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जयपुर से कुछ किलोमीटर दूर अरावली की निम्न पहाड़ियों के बीच स्थित गलता जी एक अत्यंत प्राचीन और पवित्र तीर्थस्थल है। यहाँ प्राकृतिक झरने, पवित्र कुण्ड, सुंदर मंदिर, राजस्थानी स्थापत्य और शांत वातावरण मिलकर एक दिव्य अनुभूति का निर्माण करते हैं।

यहाँ का प्राकृतिक सौंदर्य, हरी-भरी घाटी, और चहकते-बोलते बंदरों का समूह इस स्थान को और अधिक जीवंत बना देता है।

इतिहास और पौराणिक मान्यता

गलता जी को एक प्राचीन तपोस्थल माना जाता है। मान्यता है कि यहाँ अनेक संतों और ऋषियों ने वर्षों तक कठोर तपस्या की।

पुराणों के अनुसार—
👉 यहाँ भगवान राम, हनुमान और सूर्य देव की विशेष उपासना होती थी।
👉 यह स्थान जल से समृद्ध रहा है; कहा जाता है कि प्राकृतिक झरने कभी सूखते नहीं थे।

समय बीतने के साथ यहाँ कई मंदिर, चबूतरे और घाटों का निर्माण हुआ, जिससे यह राजस्थान के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में शामिल हो गया।

गलता जी मंदिर समूह – प्रमुख आकर्षण

गलता जी एक अकेला मंदिर नहीं, बल्कि एक विशाल मंदिर-समूह (Temple Complex) है जहाँ कई प्राचीन भवन, घाट और कुण्ड स्थित हैं।

1. रामगोपालजी मंदिर (गालवर बाग)

स्थानीय लोग इसे “बंदर मंदिर” के नाम से जानते हैं, क्योंकि यहाँ बड़ी संख्या में बंदर रहते हैं।

  • यह गलता जी का सबसे प्रसिद्ध भाग है।
  • यहाँ के बंदर मनुष्यों के साथ सहज रहते हैं।
  • कई फिल्मों और डॉक्यूमेंटरी में यह स्थल दर्शाया जा चुका है।

2. पवित्र कुण्ड (जलाशय)

गलता जी के पवित्र कुण्ड इसके मुख्य आकर्षण हैं। यहाँ कई प्राकृतिक जलस्त्रोत हैं, जिनका पानी पहाड़ियों से धीरे-धीरे बहकर कुण्डों में आता है।

मुख्य कुण्ड:

  • गलता कुण्ड
  • गालव कुण्ड
  • अन्य छोटे-बड़े पवित्र कुंड

मान्यता है कि यहाँ स्नान करने से मनुष्य के पाप धुल जाते हैं।

3. सूर्य मंदिर – पहाड़ी की चोटी पर स्थित दिव्य धाम

गलता जी की ऊँची पहाड़ी पर स्थित सूर्य मंदिर (Surya Mandir) अत्यंत प्रसिद्ध है।

  • इसका निर्माण दीवान कृपाराम ने कराया था।
  • यह मंदिर जयपुर शहर के लगभग हर भाग से दिखाई देता है।
  • सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यहाँ से दिखाई देने वाला दृश्य अद्भुत होता है।

यह स्थान फोटोग्राफरों के लिए स्वर्ग समान है।

4. हनुमान मंदिर, ब्रह्म मंदिर और अन्य प्राचीन धरोहरें

गलता जी परिसर में कई अन्य मंदिर भी स्थित हैं:

  • हनुमान मंदिर
  • ब्रह्म मंदिर
  • संत गालव जी की समाधि
  • प्राचीन आश्रम और भवन

इन सभी में पुरानी राजस्थानी वास्तुकला और पवित्रता की अनुभूति मिलती है।

गलता जी के बंदर – इस जगह की अनोखी पहचान

यह स्थान बंदरों के कारण विशेष रूप से जाना जाता है।
उनकी विशेषताएँ:

  • आपस में खेलते और कूदते हुए नजर आते हैं।
  • पर्यटकों से डरते नहीं, बल्कि काफी मिलनसार होते हैं।
  • विदेशी पर्यटक इन्हें देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।

बंदरों की चहचहाहट और हरकतें इस पवित्र जगह को एक अलग ही ऊर्जा देती हैं।

प्राकृतिक सौंदर्य – घाटी, झरने और शांत वातावरण

गलता जी का प्राकृतिक वातावरण किसी चित्रित दृश्य जैसा लगता है:

  • पहाड़ियों के बीच हरियाली
  • शांत घाटियाँ
  • प्राकृतिक झरने
  • वास्तुकला से सज्जित प्राचीन भवन

यहाँ कई यात्री सुबह-सुबह ट्रेकिंग के लिए भी आते हैं।

कैसे पहुँचे?

  • जयपुर रेलवे स्टेशन से दूरी: लगभग 10–12 किलोमीटर
  • बस स्टैंड से दूरी: लगभग 9 किलोमीटर
  • टैक्सी, ऑटो और बाइक आसानी से उपलब्ध
  • अंतिम कुछ दूरी पैदल चढ़ाई के रूप में भी तय करनी पड़ती है, जो अनुभव को और सुंदर बनाती है

घूमने का समय

  • प्रातः 5 बजे से शाम 7 बजे तक
  • सूर्योदय और सूर्यास्त का समय भ्रमण के लिए सबसे बेहतर

यात्रा सुझाव

  • बंदरों को अधिक भोजन न दें
  • पानी और हल्का सामान साथ रखें
  • सूर्य मंदिर तक जाने का ट्रेक शानदार है
  • कुण्डों के पास शांति बनाए रखें