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राजस्थान अपने भव्य किलों और समृद्ध इतिहास के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है, लेकिन उन्हीं के बीच एक ऐसा किला भी है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं—भैंसरोगढ़ किला।

चंबल और ब्रह्माणी नदियों के संगम पर, लगभग 200 फीट ऊँची खड़ी स्लेट की पहाड़ी पर स्थित यह किला अपनी प्राकृतिक सुंदरता और पुरातन वैभव के कारण अत्यंत अद्वितीय माना जाता है। यह किला उदयपुर से 235 किमी उत्तर-पूर्व तथा कोटा से 50 किमी दक्षिण में स्थित है।

इतिहास – भव्यता में छिपे रहस्यों की कहानी

भैंसरोगढ़ किले का अतीत उतना ही गहरा है जितनी गहरी चंबल की धारा। किले के निर्माण के बारे में पूरी तरह से प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध नहीं है,
लेकिन माना जाता है कि—

  • इसका मूल निर्माण द्वितीय शताब्दी (2nd Century) में हुआ था।
  • इतिहास के विभिन्न कालों में यह किला अनेक राजवंशों के अधीन रहा।
  • कई लोककथाएँ और जनश्रुतियाँ इसके प्राचीन वैभव का वर्णन करती हैं।

कहा जाता है कि अलाउद्दीन खिलजी ने इस किले पर हमला किया था, जिसमें कई प्राचीन मंदिर और भवन नष्ट हो गए। इसी कारण इसके पुराने इतिहास के अनेक अध्याय आज भी रहस्य में ढके हुए हैं।

मेवाड़ राज्य से गहरा संबंध

यह किला आगे चलकर मेवाड़ राज्य का हिस्सा बना। 1741 ईस्वी में महाराणा जगत सिंह द्वितीय ने इस क्षेत्र को जागीर के रूप में रावत लाल सिंह द्वितीय,
जो सालूम्बर के रावत केसरी सिंह के पुत्र थे, को प्रदान किया। यहीं से भैंसरोगढ़ का इतिहास एक नए गौरवशाली चरण में प्रवेश करता है, और इस किले का महत्व राजनैतिक, सैन्य और सांस्कृतिक रूप से बढ़ता जाता है।

किले की सुंदरता जिसने अंग्रेज इतिहासकार को भी मोहित कर दिया

भैंसरोगढ़ किले की सुंदरता इतनी अद्वितीय है कि अंग्रेज़ इतिहासकार कर्नल जेम्स टॉड (Colonel James Todd) ने कहा था—

“यदि मुझे राजस्थान में कोई भी जागीर चुनने का अवसर मिले, तो मैं भैंसरोगढ़ ही चुनूँगा।”

यह कथन इस किले की महत्ता, प्राकृतिक सौंदर्य और रणनीतिक दृष्टि से उसकी मजबूती को दर्शाता है।

चारों ओर से घिरा प्राकृतिक सौंदर्य

भैंसरोगढ़ किला एक ऐसी दुर्लभ भौगोलिक स्थिति में स्थित है जहाँ—

  • नीचे चंबल नदी
  • बगल में ब्रह्माणी नदी
  • आसपास सघन जंगल
  • और दूर तक फैली अरावली पर्वत श्रृंखला

इन सबके बीच 200 फीट ऊँची चट्टान पर स्थित यह किला किसी चित्रकार के सपने जैसा दृश्य प्रस्तुत करता है। सूर्यास्त के समय चंबल नदी पर पड़ती सुनहरी रोशनी और किले की प्राचीन दीवारों का मेल ऐसा लगता है मानो इतिहास आज भी जीवंत हो।

आज का भैंसरोगढ़ – एक लग्ज़री हेरिटेज होटल

वर्तमान में भैंसरोगढ़ किले को इसके पूर्व शाही परिवार ने लक्ज़री हेरिटेज होटल के रूप में विकसित किया है। यह होटल राजसी ठाठ, पारंपरिक वास्तुकला और प्राकृतिक शांति का एक शानदार मिश्रण प्रस्तुत करता है।

यहाँ आने वाले पर्यटक—

  • नदी के किनारे डिनर
  • ग्रामीण राजस्थान का अनुभव
  • वन्यजीव सफारी
  • बोट राइड
  • ऐतिहासिक कहानियों से भरपूर गाइडेड टूर

का आनंद ले सकते हैं।

क्यों है भैंसरोगढ़ इतना खास?

✔ प्राकृतिक सौंदर्य, इतिहास और शांति—तीनों का संगम
✔ 200 फीट ऊँची चट्टान पर बना अनोखा किला
✔ चंबल व ब्रह्माणी नदियों का अद्भुत संगम
✔ राजस्थान का अनछुआ, कम भीड़ वाला पर्यटन स्थल
✔ राजसी जीवन का अनूठा अनुभव

भैंसरोगढ़ किला सिर्फ एक ऐतिहासिक धरोहर नहीं, बल्कि एक अनुभव है—प्रकृति, इतिहास और राजस्थान की संस्कृति का अद्वितीय संगम।

कैसे पहुँचे भैंसरोगढ़?

  • निकटतम शहर:
    • कोटा – 50 किमी
    • चित्तौड़गढ़ – 105 किमी
    • उदयपुर – 235 किमी
  • रेलवे:
    • कोटा और रावतभाटा निकटतम रेल स्टेशन हैं।
  • एयरपोर्ट:
    • उदयपुर एवं कोटा एयरपोर्ट सुविधाजनक विकल्प हैं।

निष्कर्ष

भैंसरोगढ़ किला राजस्थान की उन दुर्लभ धरोहरों में से है जो अब भी अपनी मूल शांति, प्राकृतिक भव्यता और ऐतिहासिक गरिमा को संजोए हुए है। यदि आप इतिहास के प्रेमी हैं, राजसी वैभव का अनुभव लेना चाहते हैं या प्रकृति की गोद में कुछ पल बिताना चाहते हैं— तो भैंसरोगढ़ किला आपकी यात्रा सूची में अवश्य होना चाहिए।