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राजस्थान के भरतपुर ज़िले में स्थित केवला देव घना राष्ट्रीय उद्यान (Keoladeo Ghana National Park), जिसे पहले भरतपुर पक्षी विहार के नाम से जाना जाता था, दुनिया के सबसे समृद्ध पक्षी अभयारण्यों में से एक है। 370 से अधिक पक्षी प्रजातियों का यह घर, हर साल सर्दियों में हज़ारों प्रवासी पक्षियों से गुलज़ार हो जाता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और उद्गम

इस अभयारण्य की नींव 18वीं शताब्दी के मध्य में रखी गई थी जब यहाँ एक छोटा सा जलाशय बनाया गया था। यह जलाशय भरतपुर शहर से लगभग 5 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित है। जब अजन बंध (Ajan Bund) का निर्माण किया गया, तो उसके जलभराव ने इस प्राकृतिक निम्न क्षेत्र को एक विशाल दलदली क्षेत्र में बदल दिया—जिसने पक्षियों के लिए आदर्श निवास स्थान तैयार कर दिया।

1850 के दशक में, इसे भरतपुर के महाराजाओं और ब्रिटिश अधिकारियों के लिए राजसी शिकार स्थल के रूप में विकसित किया गया। एक ऐतिहासिक घटना के अनुसार, 1936 से 1943 तक भारत के वायसराय रहे लॉर्ड लिनलिथगो ने एक ही दिन में अपने साथियों के साथ हज़ारों बत्तखों का शिकार किया था।

राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा और विश्व धरोहर में सम्मिलन

  • 1982 में इस क्षेत्र को राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया।
  • 1985 में, इसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल (UNESCO World Heritage Site) का दर्जा मिला।

इस संरक्षित क्षेत्र की पहचान में भारतीय पक्षी विज्ञानी डॉ. सलीम अली की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिनके प्रयासों से इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त हुई।

जैव विविधता और अद्भुत पक्षी जीवन

केवला देव उद्यान विशेष रूप से अपने प्रवासी पक्षियों के लिए प्रसिद्ध है। हर साल शीत ऋतु में, यहाँ कई दूर देशों से पक्षी आते हैं, जिनमें प्रमुख हैं:

  • ग्रीन सैंडपाइपर
  • डैमोइज़ेल क्रेन
  • साइबेरियन क्रेन – जो अब दुर्लभ हो गई है पर एक समय यहाँ बड़ी संख्या में आती थी।
  • पेंटेड स्टॉर्क, किंगफिशर, ईगरेट्स, आईबिस, सरस क्रेन और ओपनबिल्ड स्टॉर्क्स

यहाँ केवल पक्षी ही नहीं, अन्य वन्य जीव भी देखे जा सकते हैं जैसे:

  • नीलगाय
  • चितल (स्पॉटेड डियर)
  • सांभर
  • सांपों की प्रजातियाँ, विशेषतः पाइथन

यात्रा का अनुभव और गाइड सुविधा

केवला देव पार्क में विशेष रूप से बनाए गए प्रवेश मार्ग (trekking paths) हैं जिन्हें पैदल, साइकिल या रिक्शा के माध्यम से कवर किया जा सकता है। यहाँ के रिक्शा चालक प्रशिक्षित पक्षी गाइड हैं जो आपको पक्षियों की पहचान और उनकी आदतों की जानकारी देंगे। यह एक अनूठा अनुभव होता है जहाँ आप शांत वातावरण में पक्षियों की चहचहाहट के बीच प्रकृति से साक्षात्कार करते हैं।

कैसे पहुँचे केवला देव राष्ट्रीय उद्यान

  • निकटतम हवाई अड्डा: आगरा एयरपोर्ट – भरतपुर से लगभग 56 किलोमीटर।
  • रेल मार्ग: भरतपुर रेलवे स्टेशन – पार्क से लगभग 5 किलोमीटर दूर। यह दिल्ली, मुंबई, जयपुर और आगरा जैसे शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
  • सड़क मार्ग: दिल्ली से दूरी – 184 किमी। राज्य परिवहन की बसें और निजी टैक्सी सेवा भी उपलब्ध है।

निष्कर्ष

केवला देव घना राष्ट्रीय उद्यान केवल एक पक्षी अभयारण्य नहीं है, यह प्रकृति प्रेमियों, फोटोग्राफरों, पर्यावरणविदों और शांति की तलाश करने वालों के लिए एक अद्वितीय स्थल है। यहाँ की हरियाली, शांत जल, आकाश को चीरते प्रवासी पक्षी और समय को थाम लेने वाला वातावरण इसे एक जीवंत संग्रहालय बनाते हैं।

यदि आप कभी राजस्थान की यात्रा करें, तो भरतपुर के इस प्राकृतिक रत्न को अपनी सूची में अवश्य शामिल करें। केवला देव आपको पक्षियों की दुनिया में एक अविस्मरणीय यात्रा का अनुभव प्रदान करेगा।