राजस्थान के ऐतिहासिक शहर बूंदी की शान “छत्र महल” अपने आप में कला और इतिहास का अनूठा संगम है। बूंदी के Garh Palace के परिसर में स्थित यह महल अपने मनमोहक भित्ति चित्रों और आकर्षक स्थापत्य के लिए प्रसिद्ध है। “छत्र” का अर्थ है चित्र, और इस महल की दीवारों पर उकेरे गए सुंदर चित्रों के कारण इसे यह नाम मिला।
कला का अद्भुत खज़ाना
18वीं सदी में बूंदी मिनिएचर चित्रकला का महत्वपूर्ण केंद्र था। उस समय यहाँ के राजा-रानी और अभिजात वर्ग ने कला को खूब प्रोत्साहन दिया, जिससे छत्र महल एक जीवंत कला गैलरी बन गया। इन चित्रों में देवी-देवताओं, युद्ध के दृश्यों, हाथियों, राधा-कृष्ण की प्रेमलीला जैसे कई सुंदर विषयों को अत्यंत बारीकी और कुशलता के साथ उकेरा गया है। इन चित्रों की महीन कलाकारी देखकर दर्शक आश्चर्यचकित रह जाते हैं।
वास्तुकला की भव्यता
छत्र महल का निर्माण दो चरणों में पूरा हुआ था। महारावल गोपीनाथ ने पहली मंजिल और बरामदा बनवाया था, जबकि शेष भाग 1609 से 1657 ई. के बीच महारावल पुंजराज ने पूर्ण करवाया। महल का निर्माण दावड़ा पत्थर से हुआ है, जो राजस्थानी वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना है। महल के मुख्य हिस्सों में तीन भव्य मेहराबें हैं, जिन पर कमल के सुंदर डिज़ाइन बने हुए हैं।
चित्रशाला का ऐतिहासिक महत्व
महल में बनी ‘चित्रशाला‘ बूंदी शैली की चित्रकारी का एक प्रमुख स्थल है। इसे राजा उम्मेद सिंह के आदेश पर बनवाया गया था। महल के आंतरिक हिस्से में स्थित इस चित्रशाला में सूरज की रोशनी और नमी का कोई प्रभाव नहीं पड़ा, जिससे यहाँ की पेंटिंग आज भी अपनी मूल चमक के साथ मौजूद हैं। चित्रशाला में लगभग 36 रागमाला चित्र मौजूद हैं, जिनसे भारतीय संगीत और संस्कृति की गहराई का पता चलता है।
राजसी जीवन की झलक
महल के भित्ति चित्रों में बूंदी के तत्कालीन शाही जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाया गया है। शिकार, दरबारी समारोह, धार्मिक अनुष्ठान और संगीत-नृत्य जैसे अनेक मनोरंजक दृश्यों को देखने से पर्यटकों को तत्कालीन समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अनुभव होता है।
महल का प्राकृतिक सौंदर्य
छत्र महल का निर्माण इस प्रकार किया गया था कि प्राकृतिक प्रकाश और हवा का आगमन सदैव बना रहता है। इसकी खिड़कियाँ, झरोखे और बालकनियाँ, जिन्हें “हवा महल” भी कहा जाता है, महल को सुखद और आरामदायक बनाती हैं। महल के बाहर की ओर से बूंदी के ऐतिहासिक शहर, तारागढ़ किले और आसपास की हरी-भरी पहाड़ियों के मनोरम दृश्य दिखाई देते हैं।
छत्र महल के आसपास के दर्शनीय स्थल
छत्र महल के भ्रमण के बाद आप बूंदी के अन्य प्रसिद्ध स्थलों जैसे तारागढ़ किला, रानीजी की बावड़ी, सुख महल, नवल सागर झील और 84 खंभों की छतरी का आनंद ले सकते हैं। यह सभी स्थल बूंदी के गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक विरासत की अद्भुत कहानी कहते हैं।
यात्रा की योजना बनाएं
छत्र महल घूमने के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे उपयुक्त होता है। इस दौरान यहाँ का मौसम बेहद सुहावना रहता है। महल की सैर के लिए एक गाइड की सेवाएँ लेना बेहतर होता है, जो आपको यहाँ की कहानियों और इतिहास के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान कर सकता है।
बूंदी का छत्र महल केवल एक पर्यटन स्थल ही नहीं बल्कि इतिहास, कला और संस्कृति का जीवंत संग्रहालय है, जो आपको राजस्थान के राजसी वैभव की एक यादगार यात्रा पर ले जाता है।