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राजस्थान का नाम आते ही हमारी आँखों के सामने रेतीले टीले, भव्य महल और राजसी किले आते हैं। लेकिन राजस्थान केवल इतना ही नहीं है, यहाँ कई ऐसे धार्मिक स्थल भी हैं जो न सिर्फ इतिहास के पन्नों में अमर हैं बल्कि आध्यात्मिक शांति भी प्रदान करते हैं। ऐसा ही एक स्थान है बीकानेर से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पवित्र नगरी ‘कोलायत’।

शांत और निर्मल कोलायत झील

कोलायत मुख्यतः अपनी पवित्र झील के लिए प्रसिद्ध है। यह झील एक कृत्रिम जलाशय है जो आध्यात्मिक शांति का प्रतीक माना जाता है। झील के आसपास लगभग 52 घाट हैं जहाँ श्रद्धालु स्नान कर अपने पापों का प्रायश्चित करते हैं। कार्तिक पूर्णिमा के दिन यहाँ स्नान का विशेष महत्व माना जाता है। झील के किनारे लगे पीपल के पेड़ वातावरण को अत्यंत शांत और निर्मल बनाते हैं, जिससे मन को अपार शांति मिलती है।

ऋषि कपिल मुनि की तपोभूमि

कोलायत का नामकरण महान ऋषि कपिल मुनि के नाम पर हुआ है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, कपिल मुनि भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं। माना जाता है कि एक बार कपिल मुनि बीकानेर से गुजरते हुए यहाँ पहुँचे। यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक ऊर्जा से प्रभावित होकर उन्होंने इसी स्थान को अपनी तपस्या भूमि बनाया। उनका उद्देश्य मानव कल्याण के लिए तपस्या करना था। आज भी यहाँ कपिल मुनि का मंदिर स्थित है, जो श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र है।

कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाला भव्य मेला

कोलायत में हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर भव्य मेला लगता है, जिसे ‘कपिल मुनि मेला’ या ‘कोलायत मेला’ के नाम से जाना जाता है। इस मेले में देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु आते हैं। मेले के दौरान स्थानीय सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, लोक संगीत, नृत्य तथा विभिन्न हस्तशिल्प की वस्तुओं का प्रदर्शन किया जाता है। दीपदान की परंपरा इस मेले का खास आकर्षण है, जिसमें श्रद्धालु शाम को झील में दीप प्रज्वलित करके पानी में प्रवाहित करते हैं। झील में तैरते दीपों की छटा देखकर मन आनंदित हो उठता है।

वास्तुकला का अद्भुत संगम

कोलायत झील के किनारे कई खूबसूरत मंदिर बने हुए हैं। यहाँ का प्रमुख मंदिर ऋषि कपिल मुनि को समर्पित है। संगमरमर और बलुआ पत्थर से निर्मित ये मंदिर अपनी वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध हैं। इन मंदिरों में की गई नक्काशी और कलात्मक सजावट राजस्थान की प्राचीन स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण हैं। मंदिर परिसर की सुंदरता और भव्यता श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर देती है।

प्राकृतिक सौंदर्य और जैव विविधता

कोलायत झील न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। सर्दियों के मौसम में यहाँ विभिन्न प्रकार के प्रवासी पक्षी आकर अपना बसेरा बनाते हैं। पक्षी प्रेमियों और फोटोग्राफरों के लिए यह स्थान स्वर्ग के समान है। झील के आसपास की हरियाली, पक्षियों की चहचहाहट और ठंडी हवा का झोंका आपको प्रकृति के निकट ले जाता है।

निकटवर्ती दर्शनीय स्थल

कोलायत की यात्रा करते हुए आप आसपास के प्रसिद्ध दर्शनीय स्थलों की भी सैर कर सकते हैं। यहाँ से निकट ही बीकानेर का मशहूर ‘करणी माता मंदिर‘, ऐतिहासिक ‘जूनागढ़ किला‘, भव्य ‘लालगढ़ पैलेस‘, और ‘राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र’ (Camel Research Centre) जैसे स्थान आसानी से पहुँचे जा सकते हैं। इसके अलावा ‘रामदेवरा मंदिर’ तथा ‘लक्ष्मीनाथ मंदिर’ जैसे धार्मिक स्थलों का भी भ्रमण किया जा सकता है।

कैसे पहुँचे कोलायत?

कोलायत बीकानेर से सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है। बीकानेर रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड से नियमित बसें और टैक्सियाँ उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट जोधपुर है, जहाँ से सड़क मार्ग से कोलायत तक पहुँचने में लगभग तीन घंटे लगते हैं।

कोलायत राजस्थान के हृदय में स्थित ऐसा तीर्थ स्थल है जहाँ आकर आप आध्यात्मिक शांति और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम अनुभव कर सकते हैं। यहाँ आकर आपको न केवल धार्मिक अनुभूति होगी बल्कि आप राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत से भी परिचित होंगे। तो अगली बार राजस्थान आएं, तो कोलायत जरूर पधारें।