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राजस्थान की साहित्यिक और सांस्कृतिक नगरी टोंक में स्थित सुनहरी कोठी (Sunehri Kothi) या गोल्डन मेंशन, एक ऐसी धरोहर है जो अपनी सादगी भरे बाहरी स्वरूप से आपको धोखा दे सकती है, लेकिन जैसे ही आप इसके अंदर प्रवेश करते हैं, एक अलौकिक सौंदर्य आपके सामने प्रकट होता है। सुनहरी कोठी का निर्माण 19वीं सदी में किया गया था और आज इसे राजस्थान सरकार द्वारा एक ऐतिहासिक स्मारक घोषित किया जा चुका है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और निर्माण

सुनहरी कोठी का निर्माण 19वीं शताब्दी के मध्य में टोंक के तत्कालीन नवाब मोहम्मद इब्राहिम अली खान (1870–1930) के शासनकाल में हुआ था। इसे विशेष रूप से शाही दरबार, सांस्कृतिक सभाओं और संगीत महफिलों के लिए उपयोग में लाया जाता था। यह कोठी टोंक के नवाबी दौर की शानदार कला, स्थापत्य और राजसी विलासिता का जीता-जागता उदाहरण है।

कोठी का बाहरी भाग बेहद सामान्य दिखता है, लेकिन जैसे ही आप भीतर प्रवेश करते हैं, तो उसकी अद्वितीय सोने की सजावट, शीशे की चमक और नाजुक मीनाकारी देख कर आप मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।

स्थापत्य कला और सज्जा

सुनहरी कोठी को प्रमुखतः “शीश महल” के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इसके अंदर का दरबार हॉल शीशे, सोने और फूलों की कलात्मक सजावट से परिपूर्ण है। यहाँ की सजावट में प्रयुक्त कांच का काम, रंगीन मीनाकारी, और दीवारों पर उकेरी गई फूल-पत्तियों की आकृतियाँ, मुगल और राजपूत शैलियों का अनूठा संगम प्रस्तुत करती हैं।

  • दीवारें और छतें सोने की पत्तियों और शीशे के टुकड़ों से सजी हैं।
  • मीनाकारी और जड़ाई का कार्य इतनी बारीकी से किया गया है कि हर कोना एक कलात्मक चमत्कार प्रतीत होता है।
  • हर दीवार और स्तंभ पर उकेरी गई आकृतियाँ उस युग की शिल्पकला की ऊँचाई को दर्शाती हैं।

शीश महल: भीतर की दिव्यता

कोठी के भीतर बना शीश महल (Glass Hall) इसका सबसे प्रमुख आकर्षण है। यह कक्ष कभी नवाबों द्वारा संगीत, शायरी और गज़लों की महफिलों के लिए प्रयोग में लाया जाता था। जब रोशनी शीशों से टकराकर पूरे कक्ष में बिखरती है, तो ऐसा प्रतीत होता है जैसे तारों भरा आसमान ज़मीन पर उतर आया हो

स्थान और पहुँच

सुनहरी कोठी, टोंक शहर के नजर बाग रोड पर स्थित है, और बड़ा कुआँ के पास आसानी से पहुंचा जा सकता है। यह जयपुर से लगभग 95 किलोमीटर की दूरी पर है और सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है।

ऐतिहासिक महत्व और संरक्षण

राजस्थान सरकार ने सुनहरी कोठी को “महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्मारक” के रूप में घोषित किया है। हालाँकि यह स्थल पर्यटन की भीड़ से अब तक काफी हद तक अछूता है, लेकिन इसके संरक्षण और प्रचार-प्रसार की आवश्यकता आज भी बनी हुई है। इसकी बेजोड़ सुंदरता और ऐतिहासिक महत्त्व इसे राजस्थान की छिपी हुई धरोहरों में स्थान दिलाता है।

समापन

सुनहरी कोठी केवल एक भवन नहीं, बल्कि शाही जीवनशैली, उत्कृष्ट कला और सांस्कृतिक वैभव का एक सुंदर उदाहरण है। यहाँ आकर आप न केवल नवाबी दौर की भव्यता का अनुभव करते हैं, बल्कि आपको राजस्थान की अलभ्य वास्तुकला की झलक भी मिलती है।

यदि आप राजस्थान की प्रसिद्ध और कम-प्रसिद्ध धरोहरों को गहराई से जानना चाहते हैं, तो टोंक की सुनहरी कोठी को अपनी यात्रा सूची में अवश्य शामिल करें। यहाँ की चमकती दीवारें, संगीत की गूंजती यादें और शाही भव्यता आपको सदैव स्मृति में बनी रहेगी।