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राजस्थान की समृद्ध विरासत अपने गौरवशाली इतिहास, अनूठी स्थापत्य कला और सांस्कृतिक परंपराओं के लिए विश्व प्रसिद्ध है। इसी विरासत का एक नायाब नमूना है भीलवाड़ा ज़िले का ऐतिहासिक कस्बा मांडल। भीलवाड़ा से महज 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मांडल, पर्यटकों के लिए ऐतिहासिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व का एक महत्वपूर्ण केंद्र है।


मांडल: परिचय और इतिहास की झलक

मांडल एक प्राचीन और ऐतिहासिक स्थान है, जो न केवल राजस्थान की परंपरागत वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है बल्कि अपने अतीत में कई राजपूत राजाओं और वीर योद्धाओं से भी जुड़ा हुआ है। मंडल को विशेष प्रसिद्धि जगन्नाथ कच्छवाहा की छतरी (बत्तीस खम्भों की छतरी) के कारण मिली है। यह छतरी मंडल के गौरवशाली इतिहास का साक्षी है।

संगमरमर से निर्मित 32 खंभों की छतरी का इतिहास अत्यंत गौरवपूर्ण और समृद्ध है। जिला मुख्यालय से लगभग 14 किलोमीटर दूर दक्षिण-पश्चिम दिशा में, मेजा रोड पर स्थित यह छतरी क्षेत्र की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहरों में से एक है। इसका निर्माण मुगल काल में अजमेर के राजा भारमल के दूसरे पुत्र जगन्नाथ कछवाहा के शासनकाल में किया गया था।

ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, सन् 1608 ईस्वी में इस स्थान पर आराम कर रही मुगल सेना पर मेवाड़ की सेना ने अचानक आक्रमण कर विजय प्राप्त की थी। इस युद्ध में जगन्नाथ कछवाहा, नारायणदास राव खंगार समेत अनेक वीर योद्धा वीरगति को प्राप्त हुए। उन्हीं वीरों की स्मृति में इस छतरी का निर्माण करवाया गया था। हिंदू शैली में बनी इस छतरी में मुगल स्थापत्य कला का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। 12 नवंबर 1613 को इस स्मारक के भीतर सिद्धेश्वर महादेव की स्थापना की गई।


बत्तीस खम्भों की छतरी: मांडल की शान

बत्तीस खम्भों की छतरी मांडल का सबसे आकर्षक और प्रतिष्ठित ऐतिहासिक स्मारक है। यह छतरी जगन्नाथ कच्छवाहा के सम्मान में बनाई गई थी, जो एक बहादुर योद्धा और क्षेत्र के सम्मानित राजपूत सामंत थे। इसका निर्माण राजस्थानी स्थापत्य शैली में किया गया है, जिसमें कुल 32 भव्य स्तंभ (खम्भे) लगे हुए हैं, इसलिए इसे बत्तीस खम्भों की छतरी कहा जाता है।

स्थापत्य कला एवं शिल्पकारी:

  • इस छतरी का निर्माण रेत के पत्थर (सैंडस्टोन) से हुआ है।
  • स्तंभों के आधार और ऊपरी हिस्सों पर खूबसूरत नक्काशी की गई है जो राजस्थानी कला की उत्कृष्टता दर्शाती है।
  • छतरी के बीच में एक विशाल शिवलिंग स्थापित है, जो इस स्मारक को धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाता है।

छतरी के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व

इस छतरी का निर्माण राजपूत वीरता और शौर्य को सम्मान देने के लिए किया गया था। स्थानीय लोगों के बीच मान्यता है कि यहाँ स्थापित शिवलिंग के दर्शन मात्र से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इसीलिए छतरी केवल ऐतिहासिक स्थल ही नहीं, अपितु एक प्रमुख धार्मिक स्थल भी बन चुकी है।

मांडल में यह छतरी एक सांस्कृतिक धरोहर के रूप में स्थापित हो चुकी है, जो स्थानीय उत्सवों और त्योहारों के दौरान आकर्षण का केंद्र बनती है।


मांडल की प्राकृतिक छटा और परिवेश

छतरी के आसपास का क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है। मांडल कस्बा ग्रामीण परिवेश और शांत वातावरण का अनुभव कराता है। छतरी के आसपास के बगीचे, पेड़-पौधे और ग्रामीण परिदृश्य मिलकर इस स्थान को पिकनिक और फोटोग्राफी के लिए आदर्श बनाते हैं।


मांडल भ्रमण के दौरान क्या करें?

मांडल आने वाले पर्यटक इन गतिविधियों का आनंद ले सकते हैं:

  • फोटोग्राफी: ऐतिहासिक स्तंभों, नक्काशी, प्राकृतिक नजारों की फोटो खींचना।
  • आध्यात्मिक यात्रा: शिवलिंग के दर्शन और पूजन करना।
  • स्थानीय संस्कृति: ग्रामीण राजस्थान की जीवनशैली और परंपराओं को करीब से जानना।

मांडल के आसपास के अन्य आकर्षण स्थल:

यदि आप मंडल की यात्रा कर रहे हैं, तो आप भीलवाड़ा और इसके आसपास स्थित निम्नलिखित पर्यटक स्थलों का भी भ्रमण कर सकते हैं:

  • बदनोर किला: ऐतिहासिक महत्व और राजपूती वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण।
  • हरनी महादेव मंदिर: शिव का प्रसिद्ध प्राचीन मंदिर।
  • मेवाड़ की प्रसिद्ध टेक्सटाइल मिलें: स्थानीय हस्तशिल्प, कपड़ों और कलाकृतियों की खरीदारी।

मांडल कैसे पहुँचें?

  • निकटतम शहर: भीलवाड़ा (16 किलोमीटर)
  • निकटतम रेलवे स्टेशन: भीलवाड़ा रेलवे स्टेशन
  • सड़क मार्ग: भीलवाड़ा से मंडल तक स्थानीय टैक्सी, ऑटो या राजस्थान राज्य परिवहन की बसों से आसानी से पहुँचा जा सकता है।

मांडल घूमने का सर्वोत्तम समय

  • सर्दियाँ (अक्टूबर-मार्च): मौसम सुहावना और भ्रमण के लिए उपयुक्त होता है।
  • मानसून (जुलाई-सितंबर): बारिश के बाद क्षेत्र का प्राकृतिक सौंदर्य अपने चरम पर होता है।

निष्कर्ष

मांडल (भीलवाड़ा) केवल एक कस्बा या ऐतिहासिक स्थल नहीं है, बल्कि यह इतिहास, आध्यात्मिकता, संस्कृति और प्रकृति का एक अद्भुत संगम है। चाहे आप इतिहास प्रेमी हों, धार्मिक आस्था रखते हों या प्रकृति के बीच कुछ पल बिताना चाहते हों, मांडल आपकी हर इच्छा पूरी करेगा। तो आइए, राजस्थान की इस छोटी-सी लेकिन महत्वपूर्ण जगह को अपनी यात्रा सूची में जोड़िए और एक यादगार अनुभव साथ लेकर लौटें।

आपकी यात्रा शुभ एवं मंगलमय हो!