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शेरगढ़ किला – कोशवर्धन से शेरगढ़ तक की महान वीरगाथा

राजस्थान के बारां ज़िले से लगभग 65 किलोमीटर दूर, पार्वन नदी के किनारे स्थित शेरगढ़ किला इतिहास, वीरता और स्थापत्य कला का एक अद्भुत संगम है। यह किला प्राचीन काल से ही सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। अरावली की पहाड़ियों में बसे इस दुर्ग का विस्तृत इतिहास,...

द्वारिकाधीश जी, कांकरोली – पुष्टिमार्ग का पावन तृतीय पीठ

राजसमंद झील के शांत जल और अरावली की गोद में स्थित कांकरोली का द्वारिकाधीश मंदिर राजस्थान का एक अत्यंत पवित्र और दिव्य वैष्णव तीर्थ है। यह मंदिर न केवल भक्ति का केंद्र है, बल्कि पुष्टिमार्ग (शुद्धाद्वैत वैष्णव धर्म) का तृतीय पीठ भी माना जाता है। यहाँ प्रतिष्ठित...

जयमल और पत्ता महल – चित्तौड़गढ़ की वीरता का अमर प्रतीक

राजस्थान की धरती सिर्फ रंगों और संस्कृतियों से ही नहीं, बल्कि अजेय साहस और बलिदान की अनगिनत कहानियों से भी भरी हुई है। उन्हीं अमर गाथाओं में से एक है जयमल और पत्ता की शौर्यगाथा, जिसकी याद में चित्तौड़गढ़ किले के भीतर जयमल और पत्ता का महल आज भी गर्व से खड़ा है। यह महल...

विजय स्तम्भ – मेवाड़ का गौरव, राजस्थान की वीरता का प्रतीक

चित्तौड़गढ़ किले में स्थित विजय स्तम्भ (Tower of Victory) राजस्थान का वह स्मारक है, जो सिर्फ अपनी सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि मेवाड़ की अपराजेय वीरता और गौरवशाली इतिहास के लिए भी विश्वभर में प्रसिद्ध है। यह स्मारक मेवाड़ के महान शासक महाराणा कुंभा की विजय का प्रतीक...

बंध बरेठा – भरतपुर का प्राचीन वन्य अभयारण्य और पक्षी प्रेमियों का स्वर्ग

राजस्थान के भरतपुर ज़िले में स्थित बंध बरेठा प्रकृति प्रेमियों, पक्षी-प्रेमियों और इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए एक अनोखा स्थल है। यह स्थान जंगलों, पहाड़ियों, झीलों, पुराने महलों और सैकड़ों दुर्लभ पक्षियों के कारण विशेष पहचान रखता है। यह एक समय भरतपुर राजघराने का...