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चित्तौड़गढ़ किले में स्थित विजय स्तम्भ (Tower of Victory) राजस्थान का वह स्मारक है, जो सिर्फ अपनी सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि मेवाड़ की अपराजेय वीरता और गौरवशाली इतिहास के लिए भी विश्वभर में प्रसिद्ध है। यह स्मारक मेवाड़ के महान शासक महाराणा कुंभा की विजय का प्रतीक है।

इतिहास – किसने बनवाया विजय स्तम्भ?

निर्माता: महाराणा कुंभा, मेवाड़ के महान योद्धा और कूटनीतिक शासक
निर्माण काल: 1440 ईस्वी से 1448 ईस्वी
उद्देश्य: मालवा और गुजरात के मुस्लिम शासकों पर महाराणा कुंभा की ऐतिहासिक विजय को अमर करने के लिए

महाराणा कुंभा मेवाड़ के इतिहास में स्वर्णिम स्थान रखते हैं। उन्होंने अपने शासनकाल में किलेबंदी, स्थापत्य कला, युद्ध कौशल और संस्कृति—हर क्षेत्र में महान योगदान दिया।

राजस्थान पुलिस का प्रतीक – विजय स्तम्भ

बहुत कम लोग जानते हैं कि विजय स्तम्भ, राजस्थान पुलिस का आधिकारिक प्रतीक (Emblem) भी है।

क्यों?

क्योंकि यह स्तम्भ साहस, पराक्रम, सत्य, न्याय और सुरक्षा की वही भावना दर्शाता है, जिसके लिए राजस्थान पुलिस खड़ी है।
इसलिए राजस्थान पुलिस के लोगो (Emblem) में विजय स्तम्भ का चित्र अंकित है — जो दर्शाता है कि पुलिस सत्य और वीरता के मार्ग पर अडिग रहेगी।

वास्तुकला – कला और शक्ति का संगम

विजय स्तम्भ की वास्तुकला मेवाड़ी कला की शानदार विरासत को दर्शाती है।

  • यह 9-मंज़िला ऊँचा स्तम्भ है।
  • निर्माण में लाल बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर का खूबसूरत संयोजन उपयोग हुआ है।
  • स्तम्भ के हर हिस्से पर बेहद बारीक देवी-देवताओं, अप्सराओं, ऋषियों और महापुरुषों की मूर्तियाँ उकेरी गई हैं।
  • कुल मिलाकर इसमें 1000 से अधिक मूर्तियाँ हैं, जो इसे एक अनूठा कला-धरोहर बनाती हैं।

अंदर जाने का अनुभव

स्तम्भ के भीतर संकरी, घुमावदार सीढ़ियाँ बनी हैं जो ऊपर तक ले जाती हैं।
ऊपर की छत से दिखाई देता है —

  • पूरा चित्तौड़गढ़ शहर
  • विशाल किले का परिसर
  • आसपास की अरावली पहाड़ियों का मनमोहक दृश्य

यह दृश्य सूर्यास्त के समय और भी अद्भुत हो जाता है।

कम-ज्ञात लेकिन महत्वपूर्ण तथ्य

1. विजय स्तम्भ को बनाने वाले मुख्य स्थापत्यकार (Architect)

इतिहास में माना जाता है कि इसे जैत्र सिंह नाम के एक कुशल शिल्पकार और उनके दल ने बनाया था। (कुछ ऐतिहासिक अभिलेखों में “रामलाल” और “शंबूक” जैसे शिल्पियों का भी उल्लेख है।)

2. 1000+ मूर्तियों का खजाना

हर मंज़िल पर कला का अलग रूप—शक्ति, विष्णु अवतार, जैन मूर्तियाँ और युद्ध दृश्यों की नक्काशी।

3. महाराणा कुंभा ने 84 किले जीतकर मेवाड़ को मजबूत किया

उनका शासनकाल चित्तौड़ का स्वर्णकाल माना जाता है।

✔ 4. रात्रि रोशनी (Night Illumination)

रात में जब इसे पीले-स्वर्णिम प्रकाश से सजाया जाता है, तो पूरा स्मारक जीवन्त प्रतीत होता है।

5. इसके पास ही स्थित है ‘कीर्ति स्तम्भ’

एक और प्रसिद्ध जैन स्मारक जो इसे देखने आने वालों के लिए अतिरिक्त आकर्षण है।

पर्यटकों के लिए सुझाव

  • सुबह-सुबह या शाम के समय घूमना सबसे सुखद।
  • ऊपर तक जाने की सीढ़ियाँ संकरी हैं, इसलिए आरामदायक जूते पहनें।
  • इतिहास को गहराई से जानने के लिए लोकल गाइड उत्कृष्ट विकल्प है।
  • पास स्थित कीर्ति स्तम्भ, मीराबाई मंदिर, चित्तौड़गढ़ किला भी अवश्य देखें।

समापन – मेवाड़ की शौर्य गाथा का जीवंत प्रतीक

विजय स्तम्भ सिर्फ पत्थरों का बना स्मारक नहीं, बल्कि मेवाड़ की वीरता, समर्पण और गौरव का अमिट प्रमाण है। राजस्थान आने वाला हर यात्री यहाँ आकर इतिहास के उस युग को महसूस करता है जिसने भारत को साहस और बलिदान की अनगिनत कहानियाँ दीं।