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बीकानेर शहर से महज 8 किलोमीटर दूर स्थित राष्ट्रीय ऊंट अनुसंधान केंद्र, एशिया का एकमात्र ऐसा केंद्र है जो ऊंटों की अनुसंधान और प्रजनन को समर्पित है। भारत सरकार द्वारा संचालित यह केंद्र लगभग 2000 एकड़ के अर्द्ध-शुष्क भूमि पर फैला हुआ है। 1984 में स्थापित यह संस्थान न केवल राजस्थान के ऊंटों के संरक्षण का काम करता है, बल्कि ऊंटों से जुड़ी विभिन्न अनुसंधान परियोजनाओं को भी अंजाम देता है।

ऊंट: राजस्थान की जीवन रेखा

राजस्थान में ऊंट सदियों से स्थानीय निवासियों के जीवन का अहम हिस्सा रहे हैं। ये ऊंट राजस्थान की मरूभूमि में यात्रियों और सामान ढोने के प्रमुख साधन रहे हैं। ऊंट दूध, परिवहन, खेती और यहां तक कि सेना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। राष्ट्रीय ऊंट अनुसंधान केंद्र का उद्देश्य ऊंटों की नस्ल सुधार, स्वास्थ्य देखभाल और पोषण में नवीनतम तकनीकों का विकास करना है ताकि इन बहुमूल्य पशुओं का भविष्य सुरक्षित हो सके।

ऊंट अनुसंधान केंद्र की यात्रा

यह केंद्र पर्यटकों और शोधकर्ताओं दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र है। यहां आने वाले पर्यटक ऊंट की सवारी कर सकते हैं और कैमल सफारी का आनंद भी उठा सकते हैं। केंद्र में ऊंटों के लिए विशेष सेल्फी पॉइंट भी बनाए गए हैं, जो पर्यटकों के बीच बहुत लोकप्रिय हैं। साथ ही, यहां ऊंट के दूध से बने उत्पाद जैसे फ्लेवर्ड दूध, ऊंट के दूध की कॉफी, कुल्फी, और चीज़ जैसे स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद भी लिया जा सकता है।

ऊंटों से जुड़ी सांस्कृतिक गतिविधियां

केंद्र में ऊंटों द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले कई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों में ऊंटों की दौड़, नृत्य और विभिन्न पारंपरिक कलाएं शामिल होती हैं। ये प्रदर्शन ऊंटों की बुद्धिमत्ता और प्रशिक्षकों के साथ उनके गहरे रिश्ते को दर्शाते हैं। यहां आने वाले पर्यटक इन मनोरंजक गतिविधियों को देखकर राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अनुभव कर सकते हैं।

स्थानीय समुदाय की सहभागिता

राष्ट्रीय ऊंट अनुसंधान केंद्र का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य स्थानीय समुदाय के साथ जुड़कर ऊंट पालन की परंपरागत विधियों को प्रोत्साहित करना भी है। यह केंद्र नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रमों और जागरूकता अभियानों का आयोजन करता है, जिससे स्थानीय ऊंट पालकों को ऊंट प्रबंधन की आधुनिक विधियों से परिचित कराया जाता है। इस पहल से स्थानीय समुदाय को रोजगार के नए अवसर भी प्राप्त होते हैं।

ऊंट आधारित हस्तशिल्प और खरीदारी

पर्यटक केंद्र में बने स्मारिका स्टोर से राजस्थान के ऊंट आधारित उत्पादों को खरीद सकते हैं। यहां स्थानीय कारीगरों द्वारा बनाए गए हस्तशिल्प, वस्त्र, ऊंट की तस्वीरें, और सजावटी वस्तुएं उपलब्ध हैं। ये उत्पाद न केवल ऊंट की थीम पर आधारित होते हैं, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देते हैं।

आसपास के आकर्षण

राष्ट्रीय ऊंट अनुसंधान केंद्र के आस-पास कई अन्य आकर्षण भी मौजूद हैं। इनमें भव्य जूनागढ़ किला प्रमुख है, जो राजपूत और मुगल स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण है। पर्यटक यहां के सुंदर महल, मंदिर और संग्रहालयों को देखकर बीकानेर के इतिहास से रूबरू हो सकते हैं। साथ ही, पास स्थित गजनेर वन्यजीव अभयारण्य भी प्रकृति प्रेमियों के लिए एक अनूठा आकर्षण है।

बीकानेर का स्वाद

बीकानेर शहर अपनी विशिष्ट खान-पान के लिए भी प्रसिद्ध है। पर्यटक यहां के लोकप्रिय व्यंजनों जैसे बीकानेरी भुजिया, कचौड़ी, रसगुल्ला और पारंपरिक राजस्थानी थाली का स्वाद भी ले सकते हैं। ये स्थानीय पकवान शहर के बाजारों और रेस्तरां में आसानी से उपलब्ध हैं और पर्यटकों के लिए एक यादगार अनुभव साबित होते हैं।

कुल मिलाकर, राष्ट्रीय ऊंट अनुसंधान केंद्र एक ऐसा स्थान है जो राजस्थान की सांस्कृतिक और वैज्ञानिक विरासत को दर्शाता है। यहां की यात्रा पर्यटकों को ऊंटों के अनूठे संसार में ले जाती है और स्थानीय संस्कृति, इतिहास और स्वाद का एक संपूर्ण अनुभव प्रदान करती है।