राजस्थान के बुंदी शहर में स्थित “रानीजी की बावड़ी” एक अद्भुत स्थापत्य कला का उदाहरण है, जो अपनी भव्यता और इतिहास के कारण देश-विदेश के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। रानीजी की बावड़ी का निर्माण सन 1699 में बुंदी के शासक राव राजा अनिरुद्ध सिंह की छोटी रानी नाथावती जी द्वारा करवाया गया था। यही वजह है कि इसे “क्वीन स्टेपवेल (Queen Stepwell)” या “रानीजी की बावड़ी” के नाम से जाना जाता है।
ऐतिहासिक महत्व
रानीजी की बावड़ी बुंदी की सबसे बड़ी बावड़ी है। बुंदी में लगभग 50 से अधिक बावड़ियाँ हैं, लेकिन इस बावड़ी की भव्यता, गहराई और स्थापत्य कला इसे विशिष्ट बनाती हैं। इसका निर्माण मुख्यतः सूखे मौसम में जल संरक्षण के उद्देश्य से करवाया गया था। बावड़ियाँ उस काल में समाज के मेल-मिलाप और धार्मिक अनुष्ठानों के भी प्रमुख स्थल हुआ करती थीं।
वास्तुकला का अनुपम संगम
रानीजी की बावड़ी वास्तुकला के राजपूताना, मुगल एवं विक्टोरियन शैलियों के सुंदर सम्मिश्रण का अनूठा उदाहरण है। इसकी गहराई लगभग 46 मीटर है और यह बहुमंजिला संरचना है, जिसमें प्रत्येक तल पर पूजा के स्थान बनाए गए हैं। प्रवेश द्वार का विशाल एवं भव्य तोरण पर्यटकों का स्वागत करता है।
बावड़ी की दीवारों और स्तम्भों पर उत्कृष्ट नक्काशी की गई है। विशेष रूप से गजराज (हाथी) की आकृतियाँ प्रमुखता से उकेरी गई हैं, जिनकी सूंड अंदर की ओर मुड़ी है। यह ऐसी कल्पना को जन्म देता है मानो हाथी बावड़ी से जल ग्रहण कर रहे हों। प्रवेश द्वार के चार स्तंभ और उनके कोनों पर हाथियों की सुंदर प्रतिमाएँ भी इस बावड़ी की शोभा बढ़ाती हैं।
धार्मिक व सांस्कृतिक महत्व
रानीजी की बावड़ी न केवल जल संरक्षण का एक माध्यम थी बल्कि यह धार्मिक महत्व भी रखती थी। यहाँ प्रत्येक तल पर छोटे-छोटे मंदिर या पूजास्थल बने हुए हैं, जहाँ स्थानीय लोग पूजा-अर्चना करते थे। यह स्थान सामाजिक और धार्मिक समारोहों के लिए भी विशेष था। यहाँ स्थानीय त्योहारों और मेलों के दौरान लोग बड़ी संख्या में एकत्रित होते थे।
पर्यटन आकर्षण
आज रानीजी की बावड़ी बुंदी आने वाले पर्यटकों के लिए प्रमुख पर्यटन स्थल बन चुकी है। बावड़ी के अंदर जाने के लिए संकरी सीढ़ियाँ बनी हुई हैं जो इसकी संरचना को और भी रोमांचक बनाती हैं। बावड़ी के भीतर उतरने पर उसकी भव्यता पर्यटकों को आश्चर्यचकित कर देती है। इतिहास प्रेमियों के साथ ही फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए भी यह स्थान स्वर्ग के समान है।
आसपास के दर्शनीय स्थल
बुंदी शहर अपने अनेक ऐतिहासिक स्थलों के लिए विख्यात है। रानीजी की बावड़ी घूमने के बाद पर्यटक तारागढ़ किला, गढ़ पैलेस, चित्रशाला और सुख महल जैसे अन्य स्थलों का भ्रमण कर सकते हैं। बुंदी के स्थानीय बाजारों से हस्तशिल्प, आभूषण और वस्त्र आदि खरीदकर पर्यटक यहाँ की सांस्कृतिक धरोहर को साथ लेकर जा सकते हैं।
कैसे पहुँचें
रानीजी की बावड़ी तक पहुँचना काफी सरल है। शहर के किसी भी हिस्से से स्थानीय बस, टैक्सी या ऑटो रिक्शा की सहायता से आसानी से यहाँ तक पहुँचा जा सकता है।
बुंदी आने वाले हर व्यक्ति के लिए “रानीजी की बावड़ी” इतिहास, कला, संस्कृति और वास्तुकला का एक जीवंत संग्रहालय है, जो अपनी अमूल्य धरोहरों के साथ आपके स्वागत के लिए सदैव तैयार रहता है।