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राजस्थान के सवाई माधोपुर ज़िले के एक छोटे-से गाँव चौथ का बरवाड़ा में स्थित है चौथ माता मंदिर, जो न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि राजस्थान की शक्तिपीठों में भी एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह मंदिर सवाई माधोपुर ज़िला मुख्यालय से लगभग 25 किमी की दूरी पर स्थित है और इसकी गिनती प्रदेश के सबसे प्राचीन देवी मंदिरों में होती है।

मंदिर का इतिहास और स्थापना

चौथ माता मंदिर का निर्माण लगभग 565 वर्ष पूर्व हुआ माना जाता है। मान्यता है कि चौथ माता की मूर्ति को मूलतः राजस्थान के भीलवाड़ा जिले से लाकर यहाँ स्थापित किया गया था। यह मंदिर राजपूत शासक महाराजा भेम सिंह द्वारा बनवाया गया, जिन्होंने माता की कृपा से एक युद्ध में विजय प्राप्त की थी।

उन्होंने अपनी श्रद्धा स्वरूप चौथ माता की मूर्ति को पहाड़ी पर स्थापित किया और वहाँ मंदिर का निर्माण करवाया। मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग 700 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं, लेकिन जैसे-जैसे श्रद्धालु ऊपर बढ़ते हैं, उन्हें देवी की ऊर्जा और उपस्थिति का अनुभव होने लगता है।

चौथ माता कौन हैं?

चौथ माता को देवी दुर्गा का एक रूप माना जाता है। विशेष रूप से इन्हें संतान सुख की दात्री, रक्षा की देवी, और मनोकामना पूर्ण करने वाली माता के रूप में पूजा जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, माता चौथ रक्षक और न्याय की देवी हैं – जो सच्चे मन से माँगी गई प्रार्थनाओं को अवश्य सुनती हैं।

मंदिर की प्रमुख विशेषताएं

  • मंदिर पहाड़ी पर स्थित होने के कारण शुद्ध वातावरण, शांति, और भव्य दृश्यावलोकन का अनुभव मिलता है।
  • यहाँ देवी की शेर पर सवार मूर्ति है, जो चतुर्भुजी रूप में है – हाथों में त्रिशूल, कमल, खप्पर और अभय मुद्रा।
  • मंदिर परिसर में अन्य देवताओं की मूर्तियाँ और छोटा सा यज्ञ कुंड भी है।
  • मंदिर का प्रांगण बहुत ही साफ-सुथरा और व्यवस्थित है।
  • श्रद्धालु यहाँ कच्ची नारियल, लाल चुनरी, फूल, और मिठाई अर्पित करते हैं।

चौथ माता मेला – आस्था का जनसैलाब

हर वर्ष माघ मास की चतुर्थी तिथि पर यहाँ विशाल मेला आयोजित होता है जिसे चौथ माता मेला कहा जाता है। इस मेले में लाखों श्रद्धालु दूर-दूर से माता के दर्शन करने आते हैं। भक्तजन नंगे पाँव चलकर मंदिर तक जाते हैं और माता के दर्शन कर कृतज्ञता प्रकट करते हैं।

मेले में भजन कीर्तन, धार्मिक झाँकियाँ, सांस्कृतिक कार्यक्रम, और दुकानों की भरमार रहती है। इस मेले का वातावरण श्रद्धा, उत्सव और उल्लास से भरा होता है।

मंदिर तक कैसे पहुंचे?

सड़क मार्ग से

  • चौथ माता मंदिर, सवाई माधोपुर से 25 किमी की दूरी पर है।
  • आप यहाँ टैक्सी, बस या निजी वाहन से आराम से पहुंच सकते हैं।

रेल मार्ग से

  • नज़दीकी रेलवे स्टेशन सवाई माधोपुर जंक्शन है, जो भारत के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है।
  • स्टेशन से मंदिर तक टैक्सी या ऑटो आसानी से मिल जाते हैं।

हवाई मार्ग से

  • नज़दीकी हवाई अड्डा जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट (लगभग 150 किमी) है।

यात्रा सुझाव

  • सीढ़ियाँ अधिक होने के कारण आरामदायक जूते पहनें और पानी की बोतल साथ रखें
  • गर्मी में छाता या टोपी ज़रूर रखें।
  • सुबह-सुबह दर्शन करना ज्यादा अच्छा रहता है – भीड़ कम होती है और वातावरण भी शांत होता है।
  • अगर माघ मास की चतुर्थी को दर्शन करें तो मेला का रोमांच और भक्ति का अनुभव दोनों ही चरम पर होते हैं।

निष्कर्ष

चौथ माता मंदिर, आस्था, इतिहास और आध्यात्मिक ऊर्जा का संगम है। यहाँ केवल दर्शन नहीं होते, बल्कि मन को शांति, आत्मा को सुकून, और हृदय को आशा मिलती है। यह स्थान उन लोगों के लिए विशेष है जो शक्ति के दिव्य रूप को श्रद्धा से महसूस करना चाहते हैं।

अगर आप राजस्थान की धार्मिक और सांस्कृतिक यात्रा पर हैं, तो चौथ माता मंदिर को अपनी सूची में अवश्य शामिल करें। यह स्थान आपकी यात्रा को पुण्य, परिपूर्णता और भक्ति से भर देगा।