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केवला देव घना राष्ट्रीय उद्यान: भारत का विश्व प्रसिद्ध पक्षी स्वर्ग

राजस्थान के भरतपुर ज़िले में स्थित केवला देव घना राष्ट्रीय उद्यान (Keoladeo Ghana National Park), जिसे पहले भरतपुर पक्षी विहार के नाम से जाना जाता था, दुनिया के सबसे समृद्ध पक्षी अभयारण्यों में से एक है। 370 से अधिक पक्षी प्रजातियों का यह घर, हर साल सर्दियों में...

सोरसन वन्यजीव अभयारण्य: राजस्थान की प्रकृति का एक अद्भुत चमत्कार

कोटा से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सोरसन वन्यजीव अभयारण्य (Sorsan Wildlife Sanctuary) प्रकृति प्रेमियों और पक्षी-प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। 41 वर्ग किलोमीटर में फैले इस अभयारण्य को सोरसन घासभूमि (Sorsan Grasslands) के नाम से भी जाना जाता है। यह...

दिग्गी कल्याणजी मंदिर – 5600 वर्षों से आस्था का ध्रुवतारा

राजस्थान के टोंक ज़िले से लगभग 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित दिग्गी कल्याणजी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एक जीवंत इतिहास है – जो आज भी बिना रुके 5600 वर्षों से श्रद्धा और विश्वास की लौ जलाए हुए है। यह मंदिर भगवान विष्णु के अवतार श्री कल्याणजी को समर्पित है...

देवगिरि दुर्ग और ऊटगिर – यदुवंशी इतिहास की दो गाथाएं

राजस्थान के गौरवशाली इतिहास में कई ऐसे गढ़ और किले हैं जो केवल ईंट-पत्थर नहीं, बल्कि अपने भीतर शौर्य, रणनीति और विरासत की कहानियाँ संजोए हुए हैं। इन्हीं में से दो हैं — देवगिरि दुर्ग और ऊटगिर किला, जो आज भी यदुवंशी वंश और करौली राज्य की सैन्य रणनीतियों के साक्षी हैं।...

मीरा बाई, मेड़ता – श्रीकृष्ण भक्ति की अमर कथा का जीवंत स्थल

राजस्थान की पुण्यभूमि पर जन्म लेने वाली भक्त शिरोमणि मीरा बाई न केवल भक्ति आंदोलन की प्रेरणास्रोत रही हैं, बल्कि काव्य, संगीत और आत्मिक भक्ति की प्रतिमूर्ति भी हैं। उनका जीवन आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं और भक्ति रस में डूबे व्यक्तियों के लिए आस्था और समर्पण का आदर्श है।...

कुचामन किला – शान-ए-राजस्थान का स्वर्णिम प्रतीक

राजस्थान के नागौर जिले में स्थित कुचामन किला (Kuchaman Fort) अपनी ऊँचाई, स्थापत्य और ऐतिहासिक विरासत के लिए प्रसिद्ध है। समुद्र तल से लगभग 300 मीटर ऊँचाई पर एक खड़ी चट्टान पर स्थित यह किला 9वीं शताब्दी में राठौड़ वंश के ठाकुर जालिम सिंह द्वारा बनवाया गया था। आज यह...