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राजस्थान के अरावली पर्वत श्रृंखला के घने जंगलों के बीच स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर एक अद्वितीय धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहर है। यह प्राचीन मंदिर सरिस्का टाइगर रिज़र्व के बफर ज़ोन में, अलवर जिले के राजगढ़ क्षेत्र में स्थित है। कठिन पहाड़ी रास्तों, घुमावदार पगडंडियों और गहरे जंगलों के बीच स्थित यह मंदिर श्रद्धालुओं और इतिहास प्रेमियों के लिए एक रोमांचक यात्रा का अनुभव प्रदान करता है।

नीलकंठ महादेव मंदिर का ऐतिहासिक महत्व

नीलकंठ महादेव मंदिर का निर्माण 6वीं से 9वीं शताब्दी के बीच हुआ था। यह मंदिर भगवान शिव के नीलकंठ स्वरूप को समर्पित है, जिनका यह नाम समुद्र मंथन के दौरान विषपान करने के कारण पड़ा था।

मंदिर के शिलालेखों और इतिहासकारों के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण प्रति‍हारा वंश के महाराजाधिराज मथानदेव बड़गुर्जर द्वारा करवाया गया था। इस क्षेत्र को प्राचीन समय में राज्यपुरा और बाद में परनगर के नाम से जाना जाता था।

एक समय यह स्थान 200 से अधिक मंदिरों का समूह हुआ करता था, लेकिन इतिहास में कई आक्रमणों के कारण अधिकांश मंदिर नष्ट हो गए। किंवदंतियों के अनुसार, मुगल शासक औरंगज़ेब ने इस मंदिर को ध्वस्त करने का प्रयास किया था, लेकिन हजारों मधुमक्खियों के झुंड ने उसकी सेना पर हमला कर दिया और वे यहां से भागने पर मजबूर हो गए। यह घटना स्थानीय लोगों के बीच आज भी एक चमत्कारिक कथा के रूप में प्रचलित है।

मंदिर की अद्भुत वास्तुकला

नीलकंठ महादेव मंदिर त्रिकूट शैली में निर्मित है, जिसमें तीन गर्भगृह (मुख्य देवता के कक्ष) हैं। इस मंदिर की स्थापत्य कला अत्यंत भव्य और प्रभावशाली है:

मुख्य शिवलिंग पश्चिम दिशा में स्थापित है, जो प्राचीन शिल्पकला का उत्कृष्ट उदाहरण है। मंदिर की दीवारों और स्तंभों पर अप्सराएं, गंधर्व, मिथुन मूर्तियां, यक्ष और याली जैसी आकृतियां उकेरी गई हैं। कुछ नक्काशियां खजुराहो मंदिर की कामुक मूर्तियों से मिलती-जुलती हैं, जो उस समय की सामाजिक और सांस्कृतिक मान्यताओं को दर्शाती हैं। मंदिर परिसर में 9 मीटर ऊंची जैन तीर्थंकर शांतिनाथ की एकल पत्थर की प्रतिमा भी स्थित है, जो इस क्षेत्र में जैन धर्म के प्रभाव को दर्शाती है।

मंदिर की धार्मिक महत्ता

नीलकंठ महादेव मंदिर शिव भक्तों के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। यहां प्रतिवर्ष श्रावण मास और महाशिवरात्रि के अवसर पर भव्य मेले और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं। इन आयोजनों में देशभर से हजारों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए आते हैं।

स्थानीय मान्यता है कि यहां पूजा करने से सभी प्रकार के रोग और मानसिक कष्ट दूर हो जाते हैं और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

नीलकंठ महादेव मंदिर तक कैसे पहुंचे?

इस मंदिर तक पहुंचना किसी रोमांचक यात्रा से कम नहीं है। मंदिर सरिस्का टाइगर रिज़र्व के अंदर 30 किलोमीटर गहरे जंगलों में स्थित है और वहां पहुंचने के लिए ऊबड़-खाबड़ रास्तों और पहाड़ी पगडंडियों से होकर गुजरना पड़ता है।

नज़दीकी यात्रा मार्ग:

  • सबसे नज़दीकी हवाई अड्डा: जयपुर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (145 किमी)
  • सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन: अलवर जंक्शन (32 किमी)
  • सड़क मार्ग: अलवर से टैक्सी या निजी वाहन द्वारा सरिस्का होते हुए पहुंचा जा सकता है।

ध्यान दें: मंदिर तक पहुँचने के लिए स्थानीय गाइड की सहायता लेना बेहतर होता है, क्योंकि जंगल के रास्ते कठिन और घुमावदार हैं।

नीलकंठ महादेव मंदिर के आसपास के आकर्षण

अगर आप इस मंदिर की यात्रा कर रहे हैं, तो इसके आसपास स्थित कई दर्शनीय स्थलों की सैर भी कर सकते हैं:

  1. सरिस्का टाइगर रिज़र्व – वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक अद्भुत स्थान।
  2. राजौरगढ़ किला – प्राचीन दुर्ग जो कभी प्रतिहार राजाओं का गढ़ था।
  3. शांतिनाथ जैन मंदिर – जैन धर्म की समृद्ध परंपरा का प्रतीक।
  4. पांडुपोल हनुमान मंदिर – महाभारत काल से जुड़ा पौराणिक स्थल।

निष्कर्ष: क्यों जाएं नीलकंठ महादेव मंदिर?

नीलकंठ महादेव मंदिर धर्म, इतिहास, कला और प्रकृति का अद्भुत संगम है। यह मंदिर केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि प्राचीन भारतीय वास्तुकला और संस्कृति की महान विरासत का प्रतीक भी है।

अगर आप शांति, अध्यात्म और इतिहास से जुड़े स्थानों की यात्रा करना पसंद करते हैं, तो नीलकंठ महादेव मंदिर, अलवर की यात्रा आपके लिए अविस्मरणीय होगी!

1. क्या नीलकंठ महादेव मंदिर जाने के लिए कोई प्रवेश शुल्क है?

नहीं, इस मंदिर में प्रवेश निःशुल्क है।

2. क्या मंदिर पूरे साल खुला रहता है?

हाँ, लेकिन सावन और महाशिवरात्रि पर यहां विशेष आयोजन होते हैं।

3. क्या मंदिर तक पहुंचने के लिए निजी वाहन ले जा सकते हैं?

हाँ, लेकिन जंगल के रास्ते कठिन हैं, इसलिए बेहतर होगा कि स्थानीय गाइड की मदद लें।

4. नीलकंठ महादेव मंदिर किस लिए प्रसिद्ध है?

यह मंदिर अपनी प्राचीन वास्तुकला, शिवलिंग, खजुराहो जैसी नक्काशी और शांतिनाथ जैन प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है।