राजस्थान के भरतपुर ज़िले में स्थित बंध बरेठा प्रकृति प्रेमियों, पक्षी-प्रेमियों और इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए एक अनोखा स्थल है। यह स्थान जंगलों, पहाड़ियों, झीलों, पुराने महलों और सैकड़ों दुर्लभ पक्षियों के कारण विशेष पहचान रखता है।
यह एक समय भरतपुर राजघराने का निजी वन्य क्षेत्र था, जो आज वन विभाग के अधीन है और अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण हर साल हजारों पर्यटकों को आकर्षित करता है।
राजाओं द्वारा बसाया गया अद्भुत अभयारण्य
बंध बरेठाका इतिहास 19वीं शताब्दी से जुड़ा है।
✔ काकुंड नदी पर बने बांध का निर्माण
- बांध निर्माण का आरंभ: 1866 ईस्वी
- आरंभकर्त्ता: महाराज जसवंत सिंह
- पूर्णता वर्ष: 1897 ईस्वी
- निर्माण पूर्ण कराने वाले शासक: महाराज राम सिंह
इस विशाल बांध के कारण आज यहाँ एक बड़ा जलाशय (reservoir) बन चुका है, जो अनेक दुर्लभ पक्षियों का सुरक्षित आवास है।
✔ राजमहल – इतिहास और शाही वास्तुकला का प्रतीक
बंध बरेठा अभयारण्य के अंदर स्थित भव्य महल का निर्माण
- महाराज किशन सिंह ने कराया था।
यह महल आज भी भरतपुर राजपरिवार की निजी संपत्ति है और इसकी स्थापत्य शैली स्थानीय राजस्थानी शिल्प कला का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है।
बर्ड वॉचिंग का स्वर्ग – 200+ पक्षी प्रजातियों का घर
बंध बरेठा को “Bird Watcher’s Paradise” कहा जाता है। यहाँ लगभग 200 से अधिक पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें कई अत्यंत दुर्लभ प्रजातियाँ भी शामिल हैं।
मुख्य पक्षी प्रजातियाँ
- ब्लैक बिटर्न (सबसे दुर्लभ और मुख्य आकर्षण)
- व्हाइट ब्राउन फुलवेटा
- ओपन बिल स्टॉर्क
- पेंटेड स्टॉर्क
- वाइट आइबिस
- किंगफिशर
- ईग्रेट
- मोर, तीतर और कई आर्द्रभूमि (wetland) पक्षी
झील के आसपास फैली हरियाली और शांत वातावरण पक्षियों को देखने के लिए सबसे अनुकूल बनाता है।
काकुंड नदी का जलाशय – प्राकृतिक सौंदर्य का केंद्र
काकुंड नदी पर बने इस विशाल जलाशय में
- बड़ी मात्रा में पानी भरता है
- सर्दियों के मौसम में प्रवासी पक्षियों का आगमन होता है
- यह पूरा क्षेत्र न केवल पक्षियों के लिए, बल्कि वन्य जीवों के लिए भी सुरक्षित पर्यावास बनाता है
झील के किनारे बैठकर सूर्यास्त देखना यहाँ का सबसे सुंदर अनुभव माना जाता है।
वन्य जीव और प्राकृतिक वातावरण
पक्षियों के अलावा यहाँ कई अन्य जीव भी देखे जा सकते हैं:
- लोमड़ी
- सियार
- खरगोश
- चीतल
- अलग-अलग किस्म के सरीसृप
यह स्थान अरावली की पहाड़ियों, घने पेड़ों और शांत पानी के कारण राजस्थान के सबसे हरे-भरे इलाकों में से एक माना जाता है।
कैसे पहुँचें?
- भरतपुर शहर से दूरी: लगभग 25–30 किमी
- सबसे निकट स्टेशन: भरतपुर जंक्शन
- यात्रा के साधन: टैक्सी, निजी वाहन, बाइक
- सार्वजनिक परिवहन सीमित है, इसलिए निजी वाहन सबसे उपयुक्त विकल्प है।
घूमने का उचित समय
- अक्टूबर से मार्च – बर्ड वॉचिंग के लिए सर्वोत्तम
- सर्दियों में यहाँ प्रवासी पक्षियों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है।
उपयोगी सुझाव
- दूरबीन साथ रखें (Bird Watching में मदद मिलेगी)
- सुबह या शाम का समय सबसे अच्छा है
- प्राकृतिक क्षेत्र है, इसलिए शोर कम करें
- पक्षियों को दाना या भोजन न खिलाएँ