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बीकानेर में राष्ट्रीय ऊंट अनुसंधान केंद्र: राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक

बीकानेर शहर से महज 8 किलोमीटर दूर स्थित राष्ट्रीय ऊंट अनुसंधान केंद्र, एशिया का एकमात्र ऐसा केंद्र है जो ऊंटों की अनुसंधान और प्रजनन को समर्पित है। भारत सरकार द्वारा संचालित यह केंद्र लगभग 2000 एकड़ के अर्द्ध-शुष्क भूमि पर फैला हुआ है। 1984 में स्थापित यह संस्थान न...

जूनागढ़ किला: बीकानेर की शान और गौरवपूर्ण इतिहास की गवाही

राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्र में स्थित बीकानेर शहर की पहचान, जूनागढ़ किला, इतिहास प्रेमियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। अपने भव्य वास्तुकला और गौरवशाली इतिहास के लिए प्रसिद्ध यह किला कभी किसी शत्रु द्वारा विजय नहीं किया गया, यही इसकी विशेषता है।...

आसींद: राजस्थान का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक केंद्र

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में स्थित आसींद शहर खारी नदी के किनारे बसा है। भीलवाड़ा से लगभग 55 किलोमीटर दूर स्थित यह शहर अपने ऐतिहासिक महत्व, प्राचीन मंदिरों और आध्यात्मिक महत्ता के लिए जाना जाता है। आसींद राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जानने-समझने के लिए एक...

बिजोलिया: ऐतिहासिक मंदिरों और गौरवशाली इतिहास का संगम

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में स्थित बिजोलिया एक ऐतिहासिक कस्बा है, जो अपनी वास्तुकला की समृद्ध विरासत, आध्यात्मिक महत्व और रोचक इतिहास के लिए प्रसिद्ध है। भीलवाड़ा शहर से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर बसा बिजोलिया, प्राचीन भारतीय कला और इतिहास में रुचि रखने वाले...

जहाजपुर: भीलवाड़ा का ऐतिहासिक खजाना

भीलवाड़ा से लगभग 90 किलोमीटर दूर स्थित जहाजपुर, राजस्थान का एक छोटा लेकिन ऐतिहासिक महत्व रखने वाला कस्बा है। यह नगर वीरता, आध्यात्मिकता और वास्तुकला का अद्भुत संगम है। हालांकि जहाजपुर आम पर्यटक मानचित्र पर बहुत प्रसिद्ध नहीं है, लेकिन इतिहास प्रेमियों और खोजकर्ताओं के...

(शाहपुरा): इतिहास, संस्कृति और भक्ति का अद्भुत संगम

राजस्थान अपनी अनोखी विरासत, संस्कृति और धार्मिक आस्था के लिए विश्व प्रसिद्ध है। इसी राजस्थान के हृदय में स्थित है भीलवाड़ा ज़िले का छोटा-सा ऐतिहासिक नगर शाहपुरा (SHAHPURA), जो अपने ऐतिहासिक क़िले, भव्य रामद्वारा मंदिर और समृद्ध लोक कला के लिए जाना जाता है। शाहपुरा की...