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सीता माता वन्यजीव अभ्यारण्य: मध्य अरावली की गोद में बसी जैव विविधता की अनमोल धरोहर

राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में स्थित सीता माता वन्यजीव अभ्यारण्य प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव पर्यटकों के लिए एक ऐसा स्थल है जहाँ प्राकृतिक वनस्पति, जलधाराएं और दुर्लभ वन्यजीवों का अद्भुत समागम देखने को मिलता है। यह अभयारण्य अरावली और विंध्याचल पर्वतमालाओं के मिलन...

बस्सी वन्यजीव अभयारण्य: मेवाड़ की पूर्ववर्ती शिकारस्थली से एक जैवविविधता से भरपूर संरक्षित क्षेत्र तक

राजस्थान की ऐतिहासिक भूमि में बसे बस्सी वन्यजीव अभयारण्य (Bassi Wildlife Sanctuary) की कहानी सिर्फ एक संरक्षित जंगल की नहीं, बल्कि यह एक ऐसी जगह है, जहाँ राजसी विरासत, प्राकृतिक संपदा और वन्यजीव संरक्षण का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। स्थापना और भौगोलिक स्थिति बस्सी...

केवला देव घना राष्ट्रीय उद्यान: भारत का विश्व प्रसिद्ध पक्षी स्वर्ग

राजस्थान के भरतपुर ज़िले में स्थित केवला देव घना राष्ट्रीय उद्यान (Keoladeo Ghana National Park), जिसे पहले भरतपुर पक्षी विहार के नाम से जाना जाता था, दुनिया के सबसे समृद्ध पक्षी अभयारण्यों में से एक है। 370 से अधिक पक्षी प्रजातियों का यह घर, हर साल सर्दियों में...

सोरसन वन्यजीव अभयारण्य: राजस्थान की प्रकृति का एक अद्भुत चमत्कार

कोटा से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सोरसन वन्यजीव अभयारण्य (Sorsan Wildlife Sanctuary) प्रकृति प्रेमियों और पक्षी-प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। 41 वर्ग किलोमीटर में फैले इस अभयारण्य को सोरसन घासभूमि (Sorsan Grasslands) के नाम से भी जाना जाता है। यह...

दिग्गी कल्याणजी मंदिर – 5600 वर्षों से आस्था का ध्रुवतारा

राजस्थान के टोंक ज़िले से लगभग 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित दिग्गी कल्याणजी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एक जीवंत इतिहास है – जो आज भी बिना रुके 5600 वर्षों से श्रद्धा और विश्वास की लौ जलाए हुए है। यह मंदिर भगवान विष्णु के अवतार श्री कल्याणजी को समर्पित है...