भारत के ऐतिहासिक नगरों में राजस्थान की बूंदी का अपना विशिष्ट स्थान है। यहां की भव्य विरासतों में गढ़ पैलेस एक ऐसी ऐतिहासिक धरोहर है, जो राजपूताना वैभव, अद्भुत कला और आकर्षक वास्तुशैली का जीवंत उदाहरण है। तीन शताब्दियों के दौरान निर्मित यह महल आज भी पर्यटकों को आकर्षित करता है।
गढ़ पैलेस का गौरवपूर्ण इतिहास
गढ़ पैलेस का निर्माण 17वीं सदी में राव राजा रतन सिंह हाड़ा ने शुरू करवाया था। इसके बाद कई राजाओं ने इसमें विस्तार और सुधार किया। इस महल के परिसर में कई छोटे-बड़े महल हैं, जिनमें प्रत्येक की वास्तुकला और सजावट अलग-अलग राजाओं के समय की गाथा सुनाती है। यह महल राजस्थान के सबसे बड़े महलों में गिना जाता है, लेकिन फिर भी अपेक्षाकृत कम प्रसिद्ध है।
विशिष्ट वास्तुकला और आकर्षक नक्काशी
गढ़ पैलेस की वास्तुकला मुख्य रूप से राजपूत शैली की है, जिसमें झरोखे, स्तंभ और गुम्बद प्रमुखता से दिखते हैं। महल के स्तंभों पर हाथियों की बारीक और जीवंत नक्काशी विशेष रूप से दर्शनीय है। इस महल में मुगल और विक्टोरियन वास्तुशैली की भी झलक मिलती है। महल के विभिन्न हिस्सों में फूल महल, बादल महल और छत्र महल प्रमुख हैं।
विशेष आकर्षण – चित्रशाला
गढ़ पैलेस की सबसे खास जगहों में चित्रशाला प्रमुख है। इसे अपनी लघु चित्रकारी के लिए वैश्विक स्तर पर पहचान मिली हुई है। चित्रशाला की दीवारों पर बुंदी शैली की चित्रकारी देखने लायक है, जिसमें धार्मिक कथाओं, राजसी जीवन और प्राकृतिक दृश्यों को बखूबी उकेरा गया है। इन चित्रों के जीवंत रंग और सूक्ष्म विवरण दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं।
भव्य प्रवेश द्वार – हाथी पोल
महल के प्रवेश द्वारों में हाथी पोल सबसे प्रसिद्ध और आकर्षक है। इस विशाल द्वार पर दो बड़े हाथी बने हुए हैं, जो अपने भव्य स्वरूप से आगंतुकों का स्वागत करते हैं। द्वार की भव्यता राजपूताना युग की शौर्य गाथाओं की याद दिलाती है।
महल के भीतर की संरचनाएं और सभागार
महल परिसर के भीतर कई सभागार हैं, जिनमें दरबार हॉल, फूल महल और रंग विलास प्रमुख हैं। दरबार हॉल में भव्य स्तंभ, विस्तृत झरोखे और अत्यंत सुंदर नक्काशी वाली छतें हैं। रंग विलास में रंगीन चित्रकारी और कांच की कलात्मक सजावट पर्यटकों को खूब आकर्षित करती है।
गढ़ पैलेस से जुड़ी रोचक कथाएं
ऐसा कहा जाता है कि बूंदी का गढ़ पैलेस तारागढ़ किले से एक गुप्त सुरंग के माध्यम से जुड़ा हुआ था। आपातकालीन स्थितियों में राजपरिवार इस सुरंग का प्रयोग करता था। महल की इन गुप्त सुरंगों की कहानियां आज भी रहस्य और रोमांच की भावना पैदा करती हैं।
नोबेल पुरस्कार विजेता लेखक रुडयार्ड किपलिंग भी इस महल की भव्यता देखकर मंत्रमुग्ध हुए थे। उन्होंने अपने प्रसिद्ध उपन्यास “किम” के कुछ हिस्से बूंदी में ही लिखे थे। किपलिंग ने इस महल को ‘गॉब्लिन का कार्य‘ बताया था, जिससे इसकी अद्भुत वास्तुकला की विशेषता स्पष्ट होती है।
महल भ्रमण की जानकारी
गढ़ पैलेस सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक पर्यटकों के लिए खुला रहता है। प्रवेश के लिए एक मामूली शुल्क लिया जाता है। यहां अनुभवी गाइड की व्यवस्था भी उपलब्ध है, जो महल की समृद्ध इतिहास और कहानियों को रोचक तरीके से प्रस्तुत करते हैं।
आसपास के दर्शनीय स्थल
गढ़ पैलेस के भ्रमण के बाद पर्यटक पास ही स्थित तारागढ़ किला, नवल सागर झील और सुख महल जैसे स्थलों का आनंद भी ले सकते हैं। ये स्थल भी अपनी अनूठी सुंदरता और ऐतिहासिक महत्व के लिए विख्यात हैं।
बूंदी के गढ़ पैलेस का भ्रमण एक अविस्मरणीय अनुभव है, जो इतिहास प्रेमियों, कला के प्रशंसकों और वास्तुकला के जानकारों सभी के लिए खास है। इस महल में प्रवेश करते ही आप इतिहास के एक ऐसे कालखंड में पहुंच जाएंगे, जो अपने भव्य वैभव और राजसी अंदाज़ के लिए जाना जाता है।