Select Page

राजस्थान का बूंदी शहर अपनी आकर्षक वास्तुकला, ऐतिहासिक धरोहर और मनमोहक प्राकृतिक दृश्य के लिए प्रसिद्ध है। इसी बूंदी के तारागढ़ दुर्ग के भीतर स्थित “बादल महल” भी एक ऐसी ऐतिहासिक विरासत है जो पर्यटकों का मन मोह लेती है। इसे अंग्रेज़ी में “पैलेस ऑफ क्लाउड्स” यानी बादलों का महल भी कहा जाता है, और सच में यह महल कई बार बादलों के बीच घिरा हुआ दिखाई देता है, जो इसकी सुंदरता को कई गुना बढ़ा देता है।

इतिहास की गूंज: महल की स्थापना

बादल महल का निर्माण दो अलग-अलग कालखंडों में हुआ था। सर्वप्रथम महल के बरामदे और भूतल का निर्माण महारावल गोपीनाथ द्वारा करवाया गया था। इसके पश्चात् वर्ष 1609 से 1657 ईस्वी के मध्य महारावल पुंजराज ने इस महल का शेष निर्माण करवाया। इस प्रकार, लगभग आधी सदी में यह भव्य और अनूठा महल बनकर तैयार हुआ। महल का नाम “बादल महल” इसलिए पड़ा क्योंकि यह महल अक्सर बादलों से घिरा होता है, जो इसे एक रहस्यमयी और मनमोहक स्वरूप प्रदान करता है।

वास्तुकला का अद्भुत संगम

बादल महल राजस्थानी स्थापत्य कला और मुगल शैली का एक सुंदर मिश्रण है। महल में कई जटिल नक्काशीदार झरोखे, मेहराबें और स्तंभ हैं, जिनमें हाथियों और कमल के फूलों के बेहद मनमोहक और बारीक चित्र उकेरे गए हैं। महल के तीन मेहराबों पर अधखिले कमल की सुंदर आकृतियाँ बनी हुई हैं, जो राजस्थानी शिल्पकला का उत्कृष्ट उदाहरण हैं। सबसे लंबे मेहराब में तीन कमल की आकृतियाँ हैं, जो इसकी सुंदरता में चार चाँद लगा देती हैं।

भित्तिचित्रों का अनूठा संसार

बादल महल अपने भव्य भित्तिचित्रों के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। इन भित्तिचित्रों में चीनी संस्कृति का स्पष्ट प्रभाव दिखाई पड़ता है, जो बूंदी कला शैली की एक विशिष्ट पहचान बन चुका है। महल की दीवारें पाँच विभिन्न स्तरों पर चित्रित की गई हैं, जिनमें से प्रत्येक स्तर पर अलग-अलग प्रकार के चित्र बने हुए हैं। इन चित्रों में रागमाला श्रृंखला के 36 चित्र विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।

भित्तिचित्रों की एक पूरी शृंखला राजा रतन सिंह और उनके परिवार की विभिन्न गतिविधियों को दर्शाती है। इनमें शिकार के दृश्य, हाथी की लड़ाई, पोलो खेलते हुए राजा और उनके परिवार के सदस्य आदि प्रमुख हैं। इन चित्रों में तत्कालीन सामाजिक जीवन और सांस्कृतिक गतिविधियों की स्पष्ट झलक मिलती है।

महल की विशेषताएँ और प्रमुख आकर्षण

बादल महल की सबसे बड़ी खासियत इसका आकर्षक बरामदा और विशाल छत है, जहाँ से तारागढ़ दुर्ग के साथ-साथ बूंदी के आसपास के प्राकृतिक दृश्यों का अद्भुत नज़ारा देखा जा सकता है। महल के भीतर प्रवेश करते ही आपको भव्य स्तंभ, आकर्षक छतरियाँ और रंग-बिरंगे चित्रों से सजी दीवारें देखने को मिलेंगी, जो आपको तुरंत ही इतिहास के गौरवशाली दौर में ले जाती हैं।

महल के ऊपर एक बड़ा केंद्रीय गुंबद और कई छोटे गुंबद हैं, जिन पर भगवान विष्णु के दस अवतारों के चित्र बड़ी ही कुशलता से बनाए गए हैं। यह कला तत्कालीन कलाकारों के कौशल का परिचायक है और बूंदी शैली की उत्कृष्टता को दर्शाता है।

पर्यटकों के लिए जानकारी

बादल महल पर्यटकों के लिए सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक खुला रहता है। महल में प्रवेश के लिए एक छोटा-सा शुल्क निर्धारित है। यहां अनुभवी गाइड भी उपलब्ध हैं जो महल की ऐतिहासिक जानकारियों और कथाओं को रोचक ढंग से बताते हैं। महल की भव्यता और आकर्षण के कारण यह बूंदी आने वाले पर्यटकों के लिए एक अनिवार्य स्थान बन चुका है।

आस-पास के अन्य दर्शनीय स्थल

बादल महल के अलावा आप बूंदी के अन्य ऐतिहासिक स्थलों जैसे तारागढ़ किला, गढ़ पैलेस, चित्रशाला, नौलखा बावड़ी आदि का भ्रमण कर सकते हैं। ये सभी स्थल बूंदी की प्राचीन संस्कृति और ऐतिहासिक गौरव का प्रतीक हैं। साथ ही बूंदी के स्थानीय बाज़ारों में हस्तशिल्प और राजस्थानी परंपरागत वस्तुएँ भी पर्यटकों को आकर्षित करती हैं।

बादल महल की यात्रा आपको राजस्थान की भव्यता और राजसी विरासत से रूबरू कराएगी। तो तैयार हो जाइए एक यादगार यात्रा के लिए और बादल महल की अद्भुत दुनिया का अनुभव करने के लिए।