राजस्थान की धूप से तपती ज़मीन के बीच, एक शांत गाँव आभानेरी (Abhaneri) में बसी है एक विस्मयकारी कारीगरी – चाँद बावड़ी। जयपुर से लगभग 88 किलोमीटर दूर, यह बावड़ी ना केवल भारत की सबसे बड़ी और सबसे गहरी बावड़ियों में से एक है, बल्कि वास्तुकला की दृष्टि से भी एक चमत्कार है।
चाँद बावड़ी का निर्माण किसने कराया?
चाँद बावड़ी का निर्माण 9वीं शताब्दी में राजा चंद ने करवाया था, जो गुर्जर-प्रतिहार वंश के राजा थे। इस वंश की उत्पत्ति स्वयं भगवान राम के छोटे भाई लक्ष्मण से मानी जाती है। उस कालखंड में गुर्जर-प्रतिहार वंश ने राजस्थान के कई हिस्सों पर शासन किया था और उनकी राजधानी मंडोर (वर्तमान जोधपुर के पास) थी। उन्होंने अबहनगरी (जो बाद में अपभ्रंश होकर “आभानेरी” कहलाने लगी) को एक सांस्कृतिक और स्थापत्य केंद्र के रूप में विकसित किया।
चाँद बावड़ी का निर्माण मुख्यतः जल संचयन (Water Harvesting) के उद्देश्य से किया गया था ताकि सूखे और गर्मी के दिनों में भी यहाँ के निवासी पानी की कमी से जूझना न पड़े। राजा चंद का यह योगदान न सिर्फ वास्तुकला में अद्वितीय है, बल्कि यह उनके दूरदर्शी नेतृत्व का भी प्रमाण है।
अद्भुत बनावट और गहराई
चाँद बावड़ी लगभग 64 फीट गहरी है, जिसमें 13 मंज़िलें और 3,500 से भी अधिक संकरी सीढ़ियाँ हैं, जो एक सुव्यवस्थित ज्यामितीय पैटर्न में नीचे की ओर जाती हैं। इसके तीन ओर सीढ़ियाँ हैं और एक ओर एक त्रि-मंज़िला मंडप बना है, जिसमें सुंदर झरोखे, खंभे और मूर्तिकला से सजे स्तम्भ हैं।
इन सीढ़ियों का जाल एक भूलभुलैया जैसा अनुभव देता है और जब सूर्य की किरणें इस पर पड़ती हैं, तो छाया और रोशनी का खेल किसी जादू से कम नहीं लगता।
इतिहास की गहराइयों से झाँकता गौरव
चाँद बावड़ी सिर्फ एक जल संरचना नहीं है, बल्कि यह प्राचीन भारत की जल प्रबंधन प्रणाली का प्रतीक है। राजस्थान जैसे शुष्क क्षेत्र में जहाँ वर्षा बेहद सीमित होती थी, वहाँ पानी संचित करने के लिए इस तरह की बावड़ियाँ बनाई जाती थीं। यह बावड़ी ना केवल जल स्रोत थी, बल्कि सामाजिक मेल-मिलाप का केंद्र भी थी।
यहाँ लोग जल लेने के लिए ही नहीं, पूजा, चर्चा, सामाजिक आयोजनों और विश्राम के लिए भी एकत्रित होते थे।
वास्तुकला की सुंदरता और आध्यात्मिक छाया
चाँद बावड़ी की चौथी दीवार पर स्थित मंडप में तीन मंज़िलें हैं, जिसमें झरोखों और नक्काशीदार खंभों के साथ-साथ सुंदर मूर्तियाँ भी हैं। इनमें कई मूर्तियाँ हिंदू देवी-देवताओं, राधा-कृष्ण, शेरों और हाथियों, और पौराणिक कथाओं पर आधारित हैं।
नीचे उतरते ही तापमान में गिरावट महसूस होती है – एक तरह से यह जगह गर्मी से राहत भी देती है। यहाँ ठहरकर नीचे जल के समीप बैठना एक आत्मिक अनुभव जैसा लगता है, मानो जीवन की भागदौड़ से कुछ क्षणों के लिए दूरी बना ली हो।
चाँद बावड़ी और आभानेरी महोत्सव
हर साल यहाँ आयोजित होने वाला आभानेरी महोत्सव इस क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत करता है। दो दिवसीय इस आयोजन में राजस्थानी लोक संगीत, नृत्य, कठपुतली कला और ऊँट सफारी जैसी गतिविधियाँ शामिल होती हैं। यह त्यौहार पर्यटन को बढ़ावा देता है और स्थानीय लोगों की कला और संस्कृति को एक नया मंच देता है।
आध्यात्मिकता और वास्तुकला का मेल
बावड़ी के पास स्थित हरशत माता मंदिर भी दर्शनीय स्थल है, जो 10वीं शताब्दी में बना एक प्राचीन मंदिर है और माँ की मुस्कान के लिए प्रसिद्ध है। माना जाता है कि यह स्थान कभी एक भव्य मंदिर परिसर का हिस्सा था।
चाँद बावड़ी – एक चलचित्रों की पसंदीदा जगह
यह जगह बॉलीवुड और हॉलीवुड की भी पसंदीदा शूटिंग लोकेशन रही है। मशहूर फिल्में जैसे ‘द डार्क नाइट राइज़ेज’ और ‘बेस्ट एक्सोटिक मैरीगोल्ड होटल’ की शूटिंग यहाँ हो चुकी है। लेकिन जितना सुंदर यह स्क्रीन पर लगता है, उससे कहीं ज़्यादा इसकी भव्यता को आप स्वयं अनुभव कर सकते हैं।
एक स्मृति जो साथ चलती है
चाँद बावड़ी न केवल फोटोजेनिक है, बल्कि यह एक संवेदनात्मक अनुभव है। जब आप इसकी संकरी सीढ़ियों से नीचे उतरते हैं, तो समय जैसे थम जाता है। नीचे की ठंडी हवा और शांत वातावरण मन को शांति प्रदान करता है। यह एक ऐसा स्थान है जहाँ इतिहास, स्थापत्य और आध्यात्मिकता एक साथ मिलती हैं।