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राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक वैभव के प्रतीक बूंदी जिले में स्थित तारागढ़ किला अपनी भव्यता, ऐतिहासिक महत्व और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। बूंदी शहर के ऊपर ऊँची पहाड़ी पर स्थित यह किला, जिसे “स्टार फोर्ट” भी कहा जाता है, अपनी प्रभावशाली संरचना और शानदार स्थापत्य के लिए जाना जाता है।

इतिहास की गूंज

तारागढ़ किले का निर्माण सन 1354 में बूंदी के संस्थापक राव देव हाड़ा के वंशजों द्वारा कराया गया था। यह किला कई युद्धों का साक्षी रहा है और इतिहास की अनेक घटनाओं को अपने भीतर संजोए हुए है। ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार यह किला अपने समय में सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण था और कई आक्रमणों को सहते हुए भी अजेय रहा।

अद्भुत वास्तुकला और राजपूताना शैली का नमूना

तारागढ़ किले की वास्तुकला राजपूत स्थापत्य शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है। किले की मजबूत दीवारें, विशाल प्रवेश द्वार, और खूबसूरत झरोखे इसकी भव्यता को दर्शाते हैं। किले में कई महल, बावड़ियाँ, मंदिर और उद्यान हैं जो आगंतुकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनते हैं। किले के स्तंभों पर हाथी, कमल और अन्य धार्मिक प्रतीक चिन्हों की नक्काशी देखने योग्य है।

प्रमुख दर्शनीय स्थल

भीम बुर्ज

किले का सबसे ऊंचा और विशाल बुर्ज “भीम बुर्ज” के नाम से प्रसिद्ध है। इसे बूंदी की रक्षा के लिए तोप रखने के उद्देश्य से बनाया गया था। यहां से बूंदी शहर का मनोरम दृश्य देखने को मिलता है।

रानी महल

किले के भीतर स्थित रानी महल अपनी आकर्षक चित्रकारी और भित्ति चित्रों के लिए जाना जाता है। यहां के भित्ति चित्रों में राजस्थानी लोकजीवन, युद्ध के दृश्य और धार्मिक कहानियाँ चित्रित की गई हैं।

चित्रशाला

तारागढ़ किले की चित्रशाला बूंदी शैली के लघु चित्रों के लिए प्रसिद्ध है। इन चित्रों में महाभारत, रामायण और कृष्ण लीला जैसे धार्मिक एवं पौराणिक विषयों को चित्रित किया गया है। चित्रशाला में आने वाले पर्यटक इन अद्भुत कला कृतियों को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।

जल प्रबंधन प्रणाली

किले में प्राचीन जल संग्रहण प्रणाली है, जिसमें वर्षा जल का संग्रहण और संरक्षण किया जाता था। विशाल जलाशयों और बावड़ियों के माध्यम से किले के निवासियों को पूरे वर्ष जल की आपूर्ति सुनिश्चित होती थी। यह प्रणाली प्राचीन भारतीय अभियंत्रण का बेहतरीन उदाहरण है।

रहस्यमयी सुरंगों का जाल

किले में मौजूद सुरंगों की एक जटिल प्रणाली है, जो किले को शहर के विभिन्न हिस्सों से जोड़ती है। कहा जाता है कि युद्ध के दौरान ये सुरंगें शाही परिवार के लिए गुप्त निकास मार्ग के रूप में काम आती थीं। हालांकि, आज इन सुरंगों का अधिकांश हिस्सा बंद कर दिया गया है, फिर भी इनकी उपस्थिति पर्यटकों में रोमांच पैदा करती है।

स्थानीय मान्यताएं और किंवदंतियां

स्थानीय लोक कथाओं के अनुसार, तारागढ़ किले में एक गुप्त खजाना छिपा हुआ है जिसकी जानकारी केवल पठान जनजाति के योद्धाओं के पास थी। किंवदंती है कि इस खजाने की गुप्त जानकारी द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अंतिम पठान योद्धा के साथ ही विलुप्त हो गई। ये कहानियाँ आज भी पर्यटकों के बीच चर्चा का विषय बनी रहती हैं।

पर्यटकों के लिए सुझाव

  • तारागढ़ किले तक पहुंचने के लिए अच्छी तरह से तैयार जूते और पर्याप्त पानी साथ ले जाना आवश्यक है, क्योंकि मार्ग थोड़ा कठिन और चढ़ाई वाला है।
  • स्थानीय गाइड की मदद लेने से आप किले के इतिहास और विभिन्न स्थलों के बारे में बेहतर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
  • किले की यात्रा के दौरान अपने साथ कैमरा अवश्य रखें, क्योंकि यहाँ से शहर और आस-पास की घाटियों के दृश्य बेहद खूबसूरत हैं।

आस-पास के आकर्षण

बूंदी की यात्रा के दौरान आप पास ही स्थित अन्य दर्शनीय स्थलों जैसे रानीजी की बावड़ी, गढ़ पैलेस, सुख महल और नवल सागर झील की भी यात्रा कर सकते हैं। ये सभी स्थल बूंदी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और वास्तु कला के उत्कृष्ट नमूने हैं।

तारागढ़ किला: ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर

तारागढ़ किला सिर्फ एक ऐतिहासिक स्थल ही नहीं बल्कि बूंदी की गौरवशाली संस्कृति और इतिहास का जीवंत प्रमाण है। यह किला अपने अद्भुत वास्तुशिल्प, ऐतिहासिक महत्व और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण राजस्थान के पर्यटन स्थलों में एक विशेष स्थान रखता है। यदि आप इतिहास, कला, और संस्कृति में रुचि रखते हैं तो तारागढ़ किला आपकी यात्रा सूची में अवश्य होना चाहिए।