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राजस्थान की भूमि अपने ऐतिहासिक किलों, भव्य महलों और आध्यात्मिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध रही है, लेकिन कुछ कहानियाँ ऐसी भी होती हैं जो रहस्यमयी होते हुए भी जनआस्था का प्रतीक बन जाती हैं। “ओम बन्ना धाम” या “बुलेट बाबा मंदिर” ऐसी ही एक जगह है, जहाँ श्रद्धा और चमत्कार की एक अनोखी कहानी देखने को मिलती है।

ओम बन्ना कौन थे?

ओम बन्ना का असली नाम श्री ओम सिंह राठौड़ था, जो राजस्थान के पाली ज़िले के निवासी थे। वह एक साहसी और नेकदिल युवक थे, जो अपनी 350 सीसी रॉयल एनफील्ड बुलेट मोटरसाइकिल पर अक्सर सफर करते थे।

दुर्घटना की वह दुर्भाग्यपूर्ण रात (1988)

साल 1988 में, ओम सिंह अपने गाँव से जोधपुर की ओर अपनी बाइक पर जा रहे थे। तभी पाली-जोधपुर नेशनल हाइवे 65 पर, चोटिला गाँव के पास उनका एक भीषण सड़क हादसे में निधन हो गया। उनकी बुलेट बाइक एक पेड़ से टकराई और उन्होंने वहीं दम तोड़ दिया।

पुलिस ने घटना स्थल से बुलेट को उठाकर थाने में जमा करवा दिया। लेकिन इसके बाद जो घटा, उसने इस घटना को एक चमत्कारी कथा में बदल दिया

चमत्कार की शुरुआत

  • अगली सुबह पुलिस ने देखा कि बुलेट थाने से गायब हो गई है और फिर उसी जगह पर पहुँच गई, जहाँ हादसा हुआ था।
  • पुलिस ने बाइक को वापस थाने लाया, लेकिन यह घटना बार-बार दोहराई जाने लगी
  • बुलेट को चेन और ताले से बाँधा गया, पेट्रोल निकाल लिया गया, लेकिन वह हर बार चमत्कारिक रूप से हादसे वाली जगह पर लौट आती थी

यह देखकर स्थानीय लोगों ने इसे दैवीय संकेत माना और यह विश्वास बन गया कि ओम बन्ना की आत्मा यात्रियों की सुरक्षा करती है

बुलेट बाबा का मंदिर

धीरे-धीरे, लोगों ने उस स्थान पर श्रद्धा के साथ पूजा करना शुरू कर दिया। आज वही स्थान एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल बन चुका है जिसे हम ओम बन्ना धाम या बुलेट बाबा मंदिर के नाम से जानते हैं। यह मंदिर पाली से करीब 20 किमी और जोधपुर से करीब 40 किमी दूर स्थित है, हाइवे 65 पर।

मंदिर की विशेषताएँ

  • मंदिर में वही बुलेट मोटरसाइकिल एक शीशे के केस में सुरक्षित रखी गई है, जिसे लोग फूलमालाओं और लाल धागों से सजाते हैं।
  • यात्रियों का विश्वास है कि यहां पूजा करने से यात्रा सुरक्षित रहती है, खासकर हाईवे पर चलने वाले ट्रक ड्राइवर और मोटरसाइकिल सवार नियमित रूप से यहाँ रुकते हैं।
  • मंदिर के बाहर प्रसाद, पूजा सामग्री और ओम बन्ना की फोटो वाले चर्मलेख की दुकानें हैं।
  • कई लोग शराब की बोतलें चढ़ाते हैं, क्योंकि यह मान्यता है कि ओम बन्ना को शराब प्रिय थी।

जनमान्यता और आस्था

  • इस स्थल पर कोई बड़ा मंदिर नहीं, ना कोई पुरानी मूर्ति। फिर भी, यह स्थान हर वर्ष हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है
  • ओम बन्ना की कहानी आज भी स्थानीय लोकगीतों, फिल्मी गीतों और यात्राओं में जीवित है।
  • कुछ श्रद्धालु अपनी नई बाइक या कार की पूजा भी यहाँ आकर करते हैं।

कैसे पहुँचें?

  • स्थान: चोटिला गाँव, राष्ट्रीय राजमार्ग 65, जोधपुर से 40 किमी की दूरी पर।
  • निकटतम रेलवे स्टेशन: जोधपुर जंक्शन
  • निकटतम हवाई अड्डा: जोधपुर एयरपोर्ट
  • सड़क मार्ग से: टैक्सी, प्राइवेट वाहन या बस द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है।

यात्रा सुझाव

  • यात्रा के दौरान इस मंदिर को अपनी यात्रा योजना में अवश्य शामिल करें, विशेषकर यदि आप पाली या जोधपुर के रास्ते में हैं।
  • मंदिर पर भीड़ अधिक होती है, विशेषकर नवरात्रों और छुट्टियों के दौरान, इसलिए समय का ध्यान रखें।
  • मंदिर परिसर में स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करें।

निष्कर्ष

ओम बन्ना धाम एक अनोखी श्रद्धा का प्रतीक है, जहाँ परंपरा, चमत्कार और जनविश्वास एक साथ गूंथे हुए हैं।
यह मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह उन आधुनिक चमत्कारों में से एक है, जहाँ विज्ञान और आस्था की सीमाएं आपस में गले मिलती हैं।

यदि आप राजस्थान की यात्रा पर हैं, तो ओम बन्ना धाम की सादगी, चमत्कार और आस्था की यह कहानी आपके हृदय में एक विशेष स्थान बना जाएगी।

जय बुलेट बाबा!