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राजस्थान के चूरू ज़िले की सुजानगढ़ तहसील में स्थित, ताल छापर अभयारण्य (Tal Chhapar Sanctuary) न केवल काले हिरणों का सुरक्षित घर है, बल्कि यह पक्षी प्रेमियों के लिए एक स्वर्ग समान है। लगभग 210 किलोमीटर दूर जयपुर से स्थित यह अभयारण्य, अपने खुले घास के मैदानों और विरल पेड़ों की वजह से अफ्रीकी सवाना की याद दिलाता है।

इतिहास और स्थापना

इस अभयारण्य का नाम पास के छापर गाँव के नाम पर रखा गया है और पहले यह बीकानेर रियासत के महाराजा का निजी शिकार क्षेत्र हुआ करता था। पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से इस क्षेत्र को एक संरक्षित अभयारण्य का दर्जा दिया गया, जिससे यहां की जैव विविधता को संरक्षित किया जा सके।

प्रमुख आकर्षण: काले हिरण और पक्षी प्रजातियाँ

ताल छापर अभयारण्य खासतौर पर अपने काले हिरण (Black Buck) के लिए प्रसिद्ध है। ये सुंदर, अलंकृत सींगों वाले मृग यहां सैकड़ों की संख्या में खुले मैदानों में विचरण करते हुए देखे जा सकते हैं।

लेकिन काले हिरणों के साथ-साथ यह अभयारण्य पक्षी प्रेमियों के लिए भी एक अनमोल खजाना है। खासकर सर्दियों के मौसम में, जब यहां प्रवासी पक्षियों का आगमन होता है, तो यह इलाका चहचहाहट से भर उठता है।

यहाँ पाए जाने वाले प्रमुख पक्षी:

  • डेमोइसल क्रेन्स (Demoiselle Cranes)
  • ईस्टर्न इम्पीरियल ईगल (Eastern Imperial Eagle)
  • ब्लैक आइबिस (Black Ibis)
  • स्काईलार्क्स (Skylarks)
  • रिंग डव्स (Ring Doves)
  • हर्पर लॉर्क और ग्रासलैंड वार्बलर

वन्य जीव विविधता

पक्षियों के साथ-साथ इस अभयारण्य में रेगिस्तानी लोमड़ी (Desert Fox), रेगिस्तानी बिल्ली (Desert Cat), नीलगाय (Blue Bull), साही (Porcupine) और कई प्रकार के छोटे स्तनधारी भी रहते हैं।

भौगोलिक संरचना और वातावरण

  • यह अभयारण्य एक समतल, निम्न झीलनुमा घास भूमि (Tal) पर स्थित है जो मानसून में थोड़े समय के लिए जलमग्न हो जाती है, और उसके बाद यह हरी घास के मैदानों में परिवर्तित हो जाती है।
  • इस क्षेत्र की जलवायु शुष्क और अर्ध-रेगिस्तानी है, जहां सर्दियों में तापमान बेहद कम और गर्मियों में अत्यधिक अधिक हो जाता है।

भ्रमण सुझाव

  • स्थान: छापर गाँव, सुजानगढ़, ज़िला चूरू, राजस्थान
  • दूरी: जयपुर से 210 किमी, बीकानेर से 132 किमी
  • आदर्श समय: अक्टूबर से मार्च (सर्दियों के मौसम में प्रवासी पक्षियों का जमावड़ा)
  • कैसे पहुँचे:
    • रेल: छापर रेलवे स्टेशन अभयारण्य के पास है
    • सड़क मार्ग: जयपुर, बीकानेर और चूरू से सीधी बस या टैक्सी
  • प्रवेश शुल्क: बहुत कम शुल्क, फ़ोटोग्राफ़ी हेतु अतिरिक्त शुल्क लग सकता है

निष्कर्ष

ताल छापर अभयारण्य केवल एक अभयारण्य नहीं, बल्कि एक ऐसी जगह है जहाँ प्रकृति की शांति, वन्य जीवन की चपलता और पक्षियों की संगीतपूर्ण उपस्थिति एक साथ अनुभव की जा सकती है। यदि आप राजस्थान की रेतीली भूमि में एक हरे-भरे और जीवन्त आश्रय की तलाश में हैं, तो ताल छापर ज़रूर आइए।

यहाँ आकर हर कोई यही महसूस करता है – कि राजस्थान केवल रेगिस्तान नहीं, बल्कि प्रकृति की विविधता का भी अद्भुत संगम है।