थल और धार्मिक अनुष्ठानों का केन्द्र भी रहा है।

झील के चारों ओर हरियाली से आच्छादित वातावरण, उसमें फैली शांति और इतिहास की गूंज इसे एक आदर्श पर्यटन स्थल बनाती है।

‘कल्पवृक्ष’ की आस्था

आनंद सागर झील के चारों ओर फैले हुए हैं अद्भुत ‘कल्पवृक्ष‘, जो हिंदू धार्मिक मान्यताओं में मनोकामना पूर्ण करने वाले पेड़ के रूप में जाने जाते हैं। इन वृक्षों को लेकर स्थानीय लोगों की आस्था बहुत गहरी है। श्रद्धालु यहां आकर इन पेड़ों के नीचे बैठकर प्रार्थना करते हैं और अपनी मनोकामनाएं व्यक्त करते हैं। कहा जाता है कि सच्चे मन से मांगी गई मन्नतें यहां पूरी होती हैं।

शाही छतरियों की भव्यता

आनंद सागर झील के किनारे बांसवाड़ा रियासत के कई शासकों की छतरियां या समाधियां भी स्थित हैं। ये सुंदर रूप से नक्काशीदार छतरियां शाही इतिहास की गौरवगाथा का स्मरण कराती हैं। इन छतरियों की वास्तुकला में राजस्थानी शैली का सौंदर्य झलकता है – पत्थरों पर की गई नक्काशी, मेहराबदार गलियारे और गुंबदों की कलात्मक बनावट पर्यटकों को अतीत की सैर कराती है।

यह स्थान उन लोगों के लिए खास आकर्षण का केंद्र है जो राजस्थानी शिल्पकला और स्थापत्य में रुचि रखते हैं।

प्राकृतिक सौंदर्य और शांति का संगम

आनंद सागर झील सिर्फ ऐतिहासिक या धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह एक प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण स्थल भी है। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यहां का दृश्य मंत्रमुग्ध कर देने वाला होता है। झील में हल्की-हल्की लहरों के साथ बहती हवा, पक्षियों की मधुर चहचहाहट और चारों ओर फैली हरियाली, एक अद्भुत मानसिक शांति का अनुभव कराते हैं।

फोटोग्राफी और पिकनिक स्पॉट

जो लोग फोटोग्राफी के शौकीन हैं, उनके लिए आनंद सागर झील एक परिपूर्ण स्थान है। छतरियों की पारंपरिक छाया, झील का नीला जल और कल्पवृक्षों के नीचे की रंगीन छवियाँ, एक से बढ़कर एक फ्रेम बनाती हैं। साथ ही, यह स्थान स्थानीय परिवारों और पर्यटकों के लिए एक लोकप्रिय पिकनिक स्थल भी है। यहां पर बैठकर खाने-पीने का आनंद लेने के साथ-साथ आप अपने प्रियजनों के साथ खूबसूरत पल बिता सकते हैं।

कैसे पहुंचे आनंद सागर झील?

आनंद सागर झील बांसवाड़ा शहर के पूर्वी हिस्से में स्थित है। यह शहर राजस्थान के दक्षिणी भाग में स्थित है और उदयपुर से इसकी दूरी लगभग 160 किलोमीटर है। बांसवाड़ा रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड से ऑटो या टैक्सी द्वारा झील तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।

आस-पास के दर्शनीय स्थल

अगर आप आनंद सागर झील घूमने आए हैं, तो इसके आस-पास स्थित अन्य स्थानों को भी अपनी यात्रा में शामिल कर सकते हैं:

  • राजमहल – बांसवाड़ा का प्रमुख किला और ऐतिहासिक स्थल।
  • त्रिपुरा सुंदरी मंदिर – एक प्राचीन और महत्वपूर्ण शक्तिपीठ।
  • माही डैम – माही नदी पर बना विशाल जलाशय।
  • कागदी पिकनिक स्पॉट – एक और सुंदर जल निकाय जो परिवारों के लिए आदर्श स्थल है।

निष्कर्ष

आनंद सागर झील न केवल बांसवाड़ा की राजसी विरासत की गवाही देती है, बल्कि यह एक आध्यात्मिक और प्राकृतिक अनुभव भी प्रदान करती है। यहां का शांत वातावरण, ऐतिहासिक छवियाँ, धार्मिक महत्व और सुंदर परिदृश्य – सब कुछ मिलकर इस झील को एक आदर्श पर्यटन स्थल बनाते हैं।

यदि आप राजस्थान की असली सांस्कृतिक और प्राकृतिक विविधता का अनुभव करना चाहते हैं, तो एक बार आनंद सागर झील की यात्रा अवश्य करें – यह एक ऐसी जगह है जहां अतीत की गूंज, आस्था की शक्ति और प्रकृति की छांव एक साथ मिलती हैं।